बिजनेस स्टैंडर्ड - अरविंद के हाथ आईबीएम की कमान
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अरविंद के हाथ आईबीएम की कमान

नेहा अलावधी और देवाशिष महापात्र / नई दिल्ली/बेंगलूरु January 31, 2020

दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी इंटरनैशनल बिजनेस मशीन्स (आईबीएम) ने भारतीय मूल के अरविंद कृष्ण को अपना अगला मुख्य कार्याधिकारी बनाने की घोषणा की है। यह भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक और कीर्तिमान है। कृष्ण 6 अप्रैल को आईबीएम का जिम्मा संभालेंगे। वह वर्ष 2012 से ही मुख्य कार्याधिकारी का जिम्मा संभाल रहीं वर्जीनिया रोमैटी की जगह लेंगे। रोमैटी इस साल के अंत तक कंपनी के बोर्ड में कार्यकारी चेयरमैन बनी रहेंगी और करीब 40 साल सेवा देने के बाद कंपनी से सेवानिवृत्त होंगी।

 
रोमैटी ने कहा, 'आईबीएम की अगली पीढ़ी के लिए अरविंद उपयुक्त सीईओ हैं। वह बेहतरीन प्रौद्योगिकीविद हैं और कंपनी की मुख्य प्रौद्योगिकियों - कृत्रिम बुद्घिमत्ता, क्लाउड, क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचैन आदि के विकास में अहम भूमिका निभाई है।' उन्होंने कहा कि अरविंद ने आईबीएम के क्लाउड और सॉफ्टवेयर कारोबार का विस्तार किया है तथा कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े अधिग्रहण की अगुआई की है। सबसे बड़े अधिग्रहण से यहां रेड हैट को खरीदने से है। आईबीएम ने 2018 में 34 अरब डॉलर में इस सॉफ्टवेयर फर्म का अधिग्रहण किया था। 57 वर्षीय अरविंद करीब 29 साल से आईबीएम के साथ हैं। 1985 में आईआईटी कानपुर से स्नातक और इलिनॉय विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में पीएचडी करने के बाद 1990 में उन्होंने आईबीएम ज्वॉइन की थी। वह वर्तमान में आईबीएम में क्लाउड तथा कॉग्निटिव सॉफ्टवेयर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं।
 
अरविंद कृष्ण दुनिया की अग्रणी आईटी फर्मों की कमान संभाल रहे दिग्गज भारतीय मुख्य कार्याधिकारियों की जमात में शामिल हो गए हैं। दुनिया की अग्रणी आईटी फर्मों की कमान संभालने वाले दिग्गजों में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला, गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई, मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बंगा और एडोबी के सीईओ शांतनु नारायण प्रमुख हैं। कृष्ण से कंपनी की उम्मीदें भी काफी होंगी, क्योंकि अन्य भारतीय मूल के सीईओ ने अपनी-अपनी फर्मों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है और उनका मूल्यांकन भी ऐतिहासिक रूप से बढ़ाया है।
 
विश्लेषकों के अनुसार आईबीएम धीरे-धीरे अपना ध्यान आईटी सेवा प्रदाता से हटाकर क्लाउड प्रदाताओं जैसे एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के लिए सिस्टम इंटीग्रेटर पर काम करने की है। आईबीएम सेवा क्षेत्र की तुलना में प्रौद्योगिकी आधारित कारोबार में वृद्घि पर ज्यादा ध्यान दे रही है। बेंगलूरु की एचआर सर्च फर्म के कार्याधिकारी ने कहा, 'बड़ी तकनीकी कंपनियां भारतीय सीईओ के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। कृष्ण की पदोन्नति भी इसी के अनुरूप है। बेहतरीन तकनीकी पृष्ठभूमि वाले भारतीय इंजीनियर को आईटी फर्म के लिए अच्छा माना जाता है।'
 
कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और क्रिकइन्फो के सह-संस्थापक विशाल मिश्रा कृष्ण को करीब 20 साल से जानते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आईबीएम में काम करने वाले कृष्ण बेहद कार्यकुशल हैं। मिश्रा अपने स्नातक के समय को याद करते हैं जब वह सोच रहे थे कि कोलंबिया ज्वॉइन करूं या आईबीएम। उन्होंने कहा वह सलाह के लिए कृष्ण के पास गए और उन्होंने उन्हें सलाह दी। वह अगर चाहते तो वह आईबीएम ज्वॉइन कर सकते थे लेकिन उन्होंने सही सलाह दी। भारत आईबीएम के लिए बड़ा बाजार है और यहां उनके कर्मचारियों की संख्या करीब एक लाख है। 2018-19 में आईबीएम इंडिया का राजस्व 27,279 करोड़ रुपये रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2 फीसदी कम रहा। इस दौरान कंपनी का शुद्घ मुनाफा 2017-18 की तुलना में 12 फीसदी घटकर 2,426 करोड़ रुपये रहा। 
 
आईटी आउटसोर्सिंग सलाहकार और पारीख कंसल्टिंग के संस्थापक पारीख जैन ने कहा, 'भारत आईटी सेवा का बड़ा बाजार है और आईटी दिग्गजों के कर्मचारियों की अच्छी खासी हिस्सेदारी देश है, जो उनकी आपूर्ति का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में अरविंद कृष्ण जो खुद आईटी दिग्गज हैं, की अगुआई में आईबीएम क्लाउड कंप्यूटिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे नए क्षेत्रों और नए बाजारों में अगले चरण कके विकास की संभावना देख सकती है।'
 
नीमचवाला का विप्रो से इस्तीफा
 
आईटी कंपनी विप्रो के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक आबिदअली जेड नीमचवाला ने पारिवारिक प्रतिबद्धताओं की वजह से इस्तीफा देने का फैसला किया है। विप्रो ने बताया कि 52 वर्षीय नीमचवाला तब तक इस पद पर बने रहेंगे जब तक उनकी जगह पर कोई नई नियुक्ति नहीं हो जाती है। इससे कंपनी का कामकाज प्रभावित नहीं होगा। कंपनी ने बताया कि नीमचवाला ने पारिवारिक कारणों से पद से हटने का निर्णय लिया है। कंपनी बोर्ड ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है।
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