बिजनेस स्टैंडर्ड - भुगतान पर मोहलत की गुहार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 22, 2020 05:31 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

भुगतान पर मोहलत की गुहार

सुरजीत दास गुप्ता और मेघा मनचंदा / नई दिल्ली 01 20, 2020

दूरसंचार कंपनियों ने दाखिल किया संशोधन आवेदन

बिजनेस स्टैंडर्ड भुगतान पर मोहलत की गुहारदूरसंचार ऑपरेटरों ने सर्वोच्च न्यायालय में आज 'संशोधन आवेदन' दायर कर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये के भुगतान की 90 दिन की समयसीमा में बदलाव की मांग की है। इसके साथ ही भुगतान की शर्तों और समय को लेकर दूरसंचार विभाग के साथ बातचीत करने की अनुमति मांगी है। भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा समूह ने अदालत से इस याचिका को मंगलवार को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने का आग्रह किया क्योंकि 1.47 लाख करोड़ रुपये एजीआर के भुगतान की समयसीमा 24 जनवरी को खत्म हो रही है।

अदालत ने पिछले साल 24 अक्टूबर को दिए आपने आदेश में दूरसंचार कंपनियों को लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का बकाया 90 दिन के अंदर चुकाने को कहा था। बकाया भुगतान में विफल रहने की स्थिति में अदालत की अवमानना हो सकती है। तीन कंपनियों और समूह के प्रवक्ताओं ने इस मसले पर कोई प्रतिक्रिया या टिप्पणी से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार दूरसंचार विभाग अदालत के आदेश के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकता है। इससे पहले दूरसंचार कंपनियों ने संशोधन याचिका लाने की योजना बनाई थी जिसे फिलहाल छोड़ दिया गया था। कंपनियों का मकसद है कि भुगतान के लिए ज्यादा समय मिले और अगर अदालत अनुमति देती है तो वह दूरसंचार विभाग से किस्तों में भुगतान करने पर बात कर सकती हैं, जैसा स्पेक्ट्रम के भुगतान मामले में किया गया था।

स्पेक्ट्रम भुगतान के मामले में दूरसंचार विभाग ने दो साल स्थगन के साथ 16 साल की अवधि में भुगतान तथा स्पेक्ट्रम बैंड के आधार पर 25 से 35 फीसदी अग्रिम भुगतान पर सहमति जताई है। उद्योग की वित्तीय स्थिति, खास तौर पर वोडाफोन आइडिया को देखते हुए सरकार ने हाल ही में अगले वित्त वर्ष से दो अतिरिक्त साल के लिए भुगतान स्थगन की पेशकश की है। इसका अर्थ यह है कि अगले दो वित्त वर्ष में सरकार को अस्थायी तौर पर करीब 50,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। 

अदालत से राहत नहीं मिलने की स्थिति में उद्योग गंभीर वित्तीय दबाव में फंस सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में सबसे ज्यादा असर वोडाफोन आइडिया पर पड़ेगा। वैसे, कंपनी पहले ही स्पष्ट करचुकी है कि उसके पास परिचालन बंद करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। हालांकि इससे रिलायंस जियो पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसे एजीआर बकाया के तौर पर केवल 60 करोड़ रुपये चुकाने हैं। सूत्रों का कहना है कि जियो तय समय से पहले ही सारी राशि का भुगतान करने की योजना बना रही है। इस बारे में जानकारी के लिए जियो को ईमेल किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। सूत्रों के अनुसार भारती एयरटेल को टेलीनॉर का भी 2,100 करोड़ रुपये का बकाया चुकाना होगा क्योंकि इस कंपनी का विलय किया गया था। लेकिन सौदे में इसका उल्लेख किया गया था कि पिछले बकाये की भरपाई टेलीनॉर द्वारा की जाएगी।

सूत्रों ने कहा कि भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल और वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला बकाये और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए शनिवार को दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश से मिले थे। दूरसंचार कंपनियां इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि अगर उन्हें उच्चतम न्यायालय की तरफ से किस्तों में भुगतान की अनुमति मिलती है तो उनकी रणनीति क्या होगी।  दूरसंचार विभाग की संस्था सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने दस साल तक किस्तों में भुगतान का सुझाव दिया था जिसमें से दो साल छूट के होंगे। लेकिन यह सुझाव इस धारणा पर आधारित था कि कंपनियां ब्याज या जुर्माने के बिना बकाये का भुगतान करेंगी। कंपनियों की दलील है कि सरकार ने लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में 17,500 करोड़ रुपये कमाए हैं। 

सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यू ने कहा, 'हम उस राशि पर सवाल नहीं उठा रहे हैं जिसका भुगतान हम कर चुके हैं। अहम सवाल यह है कि हमारे किस्तों में भुगतान का तरीका क्या होगा क्योंकि अधिकांश कंपनियां पब्लिक लिमिटेड हैं जिनमें शेयरधारक हैं। हम यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि यह एक व्यावहारिक कारोबार होगा।' मैथ्यू ने कहा कि कंपनियां उस मॉडल पर चर्चा कर रही हैं ताकि उन्हेें हर साल एजीआर बकाये के कारण अतिरिक्त वित्तीय बोझ न झेलना पड़े।

उन्होंने कहा, हम लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क में कमी का अनुरोध करेंगे जो एजीआर का 13 फीसदी है। हम सरकार से अपील करेंगे कि वह इस राशि में कमी करे ताकि इससे एजीआर बकाये से पडऩे वाले बोझ को खत्म किया जा सके। साथ ही ज्यादा टैरिफ और राजस्व से लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क की कुल राशि में बढ़ोतरी होगी।' जो चार कंपनियां उच्चतम न्यायालय में अपील कर रही हैं, उन पर दूरसंचार विभाग का कुल 105,228 करोड़ रुपये बकाया हैं।

विभाग के आकलन के मुताबिक वोडाफोन इंडिया को 53,000 करोड़ रुपये चुकाने हैं। अगर इन कंपनियों को इस वित्त वर्ष के दौरान 10 फीसदी अग्रिम भुगतान का भुगतान करना पड़ता है तो यह राशि 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगी। अगर सभी कंपनियों से 10 फीसदी अग्रिम राशि वसूली जाती है तो यह करीब 14 हजार करोड़ रुपये होगी। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस फीस में आधी कटौती करती है तो इन कंपनियों को सालाना 8500 करोड़ रुपये की बचत होगी। टाटा समूह का अभी कोई दूरसंचार कारोबार नहीं है।

Keyword: telecom, trai, airtel, jio, idea, vodafone, AGR,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कोविड-19 मामले बढऩे से बाजार बरकरार रख पाएगा मौजूदा स्तर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.