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नागरिकता संशोधन कानून नहीं होगा वापस: अमित शाह

अर्चिस मोहन /  January 21, 2020

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर सख्त रुख दिखाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि केंद्र किसी भी परिस्थिति में नागरिकता संशोधन कानून वापस नहीं लेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बुधवार को उच्चतम न्यायालय इस कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली सैकड़ों याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। 

इस कानून के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा लखनऊ में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए झूठ फैला रहे हैं। इस रैली में हिस्सा ले रहे लोगों की तालियों की गडग़ड़ाहट के बीच उन्होंने कहा, 'विपक्ष हम पर चाहे कितना भी दबाव डाले लेकिन नागरिकता संशोधन कानून वापस नहीं लिया जाएगा।'

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री शाह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सीएए, राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और राष्ट्रीय नगारिकता पंजी (एनआरसी) को लेकर नौ 'झूठ' बोले हैं। जब सिब्बल से एनपीआर पर उनकी पार्टी के रुख के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सीएए पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही एनपीआर और एनआरसी से संबंधित सभी मुद्दों का जवाब दिया जा सकता है। गौरतलब है कि एनपीआर की अधिसूचना जारी कर दी गई है और इसे एक अप्रैल से जनगणना के साथ शुरू किया जा रहा है। सिब्बल ने कहा कि अदालत का फैसला जो भी हो, लेकिन लोगों में सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर संदेह है और इसलिए वे सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 

भारत के महा पंजीयक और जनगणना आयुक्त (आरजीआई) ने कई ट्वीट करते हुए कहा कि एकत्र किए जाने वाले ब्योरे सुरक्षित रहेंगे और अनुपालना न करने वालों पर जुर्माना लगेगा। आरजीआई ने कहा, 'आपके ब्योरों की गोपनीयता को लेकर जनगणना अधिनियम 1948  में गारंटी दी गई है। लेकिन इस कानून में अधिनियम के किसी भी प्रावधान का पालन न करने या उल्लंघन करने पर जनता और जनगणना अधिकारियों दोनों के लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।' एक अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक जनगणना के हाउस लिस्टिंग फेज के साथ ही एनपीआर की मुहिम भी चलेगी। केरल और पश्चिम बंगाल सरकार कह चुकी हैं कि वे एनपीआर को लागू नहीं करेंगी। बहुत से गैर-भाजपा शासित राज्य सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करेंगे। 

शाह ने लखनऊ में कहा कि संशोधित कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे किसी की नागरिकता छिनती है। शाह ने विपक्षी नेताओं- राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती और ममता बनर्जी को इस मुद्दे पर उनके साथ बहस की चुनौती दी। सिब्बल ने कहा कि वह मोदी और शाह को सीएए, एआरसी और एनपीआर पर बहस की चुनौती देते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और शाह इस मुद्दे पर झूठ बोल रहे हैं कि यह कानून भेदभाव रहित है। सिब्बल बुधवार को उच्चतम न्यायालय में सीएए मामले में जिरह करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले नागरिकता से संबंधित किसी भी कानून और संशोधनों में धर्म के आधार पर भारत की नागरिकता देने का प्रावधान नहीं था। लेकिन मोदी सरकार द्वारा लाया गया कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। 

सिब्बल ने कहा कि सीएए और एनआरसी का आपस में कोई संबंध नहीं होने का दावा करना भी एक झूठ है। उन्होंने कहा कि इन दोनों के बीच संबंध होने का पता शाह के बयानों और पिछले साल संसद के संयुक्त सत्र को राष्ट्रपति के संबोधन से चलता है। उन्होंने कहा कि ये बयान हाल के उन दावों की हवा निकालते हैं, जिनमें कहा गया है कि एनपीआर और एनआरसी के बीच कोई संबंध नहीं है। हालांकि यह साफ है कि एनपीआर एनआरसी का आधार बनेगा। 

सिब्बल ने एनपीआर की अधिसूचना जारी नहीं होने के दावों को भी झूठ करार दिया। उन्होंने कहा कि एनपीआर की राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई है और यह एक अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि असम के अनुभव से यह झूठ उजागर हो गया है कि सीएए की प्रक्रिया से भारतीय नागरिक प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार और सशस्त्र बलों में सेवा दे चुके लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें 'संदेहास्पद' नागरिकों की सूची में डाल दिया गया। 

सिब्बल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह दावा झूठ है कि उन्होंने ऐस 30,000 हिंदू प्रवासियों  की पहचान की है, जिन्हें नागरिकता नहीं दी गई। उन्होंने कैसे इन प्रवासियों की पहचान की, जब सीएए के नियम नहीं बने हैं और न ही एनपीआर की प्रक्रिया शुरू हुई है। उन्होंने कहा, 'सीएए, एनपीआर  और एनआरसी में ऐसे बहुुत सी चीजें हैं, जिनसे इस देश का गरीब डर रहा है।'

शाह ने लखनऊ में कहा, 'अगर सीएए का कोई भी खंड मुस्लिमों समेत किसी की नागरिकता छीनता है तो वे मुझे बता सकते हैं। इस कानून के खिलाफ देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन गलत हैं।' उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनों के अनुपात में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण तीन महीने में शुरू होगा।
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