बिजनेस स्टैंडर्ड - '5 साल में बैंक कर्ज दोगुना करने की जरूरत'
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'5 साल में बैंक कर्ज दोगुना करने की जरूरत'

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ January 19, 2020

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने आज कहा कि अगर भारत को 2024 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य पूरा करना है तो बैंकिंग क्रेडिट को मौजूदा स्तर से दोगुना करना होगा। कुमार ने कहा, 'इस समय भारत के बैंकिंग क्रेडिट का बकाया करीब 99 लाख करोड़ रुपये है और भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए अगले 5 साल में कर्ज कम से कम दोगुना करने की जरूरत है।'

उन्होंने कहा कि भारत के बैंकों की उद्योग व अन्य क्षेत्रों की इस तरह की बड़ी मात्रा में मांग को पूरा करने की क्षमता है। एसबीआई लखनऊ सर्किल के दो दिन के दौरे पर आए कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि बड़ी परियोजनाएं न होने की वजह से घरेलू अर्थव्यवस्था में कार्यशील पूंजी का इस्तेमाल अभी भी कम है। 

कुमार ने कहा, 'बैंकों के पास पर्याप्त नकदी है और हम उद्योग के कर्ज की हर जरूरतें पूरी करने में सक्षम हैं।'  उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजनों की वजह से कर्ज लेने की स्थिति में धीरे धीरे सुधार हो रहा है, जो धीरे धीरे गति पकड़ रही हैं। 

उन्होंने कहा कि अभी चल रही सुधार की प्रक्रिया के अपेक्षित परिणाम एक निश्चित समय के बाद आएंगे, न कि बदलाव के चरण के दौरान। उन्होंने कहा, 'बदलाव की एक बड़ी प्रक्रिया चल रही है और हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए। केंद्र सरकार ने तमाम कदम उठाए हैं, जिसमें उच्च स्तर पर विमर्श प्रक्रिया को बढ़ाना शामिल है।' 

उत्तर प्रदेश में कम कर्ज जमा अनुपात (सीडी रेश्यो) के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सीडी रेश्यो किसी भी राज्य के औद्योगीकरण के अनुपाती होता है। उन्होंन कहा, 'अगर औद्योगिक वृद्धि दर ज्यादा होगी तो सीडी रेश्यो भी ज्यादा होगा। कहीं कहीं सीडी रेश्यो 100 प्रतिशत से ज्यादा है, वहीं कुछ राज्यों में यह 40 प्रतिशत से कम है।' 

इस समय उत्तर प्रदेश का सीडी रेश्यो 52 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 70 प्रतिशत से ऊपर है। इसकी वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार को कहना पड़ा है कि रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को स्थिति सुधारने के लिए सक्रिय कदम उठाने पर जोर दे। 

कुमार ने भारत के सरकारी बैंकों के एकीकरण की प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि यह वक्त की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि विलय की प्रक्रिया चल रही है और निश्चित रूप से इसका बैंकिंग उद्योग पर अच्छा असर पड़ेगा क्योंकि हमें अर्थव्यवस्था में बड़े बैंकों की जरूरत है। गैर निष्पादित संपत्तियों के बारे में उन्होंने कहा कि 2018 में बैंकों का एनपीए शीर्ष पर था, अब स्थिति बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ग्राहक सेवा में सुधार के लिए निरंतर काम कर रहा है। 

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