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बकाया शुल्क अग्रिम चुकाएंगी दूरसंचार फर्में

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 27, 2020

प्रमुख दूरसंचार कंपनियां बकाया लाइसेंस शुल्क और एजीआर पर आधारित स्पेक्ट्रम उपयोगकर्ता शुल्कों (एसयूसी) को अग्रिम तौर पर चुकाने के प्रस्ताव पर दूरसंचार विभाग (डीओटी) के साथ चर्चा कर रही हैं, बशर्ते कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दूरसंचार कंपनियों की संशोधन याचिका में उनके पक्ष में निर्णय आए जिसकी सुनवाई इस सप्ताह होगी। मूल रकम में दूरसंचार कंपनियों द्वारा चुकाए जाने वाले लाइसेंस शुल्क और उनके एजीआर (समायोजित सकल राजस्व) की उनकी व्याख्या पर आधारित एसयूसी के बीच अंतर शामिल है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए जुर्माने पर ब्याज शामिल नहीं है। 
 
यदि इस पहल पर अमल होता है तो इससे तीन ऑपरेटरों भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और टाटा समूह से सरकार को वित्त वर्ष 2019-20 में 22,077 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व हासिल होगा। यह दूरसंचार राजस्व से 2019-20 में 50,519 करोड़ रुपये के बजटीय लक्ष्य से ज्यादा है। नई याचिका के जरिये इन तीन दूरसंचार कंपनियों ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि उन्हें बकाया के भुगतान की शर्तों और समय को लेकर डीओटी के साथ चर्चा करने की अनुमति दी जाए। हालांकि यदि सभी दूरसंचार कंपनियां अग्रिम भुगतान करती हैं तो सरकार को लगभग 34,773 करोड़ रुपये (रिलायंस जियो को छोड़कर, जो 195 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर चुकी है) की बड़ी पूंजी हासिल होगी। इसमें लाइसेंस शुल्क के तौर पर 23,182 करोड़ रुपये और एसयूसी के लिए 11,591 करोड़ रुपये का बकाया शामिल है।
 
दूरसंचार कंपनियों द्वारा चुकाई जाने वाली यह अग्रिम राशि उनके कुल बकाया का लगभग 25 प्रतिशत है।  सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यू ने इस संबंध में वार्ताओं की जानकारी देते हुए कहा, 'हम दूरसंचार विभाग के साथ चर्चा कर रहे हैं और मूल एजीआर को अग्रिम तौर पर चुकाए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि इस संबंध में निर्णायक रूपरेखा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी। हमारा अनुमान है कि प्रमुख ऑपरेटरों को लगभग 25,000 करोड़ रुपये की रकम चुकानी होगी।'
 
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल के अंत में दूरसंचार कंपनियों को एजीआर बकाया के तौर पर 147,000 करोड़ रुपये का भुगतान 90 दिन के अंदर करने का निर्देश दिया था। दूरसंचार कंपनियों ने इस निर्णय के खिलाफ एक समीक्षा याचिका दायर की थी, लेकिन उसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया था। तब तीन दूरसंचार कंपनियां फिर से सर्वोच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गईं और संशोधन याचिका दाखिल की थी जिस पर इस सप्ताह सुनवाई होनी है। इस बीच तीन दूरसंचार कंपनियों ने दूरसंचार विभाग को भी अलग अलग पत्र भेजे हैं जिनमें कहा गया है कि वे अपने बकाया का भुगतान करना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का इंतजार करेंगी। इस भुगतान के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 23 जनवरी की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि भुगतान न करने की वजह से सरकार इन दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है जिसमें बैंक गारंटी भुनाने या इस संबंध में कारण बताओ नोटिस भेजने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। 
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