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पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाओं के लिए अग्रिम शुल्क पर चली कैंची

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई January 21, 2020

बाजार नियामक सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजरों के लिए नियम मंगलवार को अधिसूचित कर दिया। इसके तहत क्लाइंटों से ली जाने वाली निवेश की न्यूनतम रकम दोगुनी कर 50 लाख रुपये कर दी गई है और ऐसे मैनेजरों को अपनी हैसियत इस अधिसूचना के तीन साल के भीतर 5 करोड़ रुपये करने को कहा है।

पीएमएस के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंटों को उनकी जरूरतों के सलाह की पेशकश करते हैं, जो मोटे तौर पर धनाढ्य निवेशक होते हैं। नियामक ने पोर्टफोलियो मैनेजरों से कहा है कि वे क्लाइंटों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर अग्रिम शुल्क न वसूले। साल 2018 में सेबी ने म्युचुअल फंडों के लिए ऐसा ही नियम बनाया था और अग्रिम कमीशन पर पाबंदी लगा दी थी। एमएफ उद्योग से कहा गया था कि वह कमीशन भुगतान के मामले में पूरी तरह से निवेश को आधार बनाए।

यह वितरकों को प्रभावित करेगा क्योंकि अग्रिम कमीशन का एक हिस्सा प्रत्यक्ष तौर पर उन्हें दिया जाता था। पीएमएस शुल्क के ढांचे में मोटे तौर पर 2-2.5 फीसदी अग्रिम कमीशन और पहले साल एकमुश्त शुल्क शामिल होता है। इस शुल्क में सालाना तय शुल्क की वसूली या तय व वेरिएबल शुल्क का संयोजन होता है, जो मुनाफे के प्रतिशत के तौर पर होता है।

 

पोर्टफोलियो मैनेजर अब सिर्फ डायरेक्ट प्लान के जरिये म्युचुअल फंडों की यूनिट में निवेश कर सकते हैं और वितरण से जुड़ा शुल्क ऐसी योजना में क्लाइंटों से नहीं वसूला जा सकता। इससे निवेशकों को लाभ होगा क्योंकि उनका खर्च घटेगा। नियामक ने पोर्टफोलियो मैनेजरों से कहा है कि वे डेरिवेटिव में निवेश के लिए क्लाइंटों के पोर्टफोलियो का इस्तेमाल न करे और सटोरिया लेनदेन में शामिल न हों, जिसके साथ वास्तविक डिलिवरी न हो (डेरिवेटिव कारोबार को छोड़कर)।

यह कदम बाजार में उतारचढ़ाव कम करने के इरादे से उठाया गया है और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अनुचित जोखिम पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। अधिसूचना में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंटों के फंड का इस्तेमाल बिल डिस्काउंटिंग, बदला फाइनैंसिंग या उधारी आदि में नहीं कर पाएंगे।

डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजरों को असूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश से रोक दिया गया है। जो गैर-डिस्क्रिशनरी या सलाहकारी सेवाओं की पेशकश करते हैं वे ऐसी असूचीबद्ध प्रतिभूतियों में क्लाइंटों की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों का 25 फीसदी का निवेश कर सकेंगे या फिर इसकी सलाह दे पाएंगे।

पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंटों के फंड का निवेश किसी अन्य इकाई की सलाह के आधार पर नहीं कर पाएंगे। एक वरिष्ठ पोर्टफोलियो मैनेजर ने कहा, मैं निवेश सलाह आउटर्सोस नहीं कर सकता। शोध की क्षमता अब कंपनी के भीतर रखनी होगी, जिसका मतलब यह है कि छोटे पीएमएस या एक व्यक्ति वाला दुकान मुश्किल में घिरेगा। एमके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ विकास सचदेव ने कहा, चूंकि अच्छे निवेशकों के लिए पीएमएस लगातार पसंदीदा बनता जा रहा है, ऐसे में ये नियम उस ढांचे को मजबूत बनाएंगे, जिसके दायरे में वे परिचालन करते हैं। 

Keyword: SEBI, Sales and Exchange Board of India, Mutual Fund, Portfolio Manager, Client, PMS, regulator,
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