बिजनेस स्टैंडर्ड - डीएचएफ एल:12,773 करोड़ रु. का हेरफेर
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डीएचएफ एल:12,773 करोड़ रु. का हेरफेर

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 01 29, 2020

1 लाख फर्जी ग्राहकों के नाम पर हेराफेरी

धीरज वधावन ने मार्च 2010 में जायदाद खरीदने के लिए मिर्ची से मिलाया हाथ
दोनों के बीच 225 करोड़ रुपये में हुआ सौदा
111 करोड़ रुपये मिर्ची को डीएचएफएल, आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स से मिले
अतिरिक्त 154 करोड़ रुपये वधावन की दुबई की कंपनी से मिले
रकम के स्रोत छुपाने के लिए कपिल वधावन ने सनब्लिंक का किया इस्तेमाल
डीएचएफएल ने अपने प्रवर्तकों से कथित तौर पर जुड़ीं पांच मुखौटा कंपनियों को किया 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान
बाद में इन कंपनियों का सनब्लिंक के साथ हुआ विलय

बिजनेस स्टैंडर्ड डीएचएफ एल:12,773 करोड़ रु. का हेरफेरकर्ज संकट से जूझ रही दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) ने 12,773 करोड़ रुपये के ऋण अपने प्रवर्तकों से कथित तौर पर जुड़ी 90 फर्जी कंपनियों को अवैध तरीके से स्थानांतरित किए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार कंपनी ने 2010 और 2015 के बीच खुदरा ऋण की आड़ में करीब 1 लाख फर्जी ग्राहकों के नाम पर इस रकम की हेराफेरी की थी। ईडी माफिया सरगना इकबाल मेनन (इकबाल मिर्ची) को रकम देने में डीएचएफएल के प्रवर्तकों की भूमिका की जांच कर रही है। ईडी ने कहा कि कपिल वधावन ने धन शोधन के जरिये इन बेजा लेनदेन में अहम भूमिका निभाई थी। 

ईडी ने मिर्ची की जायदाद से जुड़े धन शोधन मामले में इस सप्ताह के शुरू में वधावन को गिरफ्तार किया था। इस जांच एजेंसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा,'यह एक ऐसा फर्जीवाड़ा लग रहा है, जिसके व्यापक परिणाम हो सकते हैं। अब तक शुरुआती जांच में पता चला है कि 12,700 करोड़ रुपये से अधिक रकम की हेराफेरी हुई है और यह पूरी साजिश कपिल वधावन ने रची थी।' रिपोर्ट में कहा गया है कि और अधिक सबूत, दस्तावजे आदि जुटाने के लिए छापेमारी चल रही है और ऐसी आशंका है कि फर्जीवाड़ा काफी बड़ा हो सकता है। 

डीएचएफएल के बहीखातों पर नजर दौड़ाने से पता चलता है कि 2,186 करोड़ रुपये (12,770 करोड़ रुपये में) पांच कंपनियों-फेथ रियल्टर्स, मार्वल टाउनशिप, एबल रियल्टी, पोजीडॉन रियल्टी और रेंडन रियल्टर्स- को दिए गए थे। ईडी ने कहा कि वधावन ने सबसे पहले डीएचएफएल से पांच मुखौटा कंपनियों को एक बड़ी रकम की हेराफेरी की और बाद में डीएचएफएल से ली गई कथित तौर पर ली गई रकम को छुपाने के लिए इन कंपनियों का विलय सनब्लिंक रियल एस्टेट के साथ कर दिया। जांच एजेंसी ने कहा कि ये पांचों कंपनियां और सनब्लिंक एक दूसरे से जुड़ी हैं रकम का स्रोत छुपाने के लिए वधावन ने इनका इस्तेमाल किया है। ये ऋण पांच से छह वर्षों (2010 से 2016) के बीच आवंटित एवं इधर से उधर किए गए। यह तब हुआ जब वधावन के भाई एवं डीएचएफएल के प्रवर्तक धीरज वधावन ने सनब्लिंक के नाम पर मुंबई के वर्ली में मिर्ची से तीन जायदाद खरीदी थी।
Keyword: DHFL, loan, debt, ED,,
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