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नई रोजगार नीति लाने की तैयारी में सरकार

सोमेश झा / नई दिल्ली January 19, 2020

देश में बेरोजगारी की दर ज्यादा होने की चिंता को देखते हुए नई राष्ट्रीय रोजगार नीति (एनईपी) पेश कर सकती है। इसका प्रस्ताव श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मंत्रिपरिषद की बैठक में 4 जनवरी को पेश किया था, जिसका आयोजन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा 5 साल की क्षेत्रवार योजना तैयार करने के  लिए किया गया था। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि श्रम मंत्रालय ने नए सिरे से एनईपी तैयार करने का फैसला किया है। भारत में एक एनईपी एक दशक से ज्यादा समय से चल रही है। इस तरह की पहली नीति 2007 में अंतरमंत्रालयी सलाह के लिए भेजी गई थी।

सरकार ने 2018 में नौकरियों पर नीति दस्तावेज तैयार करने के ळिए 2018 में अंतर मंत्रालयी समिति का गठन किया था और नोएडा के वीवी गिरि नैशनल लेबर इंस्टीट्यूट को श्रम मंत्रालय को एक मसौदा सौंपना था। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'बहरहाल श्रम मंत्रालय मसौदा एनईपी से खुश नहीं है।' यह दूसरा मौका होगाा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार रोजगार पर समग्र नीति तैयार करने पर काम कर रही है। 

मसौदा एनईपी में सेक्टरवार और व्यापक आर्थिक स्तर पर नीतिगत मसलों के समाधान की बात की गई है। इसमें श्रम कानून से संबंधित नीतिगत कठिनाइयों और सूक्ष्म व लघु उद्योगों की समस्याओं के समाधान का प्रस्ताव है। राजग सरकार के सत्ता में आने पर 2014 में 2 पृष्ठों की एनईपी सार्वजनिक की गई थी और इस पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। यह मसौदा पहले से ही था, जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार सत्ता में थी और इसमें असंगठित और गैर कृषि क्षेत्रों खासकर निर्माण क्षेत्र में में कौशल पर ध्यान देने की बात थी, जिससे नौकरियों के सृजन को बढ़ावा मिल सके। 

नए एनईपी दस्तावेदों का आधार उद्योगों, श्रम संगठनों पर राज्य सरकारों से बातचीत के बाद तैयार किया जाएगा। श्रम मंत्रालय ने इसके लिए पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी है। सितंबर 2019 में श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने उद्योग संगठनों व मजदूर संगठनों को पत्र लिखा था, जिसमें रोजगार सृजन, नया प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए उठाए जाने वाले कदम और कर्मचारियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर उनकी राय मांगी गई थी। 

श्रम मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, 'हमें उद्योग और मजदूर संगठनों से इनपुट मिले हैं। हमने राज्य सरकारों के साथ क्षेत्रीय बैठकों में इन मसलों पर राय ली है। जल्द ही सभी हिस्सेदारों के साथ बैठक की जाएगी।' अर्थव्यवस्था में मंदी की वजह से तमाम कंपनियों को कर्मचारियों की छटनी की घोषणा करनी पड़ी है। पुनर्गठन की कवायद के तहत ओयो समूह ने करीब 1000 कर्मचारियों को निकालने और वालमार्ट ने 56 कर्मचारियों को हटाने की घोषणा हाल ही में की है। आधिकारिक सांख्यिकी एजेंसी ने कहा है कि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष मेंं 11 साल के न्यूनतम स्तर 5 प्रतिशत पर रहेगी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के हाल के सालाना सर्वे में कहागया है कि 2017-18 में बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ज्यादा 6.1 प्रतिशत रही है। कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 2011-12 की तुलना में करीब 8 प्रतिशत घटकर 2017-18 में 23.3 प्रतिशत रह गई है।

Keyword: Unemployment, national employee policy, NEP, labor ministry, NDA, UPA, Government, Document,
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