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कोरोनावायरस से निपटने के लिए दुनिया कितनी है तैयार

चिकित्सा विज्ञान
देवांग्शु दत्ता /  January 31, 2020

चीन ने गत 31 दिसंबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचित किया था कि उसके हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में कुछ लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं। इस वायरस के संक्रमण का पहला मामला चीन में 8 दिसंबर को सामने आया था। अब तक यह वायरस 9,800 से अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है और इससे 200 से अधिक की मौत हो चुकी है। एक करोड़ से अधिक आबादी वाले वुहान और कुछ अन्य शहरों को अलग-थलग करने की कोशिशों के बावजूद इस घातक वायरस का प्रसार थम नहीं रहा है। 

 
इसका प्रसार दुनिया के कई देशों में हो चुका है। यह भारत में भी दस्तक दे चुका है। वुहान यूनिवर्सिटी से लौटी केरल निवासी एक छात्रा को संक्रमित पाया गया है। चीन की करीब चार करोड़ आबादी नो-ट्रैवल जोन घोषित किए जा चुके इलाके में रहती है। चीन में कई उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। चीन से आने वाले यात्रियों को दो हफ्ते तक निषिद्ध रखने की बात ब्रिटेन ने की है और भारत भी इसी तरह का प्रतिबंध लगा चुका है। यह जानवरों एवं पक्षियों से फैलने वाला वायरस है जो इंसानों को भी संक्रमित कर देता है। मसलन, चीन में ही दस्तक देने वाला सार्स वायरस भी चमगादड़ों एवं कस्तूरी बिलाव से इंसानों तक पहुंचा था। माना जाता है कि वुहान का नॉवेल कोरोनावायरस भी किसी जानवर या पक्षी से ही इंसान तक पहुंचा है और अब यह एक से दूसरे इंसान तक फैलता जा रहा है। जहां इस बीमारी में फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण नजर आते हैं वहीं कई दिनों तक संक्रमण के बाद भी कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। संक्रामक बीमारियों का प्रसार कई कारणों पर निर्भर करता है जिनमें से एक बढिय़ा ढांचागत आधार भी है।
 
इक्कीसवीं सदी में संक्रमित लोग कुछ ही घंटों में दुनिया के दूसरे छोर पर जा सकते हैं। और चीन के पास बेहतरीन ढांचागत आधार होने से वहां से संक्रामक बीमारी के तीव्र प्रसार की आशंका और अधिक है। इसके पहले हम 2003 में भी सार्स के संक्रमण के समय इसे देख चुके हैं। चिकित्सा क्षेत्र के जानकार किसी बीमारी की संक्रामक क्षमता को बेसिक रिप्रोडक्शन नंबर (आर0) की गणना से आंकते हैं। आर0 का आशय इससे है कि कोई संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ या मृत होने के पहले औसतन कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है? जिस बीमारी का आर0 अधिक होता है वह उतना ही अधिक संक्रामक मानी जाती है। अगर आर0 एक से कम है तो फिर वह बीमारी खुद-ब-खुद सिमट जाने वाली है और धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। अगर आर0 एक से अधिक है तो फिर संक्रमित व्यक्ति को अलग न रखने पर बीमारी फैलती जाएगी। आर0 संख्या में काफी भिन्नता भी हो सकती है। मसलन, इन्फ्लुएंजा का आर0 नंबर 2 से 3 होता है जबकि खसरा का आर0 12 से 18 तक होता है। सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा बेहद संक्रामक वायरस भी घातक नहीं होता है लिहाजा उससे डरने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन इबोला जैसी उच्च घातक दर वाली एक संक्रामक बीमारी बेहद डरावनी होती है।
 
जहां तक कोरोना का सवाल है तो इसके आर0 नंबर और न ही इसकी मृत्यु दर के बारे में ही अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध हो पाए हैं। लेकिन शोधकर्ता प्रारंभिक अनुमान लगा रहे हैं। कई लेखकों की भागीदारी वाले दो शोध-पत्र सामने भी आ चुके हैं। हॉन्गकॉन्ग की एक शोध टीम द्वारा प्रकाशित शोध-पत्र में कहा गया है, 'हमारा अनुमान है कि इस वायरस का माध्य आर0 2.24 से लेकर 3.58 के बीच है और मामले सामने आने की दर दोगुनी से आठ-गुनी है।' अगर आर0 नंबर को सबसे निचले स्तर 2.24 पर भी रखें तो इसका मतलब है कि यह बीमारी तेजी से फैलने वाली है।
 
वहीं ग्वांगतोंग प्रांत के बीमारी नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने अपने शोध-पत्र में कहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद उसके लक्षण उजागर होने में 4.8 दिन लगते हैं। एक बार लक्षण सामने आने के बाद 2.9 दिन में मरीज को अलग रखने की नौबत आ जाती है जबकि सार्स वायरस के मामले में यह स्थिति 4.2 दिन में आती है। इसके मुताबिक 'महामारी फैलाने के लिहाज से सार्स की तुलना में नॉवेल कोरोना अधिक जोखिम वाला है। हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर किए गए प्रयासों ने इस महामारी का खतरा काफी कम किया है। लेकिन इसका प्रसार रोकने के लिए अधिक सख्त नियंत्रण एवं रोकथाम संबंधी उपायों की जरूरत है।'
 
चीन के वैज्ञानिकों ने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को कोरोनावायरस से संबंधित जानकारियां देने में काफी तत्परता दिखाई है। चीन ने 10 जनवरी तक इस वायरस की जीनोम संरचना जारी कर दी थी। इससे फ्लू की तरह लक्षणों वाले मरीजों का फौरन परीक्षण कर कोरोना से संक्रमित होने के बारे में पता लगाया जा सकता है। लेकिन जीनोम संरचना तैयार करना इस वायरस की वैक्सीन तैयार करने की दिशा में महज पहला कदम है। विभिन्न मरीजों से लिए गए नमूनों के आधार पर यह जीनोम तैयार हुआ है। वैसे शुरुआती दौर के मरीजों के जीनोम की तुलना बाद में मिले जीनोम से कर इस वायरस में आए बदलाव को परखा जा सकता है। 
 
जीन उत्परिवर्तन की दर बता सकती है कि यह वायरस कब तक 'वाइल्ड' रहा है और इसकी शुरुआत कहां हुई? वुहान वायरस का जीनोम 29,093 बेस लंबा और बहुत हाल की उत्पत्ति है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस वायरस की उत्पत्ति चमगादड़ों में होने की संभावना है और उनसे यह दूसरे जानवरों तक फैला। वुहान में इन जानवरों का सेवन आम होने से इंसान भी उससे संक्रमित हो गए। इंसान में मिले इस वायरस का संस्करण 30 अक्टूबर के बाद और 29 नवंबर के पहले का होने का अनुमान है।
 
बीते दशक में जेनेटिक शोध में हुए तीव्र विकास ने क्रिस्पर जैसे नए उपकरणों को जन्म दिया है। सवाल है कि दुनिया एक नई बीमारी पर काबू पाने और इलाज ढूंढ पाने के लिए कितनी अच्छी तरह तैयार है? नॉवेल कोरोनावायरस इस तैयारी को परखने का एक मौका है। 
Keyword: Corona virus, china, india, WHO,,
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