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नवंबर तक 6 राज्यों के कर राजस्व में गिरावट

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली January 29, 2020

आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, मणिपुर और उत्तराखंड में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 8 महीनों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कुल कर प्राप्तियों में गिरावट आई है। वहींं दूसरी तरफ इस अवधि के दौरान पश्चिम बंगाल में कर राजस्व 13.44 प्रतिशत बढ़ा है। राज्यों के राजस्व का बड़ा हिस्सा केंद्र के बंटवारे वाले कर मद, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), पेट्रोलियम पर मूल्यवर्धित कर और शराब पर उत्पाद कर से आता है। आंध्र प्रदेश में इस मद से आने वाला कर राजस्व 11.40 प्रतिशत गिरा है, जबकि पंजाब में 10.40 प्रतिशत की कमी आई है। इन दो राज्यों के दिसंबर तक के आंकड़े भी मौजूद हैं। 
 
अगर आंकड़ों को देखें तो केरल में गिरावट 10.90 प्रतिशत रही है। अन्य राज्यों में मणिपुर में कर राजस्व में अप्रैल से नवंबर 2019 के दौरान 11.40 प्रतिशत कम हुआ है।  गुजरात में इन कर राजस्वों में 3.11 प्रतिशत गिरावट आई है, जबकि अन्य औद्योगिक राज्य महाराष्ट्र में वित्त वर्ष 2020 के पहले 8 महीने में 0.30 प्रतिशत गिरावट आई है। बहरहाल महाराष्ट्र में दिसंबर महीने में कर प्राप्तियां बढ़ी हैं, जिससे चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में राज्य की कर प्राप्तियों में 2.87 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 
 
उत्तराखंड में वित्त वर्ष 2020 के अप्रैल-नवंबर के दौरान कर प्राप्तियों में 0.35 प्रतिशत की गिरावट आई है। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एमएस मणि ने कहा, 'राज्यों से उम्मीद की जाती है कि वह अनुपालन बढ़ाएं और जीएसटी संग्रह बढ़ाने के लिए कर चोरी की पहचान करें। इसके अलावा उन्हें वैट राजस्व बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा, जो पेट्रोलियम उत्पादों व अल्कोहलिक बेवरिज (शराब) से मिलता है।'  इन राज्यों मे कर राजस्व मेंं गिरावट का असर उनके राजकोषीय घाटे के आंकड़े पर पड़ रहा है। आंध्र प्रदेश में चालू वित्त वर्ष के दिसंबर महीने तक का घाटा राज्य के बजट अनुमान के 83.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है। 
 
इसी तरह से पंजाब में घाटा वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में 42.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है।  बहरहाल गुजरात में राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में बजट अनुमान का 27.5 प्रतिशत रहा है। इसी तरह चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में महाराष्ट्र का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 7.39 प्रतिशत रहा है।   उत्तराखंड के राजकोषीय घाटे का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। मणिपुर में अप्रैल-नवंबर 2019 में घाटा बजट अनुमान का 3.139 प्रतिशत रहा है। पश्चिम बंगार में साल के पहले 8 महीने में घाटा बजट अनुमान का 43.7 प्रतिशत रहा है।  राज्यों को अनुमति दी गई है कि वे बाजार उधारी लें, जिसे कि उनका राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत के ऊपर न जाए। 
 
कुल मिलाकर राज्यों का घाटा रह सकता है 3 प्रतिशत : इंडिया रेटिंग
 
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में राज्यों का कुल  राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3 प्रतिशत रहेगा, जबकि बजट लक्ष्य 2.6 प्रतिशत है। अपने नोट में एजेंसी ने राज्यों के वित्त का परिदृश्य बदलकर स्थिर-से-नकारात्मक कर दिया है, चो चालू वित्त वर्ष के लिए पहले स्थिर रखा गया था। स्थिर-से नकारात्मक को स्पष्ट करते हुए इंडिया रेटिंग के प्रमुख अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि जहां बड़े राज्य राजकोषीय झटकों के प्रबंधन में ज्यादा कारगर होते हैं, वहीं जिन राज्यों का राजकोषीय घाटा 4 प्रतिशत या ज्यादा होगी, उनकी वित्तीय स्थिति में गिरावट देखी जा सकती है।  
 
बजट गतिविधियों में असम शीर्ष पर 
 
बजट बनाने में बेहतरीन प्रथाओं का पालन करने के मामले में असम पहले स्थान पर है। ट्रांसपैरेंसी इंटरनैशनल के एक सर्वे के मुताबिक असम के बाद ओडिशा और आंध्र प्रदेश आते हैं।  यह सर्वे 4 मानकों के आधार पर किया गया- सार्वजनिक खुलासे, बजट की प्रक्रिया, बजट के बाद वित्तीय प्रबंधन और बजट को ज्यादा पारदर्शी व नागरिकों के प्रति मित्रवत बनाने की कवायद।  निचला स्थान पाने वाले राज्यों में गोवा, महाराष्ट्र और पंजाब का स्थान है। ट्रांसपैरेंसी इंटरनैशनल ने कहा है कि भारत 'राज्यों का संघ' है, लेकिन भारत में राज्यों के बजट को कभी उतना महत्त्व नहीं मिला, जिसना केंद्रीय बजट को मिलता है। इसने कहा है कि इसकी वजह से राज्यों के बजट न तो समावेशी हैं, न पारदर्शी और यह देश के लिए और खासकर उस राज्य के लिए अच्छा नहीं है।
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