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व्यापार संबंधों में निष्पक्षता: गोयल

एजेंसियां /  January 21, 2020

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विभिन्न देशों के साथ व्यापार संबंधों में निष्पक्ष और समान शर्त हासिल करने को लेकर काम कर रहा है। विश्व आर्थिक मंच के सालाना सम्मेलन को मंगलवार को संबोधित करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने हिंद महासागर क्षेत्र में वृद्धि की अपार संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग का आह्वान किया।

गोयल ने कहा कि मौजूदा स्वरूप में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौता भारत के लिए हस्ताक्षर करने के अनुकूल नहीं था। उन्होंने कहा, 'किसी भी समझौते में कई बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत खासतौर पर चीन और अन्य दूसरे देशों के साथ बड़े व्यापार घाटे से जूझ रहा है।' गोयल ने कहा कि आरसीईपी से भारत के हटने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि पहली बार भारत ने यह दिखाया कि व्यापार कूटनीतिक पहले से निर्देशित नहीं हो सकता। 

हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ (आईओआर) पर रणनीतिक परिदृश्य सत्र में उन्होंने यह भी कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित है और निष्पक्ष आधार पर सहयोग पर जोर दे रहा है। गोयल ने कहा, 'निष्पक्ष और समान वितरण को ध्यान में रखते हुए हिंद महासागर के आसपास के सभी देश महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर पूरे सहयोग की भी उम्मीद करता है।' उन्होंने कहा, 'हम विभिन्न देशों के साथ अपने व्यापार संबंधों में समान आधार पर शर्तों को रखने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।' 

भारत जिम्मेदार नहीं 

गोयल ने कहा कि वैश्विक तापमान बढ़ाने में भारत की कोई बड़ी भूमिका नहीं रही है इसके बावजूद जीवाश्म ईंधन के मामले में भारत जवाबदेही के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन में बड़ी भूमिका निभाने वाले पश्चिमी देश पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। गोयल ने यह भी कहा कि भारत लोगों के साथ निवेशकों के हितों की रक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है और वे उनके लिए नियमन को और आसान बना रहा है। उन्होंने कहा, 'हम अपने लोगों को सही अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं और साथ ही निवेशकों के हितों की भी रक्षा करना चाहते हैं।'

कर व्यवस्था में बदलाव

भारत और कई अन्य देशों में वित्तीय असमानता की बढ़ती चुनौती के बीच एक अकादमिक जगत और अधिकार कार्यकर्ताओं से जुड़ी एक वैश्विक संस्था ने अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट कराधान व्यवस्था को टिकाऊ और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। 

इंटीपेंडेंट कमिशन फॉर दि रिफॉर्म ऑफ इंटरनैशनल कॉरपोरेट टैक्सेशन (आईसीआरआईसीटी) ने सोमवार को जारी ऑक्सफैम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि असमानता के संकट पर कोई कदम नहीं उठाया जाता है। इस वैश्विक संस्था का कहना है कि असमानता अनियंत्रित होती जा रही है और लाखों लोग बेहद अभाव में जिंदगी जीने को मजबूर हैं।  ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 2,152 अरबपतियों के पास 4.6 अरब गरीब लोगों से ज्यादा संपत्ति है। संस्था ने कहा कि उसका मकसद अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट कर सुधार के विमर्श को आगे बढ़ाना है ताकि इसे सार्वजनिक हितों के नजरिये से देखा जा सके न कि किसी देश के फायदे के लिहाज से इस पर गौर किया जाए। 

एआई खतरा नहीं

चीन की प्रमुख दूरसंचार कंपनी हुवावेई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संस्थापक रेन झेंगफेई ने विश्व आर्थिक मंच की बैठक में कहा कि एक वक्त में परमाणु बल का खतरा सबसे ज्यादा था लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) को लेकर सबसे ज्यादा डर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस करना चाहिए कि तकनीक का विकास अच्छे के लिए होता है। उन्होंने कहा कि एआई के खतरे उतने स्पष्ट नहीं है और न ही यह परमाणु बम की तरह घातक है। उन्होंने कहा, 'आप इस दौड़ में जीत सकते हैं और दुनिया में अपना दबदबा बना सकते हैं। यह बातचीत पेइचिंग और सैनफ्रांसिस्को में होती है लेकिन वे यह नहीं समझते हैं कि आखिर हो क्या रहा है।' 

अमेरिका ने दुनिया की सबसे बड़ी दूरसंचार उपकरण विनिर्माता कंपनी हुवावेई पर अमेरिकी कंपनियों के साथ काम करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। इसके पीछे उसने हुवावेई से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे का हवाला दिया है। हालांकि हुवावेई लगातार इससे इनकार करती रही है। झेंगफेई ने कहा, 'इस साल संभावना है कि अमेरिका हुवावेई के खिलाफ दुष्प्रचार को बढ़ावा दे, लेकिन मेरा मानना है कि इससे हुवावेई का कारोबार बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि कंपनी ने खुद को बचाने के लिए भारी मात्रा में निवेश किया है। इस साल हम पहले से तैयार हैं। 

भारतीयों का विश्वास

दुनियाभर में लोग वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को लेकर मानव गतिविधियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और जलवायु विज्ञान में उनके विश्वास का स्तर घट रहा है, लेकिन भारतीयों का विश्वास जलवायु विज्ञान पर सबसे ज्यादा है। यह बात मंगलवार को एक नए सर्वेक्षण में सामने आई। जलवायु विज्ञान में भरोसा और समकालिक घटनाओं से अवगत रहने के मामलों में भारतीय और बांग्लादेशी सबसे ऊपर हैं जबकि रूस और यूक्रेन इन दोनों ही मामलों में काफी पीछे हैं। 

यह सर्वेक्षण विश्व आर्थिक मंच ने अपनी 50वीं वार्षिक बैठक के दौरान प्रकाशित किया है। इसने साथ ही बेहतर जलवायु शिक्षा का आह्वान किया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि दुनियाभर में लोग ग्लोबल वार्मिंग के लिए मानव गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराते हैं और 2020 में कई क्षेत्रों में लोगों का जलवायु विज्ञान पर विश्वास कम हुआ है।

Keyword: Piyush goyal, RCEP, trade deal, IOR, carbon, fossil fuel, independent commission, oxfam, AI,
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