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थोड़ी राहत मगर उम्मीद पर खरा नहीं उतरा बजट

बीएस संवाददाता /  February 01, 2020

ऐसे वक्त जब भारत की जीडीपी वृद्धि दर एक दशक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है, बाजार राजकोषीय फिसलन की कीमत पर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बड़े उपायों की उम्मीद कर रहे थे। उच्च विकास दर और कंपनियों की बेेहतर कमाई से बाजारों को उच्च मूल्यांकन बनाए रखने और ज्यादा विदेशी तथा घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलती। पिछले साल सितंबर में कंपनी कर की दरों में कटौती तथा रियल्टी और एनबीएफसी क्षेत्रों को उबारने के लिए उठाए गए कदमों से बाजारों में उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन बजट ने इनमें से अधिकांश उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसमें कंपनियों की कमाई बढ़ाने के उपायों का अभाव रहा। बाजार की प्रतिक्रिया भी इसका संकेत है। 

 
आनंद राठी शेयर्स ऐंड स्टॉक ब्रोकर्स के मुख्य अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक सूजन हाजरा कहते हैं, 'अगर कोई अर्थव्यवस्था में तेजी के उपायों की उम्मीद कर रहा था, तो ऐसा कुछ नहीं हुआ। बजट में बुनियादी ढांचे, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर दिया गया है। लेकिन बहुत बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं।' ऐक्सिस सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख पंकज बोबडे ने कहा, 'बाजार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कुछ ठोस उपायों की उम्मीद कर रहा था लेकिन सरसरी नजर में देखने पर ऐसा नहीं लगता है।' 
 
अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में घोषित उपायों का अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर बहुत ज्यादा असर देखने को नहीं मिलेगा। वित्त मंत्री ने नई वैकल्पिक आय कर व्यवस्था से 40 हजार करोड़ रुपये का फायदा मिलने का दावा किया है लेकिन शायद ऐसा नहीं होगा। साथ ही लाभांश वितरण कर को खत्म नहीं किया गया है बल्कि इसमें कुछ बदलाव किया गया है। इसमें भी अब लाभांश पाने वाले लोगों को कर देना होगा जिससे उनके हाथ में कम पैसे आएंगे। इससे खपत प्रभावित हो सकती है। 
 
शेयरखान के मुख्य कार्याधिकारी जयदीप अरोड़ा कहते हैं, 'व्यक्तिगत आय कर की दरों में कटौती का प्रभाव सीमित रह सकता है क्योंकि इसके लिए आपको अब तक मिलने वाली छूट छोडऩी होगी।'  कुछ विशेषज्ञ कम कर संग्रह और जीडीपी विकास दर में गिरावट को देखते हुए बजट को सकारात्मक मानते हैं। कोटक म्युचुअल फंड की इक्विटी प्रमुख शिवानी कूरियन ने कहा, 'कम कर संग्रह और आर्थिक विकास में कमी के बावजूद सरकार ने संतुलित बजट पेश किया है। सरकार ने एलआईसी को सूचीबद्ध कराने और आईडीबीआई में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है। साथ ही एयर इंडिया और अन्य कंपनियों में भी विनिवेश का प्रस्ताव है। अगर इनमें से एक कोशिश भी सफल रहती है तो इससे निजीकरण का रास्ता खुल जाएगा। करों में कटौती भी खपत बढ़ाने की सरकार की मंशा का संकेत है।' 
 
सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 3.5 फीसदी रखने और वित्त वर्ष 2021 में शुद्ध सरकारी उधारी के 5.36 लाख करोड़ रुपये रहने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है जिससे बॉन्ड प्रतिफल और भारतीय उद्योग जगत के लिए फंड की लागत काबू में रहेगी।  एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा, 'बॉन्ड बाजार के लिए उधारी के आंकड़े बाजार की उम्मीदें के अनुरूप है और इसमें हाल फिलहाल प्रतिफल पर कोई खास दौाव आने की उम्मीद नहीं है।'
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