बिजनेस स्टैंडर्ड - एयर इंडिया का स्वदेशी निजीकरण का मामला
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, February 25, 2020 06:15 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

एयर इंडिया का स्वदेशी निजीकरण का मामला

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  January 29, 2020

केंद्र सरकार ने सोमवार को सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया में अपनी शत प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए शुरुआती बोलियां आमंत्रित करने का फैसला किया। इससे कई सवाल उठते हैं और देश की आर्थिक नीति के लिए उनके असर को समझना जरूरी है। एयर इंडिया में शेयरों की बिक्री के लिए जारी प्रारंभिक सूचना (पीआईएम) निजीकरण के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। लेकिन एयर इंडिया के निजीकरण के लिए मोदी ने कौन सा तरीका चुना है? यह गलत धारणा है कि मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा इस मुद्दे पर उठाए गए संदेह और सवालों के बीच एयर इंडिया के निजीकरण का फैसला करके एक साहसिक कदम उठाया है। आरएसएस ने हमेशा एयर इंडिया के निजीकरण का विरोध किया है। लेकिन यह विरोध बेहद मामूली है। 

 
उसका मुख्य विरोध इस बात को लेकर रहा है कि देश की राष्ट्रीय विमानन कंपनी को किसी विदेशी मालिक के हाथों नहीं सौंपा जाना चाहिए। खबरों के मुताबिक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक जनसभा में कहा कि एयर इंडिया में 49 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी किसी विदेशी कंपनी के हाथ में नहीं दी जानी चाहिए। जर्मनी ने भी अपनी राष्ट्रीय विमानन कंपनी में 49 फीसदी से अधिक विदेशी हिस्सेदारी की अनुमति नहीं दी थी। अब एयर इंडिया के निजीकरण के लिए जारी पीआईएम और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नीति पर करीबी नजर डालते हैं। विदेशी कंपनियां या विदेशी निवेशक एयर इंडिया में केवल 49 फीसदी तक ही निवेश कर सकते हैं। एयर इंडिया का पर्याप्त स्वामित्व और प्रभावी नियंत्रण हमेशा भारतीयों के हाथों में रहेगा। यह नीति जनवरी 2018 में घोषित की गई थी। हालांकि इस शर्त में ढील देने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। 
 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पिछले बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार उड्डयन, मीडिया (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) और बीमा क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोलने के वास्ते सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेगी। इनमें से उड्डयन को बाकी सभी क्षेत्रों के लिए एफडीआई नीतियों में पिछले कुछ महीनों में जरूरी संशोधन किए गए हैं। मोदी सरकार का संदेश साफ है। उसे एयर इंडिया का निजीकरण तब तक स्वीकार्य है जब तक कि इसका नियंत्रण किसी विदेशी कंपनी के हाथों में नहीं जाता है। 2018 में एयर इंडिया के विनिवेश की कोशिश नाकाम रही थी लेकिन अब पीआईएम में कई तरह की छूट दी गई हैं। पहले 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की बात थी और अब इसे शत प्रतिशत कर दिया गया है। पहले पात्र बोलीदाता के लिए नेटवर्थ 5,000 करोड़ रुपये रखी गई थी जिसे अब घटाकर 3,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पहले अधिग्रहणकर्ता के लिए बोली के शुरुआती चरण में लॉक-इन पीरियड तीन साल रखा गया था जिसे अब केवल एक वर्ष कर दिया गया है। पहले बोली जीतने वाली कंपनी को अपने कारोबार का एयर इंडिया के साथ विलय करने की अनुमति नहीं थी लेकिन अब इसकी अनुमति दी गई है। लेकिन एयर इंडिया पर एफडीआई नीति में कोई छूट नहीं दी गई है। 
 
यह सरकार की आर्थिक नीति पर आरएसएस का प्रभाव है। मोदी सरकार ने एयर इंडिया के स्वामित्व पर आरएसएस के इस दृष्टिकोण को स्वीकार किया है कि कंपनी का स्वामित्व किसी विदेशी नागरिक को नहीं सौंपा जाना चाहिए। इसलिए निजीकरण स्वीकार्य है और एयर इंडिया का स्वामित्व बदल सकता है। लेकिन इसका प्रबंधन और स्वामित्व नियंत्रण हमेशा किसी भारतीय कंपनी या भारतीय नागरिक के हाथों में रहेगा। निजीकरण के बाद भी एयर इंडिया में किसी विदेशी संस्था या विदेशी विमानन कंपनी की केवल 49 फीसदी तक हिस्सेदारी हो सकती है। प्रबंधन नियंत्रण के बिना कौन सी विदेशी कंपनी एयर इंडिया में निवेश के लिए सहमत होगी? यह विदेशी विमानन कंपनी को ना कहने का अलग तरीका है। यह एक तरह का स्वदेशी निजीकरण है जहां नया निजी मालिक हमेशा एक भारतीय होगा। इस तरह के निजीकरण से सरकारी खजाने पर चपत लगेगी क्योंकि एयर इंडिया को खरीदने की होड़ सीमित होगी। इससे सरकार को इस सरकारी विमानन कंपनी में शत प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से कम राशि मिलेगी। अगर विदेशी निवेशकों को भी बहुलांश हिस्सेदारी के खरीदने के लिए समान अवसर दिया जाता तो सरकार को ज्यादा कीमत मिलती। 
 
आदर्श स्थिति में द्विपक्षीय उड़ान अधिकार केंद्र सरकार के पास रहने चाहिए। सरकारी कंपनी के तौर पर एयर इंडिया का अस्तित्व खत्म होने के बाद इन्हें सरकार को लौटाया जाना चाहिए। यह फैसला करने का अधिकार सरकार को होना चाहिए कि ये अधिकार किसे मिलने चाहिए। जो भी कंपनी एयर इंडिया को खरीदेगी, वह इन आकर्षक उड़ान अधिकारों को अपने पास रखना चाहेगी। लगता है कि सरकार एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी द्विपक्षीय उड़ान अधिकारों को एयर इंडिया के पास ही रखना चाहती है। शायद यही सोचकर सरकार ने एयर इंडिया के दरवाजे विदेशी विमानन कंपनियों के लिए बंद कर दिए। वह एयर इंडिया का स्वामित्व और प्रबंधन नियंत्रण उन्हें नहीं देना चाहती है। 
 
संभव है कि प्रारंभिक दौर की बोली के बाद इन मुद्दों पर फैसला हो जाए। नागरिक विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी नेे साफ किया है कि सरकार बाद में चरण में भी एयर इंडिया की बिक्री की शर्तों में बदलाव को तैयार है। सभी बोलीदाता शायद ही इस तरह की संभावना के लिए तैयार होंगे। बोली सौंपे जाने के बाद शर्तों में संशोधन की संभावना से अनिश्चितता बढ़ेगी और इसमें विवाद पैदा हो सकता है। इस तरह के विवाद से एयर इंडिया की बिक्री में मुश्किलें पैदा होंगी। 
Keyword: aviation, flight, airport, AAI, air india,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कोरोनावायरस के खतरे से जल्द निपट पाएगी दुनिया?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.