बिजनेस स्टैंडर्ड - कोटक के प्रवर्तक रख पाएंगे 26 फीसदी हिस्सा
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कोटक के प्रवर्तक रख पाएंगे 26 फीसदी हिस्सा

सुब्रत पांडा / मुंबई January 30, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैंक को प्रवर्तकों की हिस्सेदारी घटाकर 26 फीसदी पर लाने और उनके मताधिकार को सीमित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। आरबीआई ने गत 29 जनवरी को भेजे एक पत्र में इस फैसले की जानकारी दी है। इसके मुताबिक आरबीआई की अंतिम अनुमति मिलने के छह महीनों के भीतर बैंक के प्रवर्तकों को अपनी हिस्सेदारी घटाकर वोटिंग इक्विटी शेयर के 26 फीसदी तक ले आनी होगी। आरबीआई नियमों के मुताबिक, कोटक महिंद्रा बैंक को अपने प्रवर्तकों की हिस्सेदारी को 31 दिसंबर 2018 तक घटाकर 20 फीसदी और मार्च 2020 तक 15 फीसदी पर ले आना अनिवार्य था। लेकिन आरबीआई ने अब कोटक महिंद्रा को इस नियम में ढील दे दी है।
 
कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी उदय कोटक की अगुआई वाले प्रवर्तकों के पास दिसंबर 2019 में शेयर पूंजी के 29.96 फीसदी का स्वामित्व था। लेकिन आरबीआई की इस मंजूरी के बाद प्रवर्तकों के मताधिकार की सीमा कम हो जाएगी। आरबीआई ने कहा है कि 31 मार्च 2020 तक प्रवर्तकों के पास वोटिंग इक्विटी शेयर का 20 फीसदी रहेगा और 1 अप्रैल, 2022 तक इसमें और कमी करते हुए 15 फीसदी कर दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि शेयरधारिता में कटौती के बाद प्रवर्तक उस समय तक बैंक का कोई और वोटिंग इक्विटी शेयर नहीं खरीद पाएंगे जब तक कि उनकी हिस्सेदारी 15 फीसदी या भविष्य में आरबीआई द्वारा तय की जाने वाली सीमा तक नहीं आ जाती है। आरबीआई ने यह भी कहा है कि प्रवर्तकों को अतिरिक्त शेयर खरीद कर बैंक की 15 फीसदी इक्विटी पूंजी जुटाने की अनुमति होगी। खास बात यह है कि प्रवर्तकों को इन शेयरों पर मताधिकार भी होगा। रिजर्व बैंक इस सीमा में भविष्य में बदलाव भी कर सकता है। 
 
बैंक ने आरबीआई की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद बंबई उच्च न्यायालय में दायर अपनी रिट याचिका वापस ले ली है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी है। दिसंबर 2018 में बैंक ने उच्च न्यायालय में आरबीआई के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिका उस समय दायर की गई थी जब आरबीआई ने तरजीही शेयर जारी कर प्रवर्तकों की शेयरधारिता में कमी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। कोटक महिंद्रा ने अगस्त 2018 में परपेचुअल गैर-परिवर्तनीय तरजीही शेयर जारी किए थे। बैंक ने कहा था कि इससे प्रवर्तकों की शेयरधारिता 30.3 फीसदी से घटकर 19.7 फीसदी हो जाएगी लेकिन बैंकिंग नियामक उसके सुझाए गए तरीके से सहमत नहीं हुआ था। ऐसी स्थिति में निजी क्षेत्र के इस बैंक ने आरबीआई के निर्देश से अंतरिम राहत देने की मांग अपनी याचिका में की थी। 
 
इसके साथ ही कोटक महिंद्रा बैंक ने प्रवर्तकों के मताधिकार की सीमा तय करने का प्रस्ताव भी रखा था। बैंक यह हलफनामा देने को भी तैयार था कि मई 2020 तक वह अपने प्रवर्तकों के मताधिकार को 20 फीसदी के स्तर तक सीमित कर देगा। उसका कहना था कि आरबीआई मुख्य रूप से इसी बात के लिए तो चिंतित है कि बैंकों के प्रवर्तकों के पास ताकत का संकेंद्रण न हो।जहां तक रिजर्व बैंक के मानदंडों का सवाल है तो एक बैंक को अपना परिचालन शुरू करने के तीन साल के भीतर प्रवर्तकों की हिस्सेदारी को 40 फीसदी तक लाने की जरूरत होती है। उसके बाद 10 वर्षों के भीतर बैंक को प्रवर्तक हिस्सेदारी 20 फीसदी और 15 वर्षों में 15 फीसदी तक लानी होती है। 
 
(डिसक्लेमर: बिज़नेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में कोटक परिवार के नियंत्रण वाली कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है)
Keyword: kotak mahindra bank, RBI, uday kotak,,
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