बिजनेस स्टैंडर्ड - बजट में असल समस्याओं पर हो ध्यान
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बजट में असल समस्याओं पर हो ध्यान

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली January 23, 2020

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सुझाव दिया है कि केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटे और महंगाई दर जैसे वृहद आर्थिक मानकों से हटकर अर्थव्यवस्था की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। पार्टी ने कहा है कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी व्यय को बढ़ाकर, बुनियादी ढांचे के सृजन के माध्यम से उपभोक्ता मांग में कमी जैसी असली समस्याओं का समाधान करने की जरूरत है। भाजपा ने सुझाव दिया है कि सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर, सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण और प्राथमिक व द्वितीयक बॉन्ड बाजारोंं की स्थिति में सुधार करके राजस्व की कमी के मसले का समाधान किया जा सकता है। 
 
पार्टी के आर्थिक मामलों के प्रवक्ता गोपाल अग्रवाल ने कहा, 'भाजपा ने पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा और महासचिव (संगठन) बीएल संतोष के नेतृत्व में 2 महीने तक चली कवायद के बाद विभिन्न हिस्सेदारों से फीडबैक हासिल किया है, जिनमें 250 संगठन और दर्जनों विशेषज्ञ शामिल हैं।' भाजपा के नेता बैजयंत जय पांडा और अग्रवाल ने बुधवार को वित्त मंत्री से मुलाकात की और बजट के लिए पार्टी की ओर से सिफारिशें पेश कीं। वित्त मंत्री को भाजपा की ओर से यह दूसरी प्रस्तुति थी।  सीतारमण ने इसके पहले भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में 9 जनवरी को पार्टी के नेताओं से मुलाकात की थी। 
 
दिलचस्प है कि भाजपा ने जिन हिस्सेदारों से बात की, किसी ने भी प्रत्यक्ष आयकर में कमी किए जाने की मांग नहीं की। पार्टी ने अपनी ओर से भी प्रत्यक्ष आयकर में किसी तरह की राहत की मांग नहीं की है। सूत्रों ने कहा कि सरकार इस समय संसाधनों की कमी से जूझ रही है और पिछले 5 साल में बहुत कुछ किया गया है, लेकिन इसका असर कुछ सीमित लोगों पर पड़ा है।  ऐसा पाया गया है कि राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने पर बहुत ज्यादा जोर दिए जाने व महंगाई पर काबू पाने की पिछले 5 साल की कवायदों ने आर्थिक मंदी में अहम भूमिका निभाई है। इसमें कहा गया है कि कॉर्पोरेट क्षेत्र इस समय दो तरह के जोखिमों से जूझ रहा है, जिसमें बैंकों से आपूर्ति क्रेडिट और पूंजी सृजन की समस्या शामिल है। 
 
पार्टी की सिफारिशों में कहा गया है कि मंदी की समस्याओं का समाधान उपभोक्ता मांग बढ़ाकर किया जा सकता है। पार्टी ने कहा है कि सरकार को एनबीएफसी पर ध्यान देना चाहिए, जिससे पूंजी सृजन की बाधाओं को दूर किया जा सके और जहां सार्वजनिक धन नहीं लगा है, एनबीएफसी प्रमोटरों व मित्रों द्वारा समर्थित हैं, वहां कड़ी निगरानी रखे जाने की जरूरत है।  पार्टी के सूत्रों ने कहा कि भाजपा अपने अंत्योदय या समावेशी विकास के दर्शन को लेकर प्रतिबद्ध है, लेकिन वह बाजार के प्रति मित्रवत चेहरा होना चाहिए। ज्यादा पारदर्शी बाजारों के लिए लाभांश वितरण कर (डीडीटी), जिंस लेनदेन कर (सीटीटी) और प्रतिभूति लेन देन कर (एसटीटी) से दूर रहने की सिफारिश की गई है। सीटीटी या एटीटी से बहुत ज्यादा राजस्व नहीं आता है, लेकिन वित्तीय बाजारों पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिसकी वजह से लेन देन की लागत बढऩे पर कारोबार सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग जाता है। 
 
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ाने के लिए इसमें कहा गया है चल रही योजनाओं पीएम किसान, मनरेगा और आयुष्मान का बजट आवंटन बढ़ाया जाना चाहिए।  अपने फीडबैक में पार्टी ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के प्रत्यक्ष नकदी अंतरण से किसानों को मदद मिली है और इसका विस्तार किया जाना चाहिए जिससे कि बिचौलियों या आढ़तियों को दूर किया जा सके।  पार्टी ने खाद्य प्रसंस्करण की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने की भी सिफारिश की है, जिस पर फिर से विचार करने की जरूरत है। साथ ही कोऑपरेटिव को भी छूट और लाभ उसी तरह से मिलना चाहिए, जैसा सरकार की ओर से कॉर्पोरेट्स को मिल रहा है। 
Keyword: nirmala sitaraman, economy, budget,,
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