बिजनेस स्टैंडर्ड - यूनिटेक में रकम की हेराफेरी
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यूनिटेक में रकम की हेराफेरी

रुचिका चित्रवंशी / नई दिल्ली January 20, 2020

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक में करीब 700 करोड़ रुपये के घोटाले को उजागर किया है। उत्तरी क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय ने पाया कि यूनिटेक ने विभिन्न मुखौटा कंपनियों को काफी रकम हस्तांतरित की है। एक सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी मामलों के मंत्रालय फिलहाल मामले की जांच कर रहा है और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।  यूनिटेक के प्रवर्तक संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा मकान खरीदारों की रकम हड़पने के आरोप में अगस्त 2017 से ही नई दिल्ली के तिहाड़ जेल में हैं। दोनों चंद्रा बंधुओं को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने अप्रैल 2017 में गिरफ्तार किया था। उन पर कंपनी की ग्रेटर नोएडा रिहायशी परियोजना में फ्लैट बुक कराने वालों को ठगने का आरोप लगाया गया था। उसके बाद मामले की जांच का आदेश दिया गया। यूनिटेक मामले की जांच से पता चलता है कि वह रकम 15 से 16 मुखौटा कंपनियों को हस्तांतरित की गई थी। सबूतों के साथ जांच के निष्कर्ष सरकार को सौंप दिए गए हैं। 
 
एक वरिष्ठï सरकारी अधिकारी ने कहा, 'यूनिटेक के प्रवर्तकों ने इस मुख्य कंपनी से रकम लेकर विभिन्न मुखौटा कंपनियों के तहत भवन और भूमि बैंक जैसी परिसंपत्तियां तैयार की। जबकि वह आम लोगों की रकम थी जिसका संबंध शेयरधारकों और बैंकों से था।' कंपनी अधिनियम की धारा 224 के तहत कंपनी मामलों के मंत्रालय को यह अधिकार दिया गया है कि वह जांचकर्ता की रिपोर्ट के आधार कार्रवाई कर सकता है। हाल में मंत्रालय ने इस संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी के प्रबंधन के अधिग्रहण के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक प्रस्ताव दिया है। सरकार ने अपने प्रस्ताव में यूनिटेक के निदेशक मंडल के सदस्यों के नाम भी प्रस्तावित किए हैं जो कभी देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी हुआ करती थी। 
 
देश के शीर्ष धनाढ्य लोगों की बिजनेस स्टैंडर्ड की वार्षिक सूची- द बिलियनायर क्लब- में 2007 में चंद्रा परिवार यानी पिता रमेश चंद्रा और बेटे अजय एवं संजय को सातवें पायदान पर रखा गया था। उस समय उनकी शुद्ध हैसियत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी। वर्ष 2005 से 2007 के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र में जबरदस्त तेजी पर सवार यूनिटेक ने अपने कारोबार का तेजी से विस्तार किया और उसने देश भर में कई परियोजनाएं शुरू की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनी के प्रवर्तकों को जमानत देने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्होंने 30 अक्टूबर 2017 के आदेश के अनुरूप 750 करोड़ रुपये जमा कराने में असफल रहे। इससे पहले दिसंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनी के बहीखाते और परिसंपत्तियों की फोरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया था।  फोरेंसिंक ऑडिट से पता चला कि यूनिटेक ने 29,800 मकान खरीदारों से 14,270 करोड़ रुपये जुटाए थे जिसमें से 13,364 करोड़ रुपये का पता बैंक विवरण से चला।
Keyword: real estate, property, unitech,,
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