बिजनेस स्टैंडर्ड - दूरसंचार: तय तारीख पर भुगतान नहीं
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दूरसंचार: तय तारीख पर भुगतान नहीं

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 22, 2020

भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड और टाटा समेत प्रमुख दूरसंचार कंपनियों ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि वे एजीआर नियमों से जुड़े न्यायालय के आदेश का पालन करेंगी लेकिन वे संबंधित भुगतान करने से पहले उनकी 'संशोधन' याचिका पर शीर्ष न्यायालय में सुनवाई होने के कारण अगले सप्ताह तक इंतजार करेंगी। इसका अर्थ होगा कि दूरसंचार कंपनियां सरकार को 1,47,000 करोड़ रुपये देने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा  तय की गई 24 जनवरी की तारीख को राशि जमा नहीं कराएंगी। हालांकि तीनों कंपनियों ने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारती कल यह पत्र भेजेगी लेकिन दूसरी कंपनियों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि क्या उन्होंने बुधवार को ही यह पत्र भेज दिया है या वे गुरुवार को संबंधित पत्र भेजेंगी। 
 
हालांकि रिलायंस जियो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनी गुरुवार को अपने 177 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान करेगी और उसने अपने नए वित्तीय परिणामों में संंबधित देयता का प्रावधान किया है। जियो न्यायालय में दायर की गई समीक्षा याचिका में  पक्षकार नहीं है और उसने इस मुद्दे पर हमेशा अलग रुख रखा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार दूरसंचार कंपनियों को बकाया राशि के तौर पर सरकार को 147,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इस आदेश के पुनर्विचार से जुड़ी याचिका सरकार द्वारा खारिज होने के बाद तीन दूरसंचार कंपनियों के इस सप्ताह शीर्ष अदालत में 'संशोधन याचिका' दायर की। भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाले पीठ ने इस याचिका को 'अगले सप्ताह कभी भी' समीक्षा याचिका पर सुनवाई करने वाले पीठ के सामने सूचीबद्ध करने के लिए सहमति जताई। इसका अर्थ है कि न्यायालय द्वारा भुगतान के लिए तय समयसीमा के निकलने के बाद ही इस पर सुनवाई होगी। 
 
तीनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में 90 दिनों के भुगतान की समय सीमा में बदलाव के साथ-साथ अपने बकाये के लिए भुगतान की शर्तों और समय पर दूरसंचार विभाग से बातचीत की अनुमति मांगी है। मूल रूप से इसका अर्थ है कि ये कंपनियां किश्तों में भुगतान संबंधी योजना के साथ साथ इसमें कुछ वर्षों की देरी चाहती हैं। हालांकि दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा था कि अगर दूरसंचार कंपनियां 24 जनवरी तक अपने बकाए का भुगतान नहीं करती हैं तो विभाग को कार्रवाई करनी होगी। वकीलों का कहना है कि भुगतान में चूक होने पर दूरसंचार विभाग कंपनियों की बैंक गारंटी को भुना सकता है। हालांकि गारंटी के तौर पर रखी गई राशि एजीआर बकाये के तौर पर चुकाए जाने वाली 1,47,000 करोड़ रुपये की राशि के बराबर नहीं है जिस स्थिति में विभाग कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है कि क्यों न उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। कंपनियों को इस नोटिस का जबाव निर्धारित अवधि में देना होगा। सीओएआई के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उद्योग में गंभीर वित्तीय संकट के चलते दूरसंचार विभाग कड़ा रुख नहीं अपनाएगा। 
 
दूरसंचार कंपनियों को सलाह दे रहे वकीलों का कहना है कि ऐसा पहले भी कई बार हुआ है कि सर्वोचच्च न्यायालय ने पहले के आदेश को निष्पादित नहीं किया क्योंकि उसी अदालत में संबंधित विषय पर दूसरा निर्णय प्रक्रिया में है। उनका मानना है कि इसके परिणामस्वरूप दूरसंचार विभाग से कठोर कार्रवाई करने की उम्मीद नहीं है।
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