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जलवायु परिवर्तन से जंग को साथ आए दिग्गज

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली January 22, 2020

जब दुनिया भर के प्रमुख कारोबारी जलवायु परिवर्तन से निपटने की चुनौती को लेकर दावोस में बहस कर रहे हैं उस समय देश के कई बड़े उद्योगपतियों ने मिलकर इस चुनौती का सामना करने के इरादे से एक साझा मंच खड़ा कर दिया है। देश के परोपकारी कारोबारियों के सहयोग से तैयार यह मंच न केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेगा बल्कि उसके लिए सभी तरह के संसाधन भी जुटाएगा। भारतीय जलवायु परिदृश्य में सक्रिय लोगों एवं संगठनों को साथ लाने और उन्हें मजबूती देने के लिए शीर्ष परोपकारी कारोबारियों ने इंडिया क्लाइमेट कलेबरेटिव (आईसीसी) का गठन किया है। इस संस्था से रतन टाटा, आनंद महिंद्रा, रोहिणी नीलेकणी, नादिर गोदरेज, अदिति एवं रिशद प्रेमजी, विद्या शाह और हेमेंद्र कोठारी जैसे अग्रणी भारतीय उद्योगपति जुड़े हुए हैं। साझा जलवायु लक्ष्य हासिल करने की दिशा में असरदार कदम उठाना इस सम्मिलित प्रयास का मुख्य उद्देश्य है।
 
आईसीसी ने अपने एक बयान में कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह भारत की जरूरतों को देखते हुए एक केंद्रित एवं बाध्यकारी जलवायु परिप्रेक्ष्य तैयार करेगा जो लोगों की मदद करे और प्रकृति का संवद्र्धन करे।  टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन रतन टाटा कहते हैं, 'आईसीसी के जरिये  हमारा सामूहिक नेतृत्व दुनिया को बताता है कि भारत का परोपकार जगत जलवायु संबंधी गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभाने को  तैयार है।' आईसीसी को विविध स्वरों के साथ नवाचारी समाधानों और सामूहिक निवेश का एक सहयोगी मंच बनाने की मंशा है।
 
टाटा ट्रस्ट्स में संवहनीयता पोर्टफोलियो प्रमुख श्लोका नाथ को नवगठित संस्था का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है। श्लोका बताती हैं कि आईसीसी जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दों पर विशुद्ध रूप से भारतीय नजरिये से काम करेगा। उन्होंने कहा, 'अगर हम मिलकर काम करते हैं और जलवायु-अनुकूल बदलाव लाने में लगे लोगों, संगठनों और नीतियों में निवेश करते हैं तो हम अपनी हवा, पानी को साफ कर सकते हैं।' श्लोका ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि आईसीसी कोई कोष न होकर टेड जैसा एक साझा मंच होगा जो जलवायु परिवर्तन रोकने की पहल में निवेश के इच्छुक लोगों के लिए अवसर उपलब्ध कराएगा। 
 
श्लोका कहती हैं, 'आईसीसी इन निवेशकों को सरकारी एजेंसियों, अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के व्यापक नेटवर्क से जोड़ेगा। अभी ये सब अलग-अलग काम करते हैं।' इसका मकसद यह है कि कंपनियां भविष्य को सुरक्षित रखने के लिहाज से अपनी योजनाएं बना सकें। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने जलवायु संकट से निपटने में अगले दशक को अहम बताते हुए कहा, 'दुनिया चलताऊ तरीके से नहीं चलती रह सकती है और कोई भी व्यक्ति अपने दम पर इसे नहीं दूर कर सकता है। इसके लिए कारोबार जगत, सरकार और परोपकारी लोगों को साथ आना होगा ताकि बड़े पैमाने पर और जल्द नतीजे मिल सकें। आईसीसी यह काम कर सकता है।'आईसीसी के गठन का विचार सबसे पहले 2018 में ही आया था। उसके बाद से इसकी रूपरेखा बनाने का काम शुरू हुआ और अब यह अस्तित्व में आ चुका है। इस समय इसके 45 से अधिक सदस्य हैं। इनमें भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार, द एनर्जी ऐंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी), अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च ऑन इकोलॉजी ऐंड एनवायरमेंट, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायरमेंट, महिंद्रा ग्रुप, विप्रो, गोदरेज इंडस्ट्रीज और एचयूएल फाउंडेशन भी शामिल हैं।आईसीसी के बैनर तले पहला कार्यक्रम वायु गुणवत्ता को लेकर चलाया जाएगा। यह आगे चलकर पानी एवं जमीन मामलों से जुड़ी पहल भी लेकर आएगा। 
Keyword: environment, climet change, davos, ICC,,
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