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चीन की शरण में पाकिस्तान

आदिति फडणीस /  January 20, 2020

धनशोधन पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे सूची से पाकिस्तान को बाहर निकालने की पैरवी के लिए इस्लामाबाद के एक अधिकारियों का दल आजकल पेइचिंग में है। एफएटीएफ की बैठक 21 जनवरी को शुरू होगी। पाकिस्तान के लिए सबसे अच्छी संभावना यह है कि अगर उसे यह प्रमाणपत्र नहीं मिला कि उसने धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, तो उसे एफएटीएफ की तरफ से आंशिक अनुपालन रेटिंग मिल सकती है। एफएटीएफ ने अपनी कार्ययोजना में पाकिस्तान को 27 सिफारिशें लागू करने को कहा था। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को कार्ययोजना का पूरी तरह अनुपालन करने के लिए एफएटीएफ की तरफ से ज्यादा समय मिल जाएगा। 

 
पाकिस्तानी मीडिया का सरकारी सूत्रों के हवाले से कहना है कि भारत पाकिस्तान को काली सूची में डालने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहा है लेकिन इस्लामाबाद को उम्मीद है किचीन, तुर्की और मलेशिया की मदद से नई दिल्ली की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई आर्थिक मामलों के मंत्री हमद अजहर कर रहे हैं और इसमें नैशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी, विदेश मंत्रालय, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान, सीमा शुल्क विभाग, गृह मंत्रालय और फाइनैंशियल मॉनीटरिंग यूनिट (एफएमयू) के प्रतिनिधि शामिल हैं।
 
पाकिस्तान ने एफएटीएफ द्वारा उठाए गए 150 सवालों के जवाब में 8 जनवरी को 650 पन्नों की समीक्षा रिपोर्ट भेजी थी। अब पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल एफएटीएफ की कार्ययोजना की सिफारिशों के आधार पर अक्टूबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत जानकारी देगा। एफएटीएफ ने पिछले साल 18 अक्टूबर को घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान को चार महीने तक अपनी ग्रे सूची में रखेगा और अगर वह संस्था के 27 सूत्री कार्ययोजना पर उल्लेखनीय प्रगति करने में नाकाम रहा तो उसके बाद उस पर कार्रवाई हो सकती है। पाकिस्तान मीडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा, 'पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों, उनके सदस्यों को दी गई सजा, मदरसों की पंजीकरण प्रक्रिया, धनशोधन के खिलाफ उठाए गए कदम, आतंकवाद के वित्तपोषण की व्यवस्था को ध्वस्त करने और आतंकवादी संगठनों को पैसा हस्तांतरित करने के 500 से अधिक मामलों की जांच के बारे में एफएटीएफ को जानकारी देगा।' पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल साथ ही देश में धन शोधन रोधी कानून और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के नियमों को लागू करने के लिए वाणिज्यिक बैंकों के साथ थर्ड पार्टी एग्रीमेंट करने के बारे में किए गए प्रयासों की भी विस्तृत जानकारी देगा। 
 
चीन कई बार कह चुका है कि पाकिस्तान को सजा देने से एफएटीएफ के कामकाज में बाधा पहुंचेगी। उसने साथ ही साफ किया है कि वह पाकिस्तान को सजा देने के खिलाफ लड़ता रहेगा। अगर एफएटीएफ को लगता है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद की फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए अब तक जो कदम उठाए हैं वे पर्याप्त नहीं हैं और उसे काली सूची में डाला जाता है तो इसका पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर होगा। पिछले महीने विपरीत परिस्थितियों में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) की 6 अरब डॉलर की दूसरी खेप मिली थी। उसने साथ ही चेतावनी दी कि पाकिस्तान ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं लेकिन जोखिम अब भी बरकरार हैं। पाकिस्तान के पास अब 17.6 अरब डॉलर विदेशी भंडार रह गया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास 10.9 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है जो कि दूसरे बैंकों के पास कुल 6.7 अरब डॉलर जमा हैं।
Keyword: china, pakistan, FATF,
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