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नकदी की हो इफरात तभी लें आवास ऋण ओवरड्राफ्ट

सर्वजीत के सेन /  January 19, 2020

जब आप अपना नया घर खरीदने के लिए कर्ज लेने जाते हैं तो कर्ज देने वाला बैंक या संस्था कर्ज देने के साथ ही आपके सामने आवास ऋण ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी रख सकते हैं। अगर आपको यह सुविधा ठीक लग रही है या आप इसे लेने पर विचार कर रहे हैं तो पहले इसके अच्छे-बुरे पहलू अच्छी तरह जांच लेने चाहिए।

ओवरड्राफ्ट की सुविधा में कर्जदार के आवास ऋण खाते को उसके चालू या बचत खाते से जोड़ लिया जाता है। उसके पास जो भी अतिरिक्त रकम होती है, उसे इस जुड़े हुए खाते में डालने की इजाजत दे दी जाती है। जो रकम जमा की गई है अगर वह मासिक किस्त से ज्यादा होती है तौर अतिरिक्त रकम को आवास ऋण का समय-पूर्व भुगतान या प्री-पेमेंट मान लिया जाता है और बकाया मूलधन में से उसे घटा दिया जाता है। जब मूलधन घट जाता है तो ब्याज के रूप में जाने वाली कुल रकम भी कुछ हो जाती है और कर्ज की अवधि में भी कमी आ जाती है।

यह सुविधा काफी लचीली होती है। इसमें कर्जदार जब चाहे जमा की गई रकम निकाल भी सकता है। निकासी की यह सुविधा पैसे की जरूरत पडऩे पर काफी काम आ जाती है। आधार हाउसिंग फाइनैंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी देव शंकर त्रिपाठी समझाते हैं, 'आपने जो भी बचत की है, उसमें से कुछ रकम यदि आप आवास ऋण का अतिरिक्त भुगतान करने में खर्च कर देते हैं तो आपके पास नकदी की कमी हो सकती है। इसलिए अगर आपको जरूरत पड़े तो आप जुड़े हुए यानी लिंक्ड खाते में से वह रकम निकाल सकते हैं। जब आप इस तरह रकम निकालते हैं तो आपके कर्ज का मूलधन वापस सामान्य स्तर पर पहुंच जाता है और आपको पहले जैसी दर पर ही ब्याज देना पड़ता है।'

यह सब तो पढऩे में अच्छा लग रहा है, लेकिन कर्ज लेने वाले को यह भी पता होना चाहिए कि इस योजना के नुकसान क्या हैं। अगर आप ओवरड्राफ्ट सुविधा वाला आवास ऋण लेते हैं तो आपको सामान्य आवास ऋण की ब्याज दर के मुकाबले 20 से 50 आधार अंक अधिक दर पर ब्याज चुकाना पड़ सकता है। पैसाबाजार डॉट कॉम के आवास ऋण प्रमुख रतन चौधरी की राय है, 'यह सुविधा चुननी है तो खर्च और लाभ का विश्लेषण कर लीजिए: अपने पास पड़ी अतिरिक्त रकम आवास ऋण के ओवरड्राफ्ट खाते में डालकर ब्याज पर होने वाले खर्च में आप जो बचत कर रहे हैं, वह इस ऋण की ऊंची ब्याज दर के कारण हो रहे खर्च से अधिक है या नहीं?'

आवास ऋण का मूलधन चुकाने पर किसी भी व्यक्ति को आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत हर साल 1.5 लाख रुपये तक की कर कटौती का लाभ मिल सकता है। लेकिन अगर कर्ज लेने वाला व्यक्ति ओवरड्राफ्ट सुविधा वाले खाते में अतिरिक्त रकम डाल देता है तो आयकर अधिनियम के तहत उसे चुकाए जा रहे मूलधन में शामिल नहीं किया जाता है और उस व्यक्ति को इस पर कर कटौती का लाभ भी नहीं मिलता है।

जो मंझे हुए निवेशक हैं यानी जिन्हें सही जगह निवेश करने और अच्छी रकम कमाने का तरीका आता है, वे अपनी अतिरिक्त बचत को लिंक्ड खाते में जमा करने के बजाय किसी ऐसी वित्तीय योजना में लगा सकते हैं, जिससे उन्हें और भी अच्छा प्रतिफल हासिल हो। त्रिपाठी की भी यही राय है। वह कहते हैं, 'यदि आप अपनी अतिरिक्त रकम को किसी अन्य संपत्ति में निवेश कर अधिक प्रतिफल हासिल कर सकते हैं तो उसे आवास ऋण चुकाने में इस्तेमाल करना नुकसानदेह ही होगा।'

आवास ऋण ओवरड्राफ्ट की सुविधा स्वरोजगार वाले लोगों या कारोबारियों के लिए सबसे अच्छी है क्योंकि उनके पास नकदी की आमद घटती-बढ़ती रहती है यानी वेतनभोगियों की तरह उन्हें हर महीने एकसमान रकम नहीं मिलती। जिन वेतनभोगी व्यक्तियों को बोनस के रूप में मोटी रकम मिलती है या इन्सेंटिव की रकम एकमुश्त दी जाती है, वे भी इस योजना का फायदा उठा सकते हैं। चौधरी कहते हैं, 'आवास ऋण ओवरड्राफ्ट की सुविधा तभी चुनें, जब आपके पास अक्सर अतिरिक्त रकम आती रहती हो। ऐसा नहीं है तो आपको इस सुविधा के एवज में ब्याज पर ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ेगी क्योंकि इसकी ब्याज दर सामान्य आवास ऋण की ब्याज दर के मुकाबले ज्यादा होती है।'

अगर आप यह योजना चुनने का मन बना रहे हैं तो पहले अपनी दीर्घावधि वित्तीय योजना और बचत की क्षमता को ठीक से आंक लीजिए। त्रिपाठी कहते हैं, 'आवास ऋण की ज्यादा रकम चुकाएंगे तो आपकी नियमित बचत पर असर पड़ सकता है, जो वित्तीय रूप से समझदारी की बात नहीं कहलाएगी। वही कर्ज लंबे अरसे में चुकाएंगे तो आपको भविष्य के लिए रकम बचाने में भी मदद मिलेगी। आवास ऋण को जल्द से जल्द चुकाने के फेर में उन्हें ही पडऩा चाहिए, जो अपने भविष्य के लिए अच्छी खासी बचत पहले ही कर चुके हैं।'

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