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रिजर्व बैंक के लिए महंगाई और वृद्धि दोनों अहम

अनूप रॉय / मुंबई January 24, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज कहा कि केंद्रीय बैंक महंगाई और वृद्धि दोनों पर ध्यान केंद्रित करता है, लेकिन वृहद्आर्थिक परिदृश्य यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि किसे प्राथमिकता दी जाए।  सेंट स्टीफेंस कॉलेज, नई दिल्ली में पूर्व छात्रों के सम्मेलन में दास ने कहा, 'महंगाई दर और वृद्धि में तुलनात्मक रूप से किस चीज पर जोर दिया जाए, यह वृहद आर्थिक परिदृश्य, महंगाई दर और वृद्धि की स्थिति और आने वाले आंकड़ों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर होता है।' 
 
रिजर्व बैंक परंपरागत रूप से महंगाई दर को लेकर चिंतित रहा है और अब सीपीआई महंगाई दर 2 से 6 प्रतिशत के बीच बनाए रखने का लक्ष्य रखा है। दास ने बार बार मौद्रिक नीति के 2016 के संशोधित हिस्से पर जोर दिया, जिसमें कहा गया है, 'कीमतों में स्थिरता बहाल रखी जाए, साथ ही वृद्धि के मकसद का भी ध्यान रखा जाए।'  रिजर्व बैंक के गवर्नर ने अपने भाषण में कहा, 'वृद्धि पर भी साथ साथ ध्यान रखे जाने की जरूरत होती है, जब महंगाई काबू में हो।'  दास ने कहा कि रिजर्व बैंक आगे की स्थिति को देखते हुए मौद्रिक नीति तैयार करता है और प्रभावी रूप से अपने फैसलों के बारे में महंगाई दर लक्ष्य के आसपास रखने की सूचना प्रेषित करता है और साथ ही वृद्धि को समर्थन करता है। 
 
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के अपने परिचालन की प्रक्रिया को भी ठीक कर रहा है, जिससे पूरे वित्तीय बाजार में प्रभावी तरीके से नीतियों का असर नजर आए और इसका वास्तविक अर्थव्यवस्था पर असर पड़े।  रिजर्व बैंक आने वाले आंकड़ों और सर्वे के आधार पर अर्थव्यवस्था के बारे में लगातार अपने रुख को अद्यतन करता है। दास ने कहा, 'इस तरीके को अपनाने से रिजर्व बैंक को महंगाई को लेकर अपने नीतिगत फैसले के सिलसिले में समय से कदम उठाने में मदद मिलती है और बाद में आने वाले आंकड़ों से पुष्टि होने के पहले मंदी की पहचान हो जाती है।' 
 
पिछले साल फरवरी से लेकर दिसंबर तक रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर में 135 आधार अंक की कटौती की है।  वहीं चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि दर 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। बहरहाल दास ने कहा कि मौद्रिक नीति की अपनी सीमाएं हैं। दास ने कहा कि ऐसे में 'ढांचागत सुधार और राजकोषीय कदम जारी रखी जा सकती है, जिससे कि मांग में सुधार हो और वृद्धि को बढ़ावा मिल सके।'  दास ने कहा कि वृद्धि के कुछ अहम चालकों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को बल देने के साथ सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने पर ध्यान दे रही है 'जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने की क्षमता होती है।' उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय बढ़ाया जाना भी अहम भूमिका निभाता है। 
 
गवर्नर ने कहा, 'नीति के उद्देश्यों में वित्तीय स्थिरता के साथ वैश्विक अनुभव को शामिल करने का मसला अभी भी लंबित है, लेकिन रिजर्व बैंक हमेशा से वित्तीय स्थिरता को महत्त्व देता रहा है, जबसे इसे आरबीआई ऐक्ट की प्रस्तावना में शामिल किया गया है।' उन्होंने कहा, 'हाल के समय में हमारा ध्यान वित्तीय स्थिरता पर रहा है, जो न सिर्फ नियमन और निरीक्षण में नजर आया है बल्कि औपचारिक वित्तीय व्यवस्था को बैंकिंग सेवा न होने वाले और जिन इलाकों में सेवाएं नहीं मिलती हैं, वहां पहुंचाने की कवायद की गई है।' केंद्रीय बैंक का ध्यान सुरक्षित, बाधा रहित और रियल टाइम पेमेंट व सेटलमेंट पर भी है। 
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