बिजनेस स्टैंडर्ड - 80 हजार कंपनियों ने लगाया सरकार को चूना
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80 हजार कंपनियों ने लगाया सरकार को चूना

सोमेश झा / नई दिल्ली 01 29, 2020

सरकार को लगाई 300 करोड़ रुपये की चपत

पीएमआरपीवाई के तहत करीब 10 लाख लाभार्थी नहीं थे हकदार
ईपीएफओ ने वसूली 222 करोड़ रुपये की राशि

बिजनेस स्टैंडर्ड 80 हजार कंपनियों ने लगाया सरकार को चूनादेश के करीब 80 हजार ऐसी कंपनियों का पता चला है जिन्होंने व्यवस्था का धता बताकर केंद्र सरकार को 300 करोड़ रुपये का चूना लगाया। इन कंपनियों ने संगठित क्षेत्र में नई नौकरियां पैदा करने के लिए चलाई जा रही योजना के तहत सरकार से वित्तीय प्रोत्साहन लिया। प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के तहत करीब दस लाख लाभार्थी ऐसे पाए गए हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। ये लोग योजना की शुरुआत से पहले से ही संगठित अर्थव्यवस्था का हिस्सा थे। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने इन कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों में लेनदेन पर रोक लगा दी है। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए दस्तावेजों के मुताबिक ईपीएफओ पहले ही इन कर्मचारियों से 222 करोड़ रुपये वसूल चुका है। इन दस्तावेजों में विस्तार से इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई है। 

इस बारे में श्रम एवं रोजगार सचिव हीरालाल समारिया और ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त सुनील बड़थ्वाल को 13 जनवरी को भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं आया। दिलचस्प बात है कि ईपीएफओ के नौकरी के आंकड़ों का हवाला देकर सरकार औपचारिक क्षेत्र में नौकरियां बढ़ने का दावा कर रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने 2016 में पीएमआरपीवाई की घोषणा की थी। इसके तहत सरकार नए कर्मचारियों की भविष्य निधि राशि का एक हिस्सा खुद वहन करती है ताकि कंपनियों के वित्तीय बोझ को साझा किया जा सके।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के अपने बजट भाषण में कहा था कि इस योजना का मकसद कंपनियों को बेरोजगारों को नौकरी देने और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को संगठित क्षेत्र में लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना अगस्त 2016 को अस्तित्व में आई थी और यह 1 अप्रैल, 2016 से नौकरी पर रखे गए नए कर्मचारियों के लिए थी। 

पीएमआरपीवाई योजना के जरिये केंद्र सरकार तीन साल तक कर्मचारी की भविष्य निधि राशि में नियोक्ता का हिस्सा देती है। अभी कर्मचारी के वेतन में से 24 फीसदी राशि पीएफ खाते में जाती है। इसमें आधा हिस्सा नियोक्ता का और आधा कर्मचारी का होता है। 15 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य है। इस योजना के सबसे अहम शर्त यह है कि कंपनियों को उसी स्थिति में सरकार से वित्तीय समर्थन मिलेगा जब वे ऐसे कर्मचारी को नौकरी पर रखेंगी जो पहले ईपीएफओ योजनाओं का हिस्सा न रहा हो।

अलबत्ता, 16 जुलाई 2019 तक करीब 80 हजार कंपनियों के 898,576 कर्मचारी ऐसे पाए गए जिनका पहले से ही पीएफ खाता था। यह संख्या इस योजना से लाभांवित हुए 1.21 करोड़ कर्मचारियों में से करीब 7 फीसदी है। ईपीएफओ जुलाई 2019 तक ऐसे कर्मचारियों से 222 करोड़ रुपये की राशि वसूल चुका है।

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