बिजनेस स्टैंडर्ड - खामीयुक्त नीति
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, July 16, 2020 12:49 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

खामीयुक्त नीति

संपादकीय /  January 20, 2020

चालू वित्त वर्ष के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य में भारी कमी की आशंका के चलते सरकार वैकल्पिक रास्ते देख रही है। खबरों के मुताबिक अब वह सरकारी उपक्रमों के स्वामित्व वाली संपत्ति बेचकर मार्च के अंत तक एक लाख करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। जिन परिसंपत्तियों पर बिक्री के लिए विचार किया जा रहा है उनमें भूमि और पाइपलाइन, सड़क, मोबाइल टावर, बिजली, सरकारी उपक्रमों के स्वामित्व वाली पारेषण लाइन आदि शामिल हैं। परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण का विचार जहां आगे बढ़ाने योग्य है, वहीं सशस्त्र बलों और रेलवे आदि सरकार की विभिन्न शाखाओं के पास शहरी इलाकों में बहुत बड़े पैमाने पर ऐसी जमीन है जिनके लिए डेवलपर बहुत बड़ी राशि चुकाने को तैयार होंगे। परंतु दी गई अवधि में यह बिक्री करना लगभग असंभव है। इसके अलावा इसके लिए जिस तरह प्रयास किए जा रहे हैं वह बुनियादी रूप से गलत है। पहली बात तो यह लक्षित परिसंपत्तियां मोटे तौर पर सरकारी उपक्रमों की हैं। इन्हें मजबूरी में बेचकर हासिल होने वाली राशि सरकार को लाभांश के रूप में देनी होगी। यह सरकारी उपक्रमों की काम करने की स्वायत्तता के खिलाफ है। दूसरी बात, परिसंपत्तियों की बिक्री पर विचार करने के लिए वित्त वर्ष के लगभग अंत का समय चुना गया है। जाहिर है ऐसा केवल बजट लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किया गया है। इसका असर मूल्यांकन और हासिल होने वाली राशि पर पड़ सकता है। इतना ही नहीं इससे वैधानिक जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। स्पष्टï है कि सरकार यह विकल्प इसलिए चुनना चाहती है क्योंकि चालू वर्ष में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और एयर इंडिया के निजीकरण की प्रक्रिया पूरी होती नहीं दिखती। इसके लिए भी खराब योजना ही जिम्मेदार है। 

 
चूंकि राजस्व संग्रह में अहम कमी आने वाली है तो ऐसे में विनिवेश के मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन राजकोषीय प्रबंधन को और जटिल बना देगा। चालू वर्ष में सरकार अब तक 18,095 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है जो विनिवेश लक्ष्य का 17 फीसदी है। सरकार विनिवेश लक्ष्य हासिल करने में इसलिए भी संघर्ष करती है क्योंकि वह इस विषय पर व्यवस्थित तरीके से काम नहीं करती। उदाहरण के लिए यदि सरकार व्यापक रणनीतिक विनिवेश करना चाहती है तो उसे वित्त वर्ष के आरंभ में ही नामों का चयन कर लेना चाहिए। इसे अमल में लाने में समय लगता है क्योंकि संभावित खरीदार उचित जांच-परख करना चाहते हैं। सरकारी उपक्रमों की परिसंपत्ति बेचने का विचार नीति निर्माण में खामी का एक और उदाहरण है।
 
ऐसे में सही यही होगा कि सरकार ऐसे सरकारी उपक्रमों की सूची तैयार रखे जिनमें वह मध्यम अवधि में विनिवेश करना चाहती है। यह विनिवेश अंशकालिक भी हो सकता है और सामरिक भी। इस प्रक्रिया को अन्य परिसंपत्तियों मसलन भूमि आदि में भी अपनाना चाहिए। इससे न केवल सरकार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढऩे में मदद मिलेगी बल्कि इससे बाजार भागीदारों को तैयारी और बोली लगाने के लिए उचित समय भी मिलेगा। ऐसी प्रक्रिया अपनाने से बोली लगाने वालों में  प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और मूल्यांकन सुधरेगा। इससे सरकार को भी इस बात का बेहतर अंदाजा हो जाएगा कि मध्यम अवधि में पैसा कैसे जुटाया जा सकता है। आदर्श स्थिति में परिसंपत्ति बिक्री को पूरी तरह घाटे में पूर्ति करने के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस प्रक्रिया से हासिल राजस्व का इस्तेमाल नई परिसंपत्तियां तैयार करने में किया जाना चाहिए। इससे मध्यम से दीर्घ अवधि में संभावित वृद्घि को तेज करने में मदद मिलेगी। 
Keyword: india, economy, GDP,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जियो-गूगल के साथ आने से देश में तकनीक का होगा तेज विकास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.