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बकाये पर ओआईएल ने रखी बात

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 24, 2020

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने कहा है कि उसके पास दूरसंचार कंपनी की तरह यूएएसएल लाइसेंस नहीं है बल्कि राष्ट्रीय लंबी दूरी (एनएलडी) का लाइसेंस है, जिसकी शर्तों के तहत उसे कुल राजस्व (तेल व गैस राजस्व समेत) पर लाइसेंस शुल्क अदा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय कंपनी की देनदारी एनएलडी लाइसेंस के तहत गतिविधियों व सेवाओं यानी दूरसंचार सेवाओं के राजस्व पर बनती है। सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकार की जा चुकी स्पष्टीकरण याचिका में ऑयल इंडिया ने कहा है कि यूएएसएल लाइसेंस की शर्तों के तहत लाइसेंस शुल्क तय करने के लिहाज से राजस्व की परिभाषा में अन्य चीजों के अलावा कंपनी का विविध राजस्व शामिल होता है। हालांकि एनएलडी लाइसेंस की शर्तों में इस तरह का कोई उपबंध शामिल नहीं है।
 
एजीआर बकाए के तौर पर दूरसंचार कंपनियोंं को 1,47,000 करोड़ रुपये चुकाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद दूरसंचार विभाग ने ऑयल इंडिया से 40,108 करोड़ रुपये बकाया मांगा है, जिसके तहत एजीआर के आकलन में तेल व गैस के राजस्व को शामिल किया गया है। विभाग ने ऐसी ही मांग अन्य पीएसयू मसलन गेल, पावर ग्रिड, डीएमआरसी, रेलटेल आदि के सामने रखी है। अनुमान के आधार पर उनका कुल बकाया 2,27,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। दूरसंचार विभाग की मांग पर सवाल उठाते हुए ऑयल इंडिया ने कहा, एनएलडी लाइसेंस की शर्तें शुरू होने के बाद से सितंबर 2019 तक विभाग सिर्फ दूरसंचार गतिविधियों के लिए लाइसेंस शुल्क लगाता रहा है और ऑयल इंडिया हर तिमाही उस रकम का भुगतान करती रही है। याचिका में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग भुगतान स्वीकार करता  रहा है और हालिया सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से पहले कभी भी गैर-दूरसंचार गतिविधियों केराजस्व पर ऐसी मांग नहीं की।
 
कंपनी ने कहा कि अब यह समझ से बाहर है कि दूरसंचार विभाग कंपनी के पूरे राजस्व पर लाइसेंस शुल्क की मांग कर रहा है। अगर ऐसा ही मामला था तो समझौते में स्पष्ट तौर पर इसे रखा जाना चाहिए था। याचिका में कहा गया है कि राजस्व की परिभाषा पर नजर डालने से स्पष्ट होता है कि अन्य विविध राजस्व एनएलडी लाइसेंस समझौते का हिस्सा नहीं बनता। साथ ही राजस्व की परिभाषा की और जांच से स्पष्ट होता है कि लाइसेंस शुल्क का भुगतान एनएलडी लाइसेंस के तहत सिर्फ गतिविधियों या सेवाओं के लिए या दूरसंचार गतिविधियोंं से लिए किया जाएगा। इसमें किसी भी तरह गैर-दूरसंचार गतिविधियोंं का जिक्र नहींं है मसलन तेल व गैस के परिचालन से मिलने वाला राजस्व।
 
ऑयल इंडिया ने इस पर जोर देते हुए कहा है कि लाइसेंस शुल्क का भुगतान सिर्फ दूरसंचार गतिविधियोंं पर ही होना चाहिए, जो एनएलडी लाइसेंस के समझौते में स्पष्ट है, जो कहता है कि आवेदक हर दूरसंचार खाते के लिए स्वतंत्र खाते रख सकता है। कंपनी ने कहा कि अपने एनएलडी लाइसेंस के लिए अलग खाता बनाकर ऐसा करती रही है और उसी के आधार पर एजीआर के आंकड़े दूरसंचार विभाग के पास जमा कराती रही है। ऑयल इंडिया ने कहा कि उसने मुख्य रूप से अपने इस्तेमाल के लिए पाइपलाइन के साथ ऑप्टिक फाइबर बिछाने के लिए लाइसेंस लिया था और संसंसाधन के अधिकतम उपयोग के लिए कुछ दूरसंचार कंपनियों को अतिरिक्त बैंडविड्थ पट्टे पर दिया गया था। इसके आधार पर ऑयल इंडिया ने दूरसंचार विभाग को 2007-08 से सितंबर 2019 तक सालाना लाइसेंस शुल्क के तौर पर 10.99 लाख रुपये का भुगतान किया। 
Keyword: OIL, oil, telecom, NLD, AGR,,
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