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विदेशी निवेशक सतर्क

सुंदर सेतुरामन / मुंबई January 31, 2020

भारतीय बाजारों को आगे ले जाने में अहम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने आम बजट से पहले अपना निवेश हल्का किया है। बजट शनिवार को पेश किया जाएगा। पिछले पांच कारोबारी सत्र में एफपीआई ने करीब 6,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। इस बिकवाली की एक अहम वजह कोरोनावायरस के प्रसार के कारण पैदा हुई जोखिम हो सकती है। हालांकि बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि समझदार निवेशकों की तरफ से बजट से पहले अपनी निवेश निकासी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शुक्रवार को एफपीआई ने 4,179 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जो दो साल से ज्यादा अवधि में एक दिन की सबसे बड़ी बिकवाली है। 
 
बाजार के उतारचढ़ाव की माप करने वाला इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स हफ्ते के दौरान 12 फीसदी उछल गया, जो संकेत देता है कि बजट के कारण बाजार में बड़ा परिचालन देखने को मिल सकता है। शनिवार को इक्विटी बाजार खुले रहेंगे। विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रेडरों ने खुद को उतारचढ़ाव वाले कारोबार के लिए तैयार कर लिया है। विगत के आंकड़ों को देखें तो बेंचमार्क सेंसेक्स में भारी उतारचढ़ाव रहा है और बजट सत्र के आखिर में यह गिरकर बंद हुआ है। पिछले 15 बजट के दिन सेंसेक्स में औसतन 3 फीसदी का उतारचढ़ाव देखा गया है और इनमें से 10 कारोबारी सत्र में यह गिरकर बंद हुआ है।
 
बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि सरकार को राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण और वृद्धि को बहाल करने के लिए कदमों के ऐलान के बीच सही संतुलन बिठाना होगा और यह बाजार पर असर डालेगा। बीएनपी पारिबा के इक्विटी रिसर्च प्रमुख अभिराम एलेश्वरपू ने कहा, बाजार के लिहाज से बजट हमेशा ही महत्वपूर्ण होता है। यह साल इसलिए खास है क्योंकि यह निवेशकोंं को बताएगा कि सरकार इस मंदी के बारे में क्या सोच  रही है। उन्होंने कहा, राजकोषीय घाटा अहम होता है। सरकार शायद राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को उस स्थिति में शायद बरकरार रखने के बारे में सोच रही होगी कि उसे खर्च में कटौती की दरकार है क्योंकि राजस्व संग्रह अनुमान से कम रहा है। यह राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगा, लेकिन मंदी को लंबा खींच देगा। अन्य विकल्प खर्च में कटौती नहीं करना है। इसका मतलब यह हो सकता है कि आप राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक जाएंगे, लेकिन यह उपभोक्ता के दबाव को कम करने का समाधान होगा।
 
मॉर्गन स्टैनली के इक्विटी रिसर्च प्रमुख रिधम देसाई ने कहा कि विभिन्न वर्षों में बाजार पर बजट का असर घटा है। हालांकि बाजार के लिहाज से यह अहम घटनाक्रम बना हुआ है। उन्होंने कहा, बाजार पर बजट का असर गिरावट के तौर पर दिखा है, इसके बावजूद बाजार के प्रतिभागियों को उतारचढ़ाव पर नजर रखने की दरकार है। देसाई के मुताबिक, बुनियादी ढांचा व किसानों पर सरकार की खर्च की योजना और प्रत्यक्ष कर में बदलाव (लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर समेत) आदि कुछ ऐसी चीजें हैं, जो निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगी। कुछ निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार लाभांश वितरण कर, पुनर्खरीद कर और एलटीसीजी आदि में राहत देगी।
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