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प्रमुख योजनाओं और कर रिफंड पर स्पष्टता चाहते हैं निर्यातक

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली January 19, 2020

निर्यातकों का कहना है कि बजट में कर रिफंड सुस्त रहने और प्रमुख प्रोत्साहन योजनाओं को लेकर अनिनिश्चितता की स्थिति साफ करने की जरूरत है। उनका कहना है कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव के साथ ये मसले वृद्धि दर सुस्त होने के लिए जिम्मेदार हैं। दिसंबर में लगातार पांचवें महीने वाणिज्यिक निर्यात कम हुआ है, क्योंकि प्रसंस्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से प्राप्तियां कम हुई और सभी प्रमुख निर्यात वस्तुओं से विदेशी मुद्रा की कमाई कम रही है। दिसंबर में 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 9 महीनों में से 6 महीनों में निर्यात गिरा है। 

फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने कहा, 'निर्यातकों के 5 महीनों के दावे अभी लंबित हैं, नकदी खत्म हो गई है और नए सौदों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया ठहर गई है।' पिछले महीने सरकार ने कहा था कि 83,500 से ज्यादा निर्यातकों को पहले ही एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) के 1.12 लाख करोड़ रुपये रिफंड का भुगतान किया जा चुका है। सरकार के मुताबिक सिर्फ 3,604 करोड़ रुपये का रिफंड ही केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के समक्ष लंबित है।

लेकिन फियो का कहना है कि बड़े निर्यातकों का वर्गीकरण जोखिम की श्रेणी में करने से नकदी की समस्या और बढ़ी है क्योंकि उनका जीएसटी और ड्रॉबैक का दावा भी रुक गया है। जोखिम वाले निर्यातक उन्हें माना गया है, जिन्होंने ज्यादा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया है यह संदेह है कि उन्होंने इसके लिए फर्जी रसीद लगाई है। सराफ ने कहा कि तमाम ऐसे मामले हैं, जिसमें सरकार को किया गया वास्तविक जीएसटी भुगतान आईजीएसटी की तुलना में कम है और वहीं निर्यातकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तमाम सेवाओं पर ज्यादा जीएसटी लगता है। 

इस तरह से अगर एक कारोबारी निर्यातक ने अगर कोई वस्तु 5 प्रतिशत दर पर और सेवाएं 18 प्रतिशत की दर पर ली है तो उसे 5 प्रतिशत आईजीएसटी निर्यात के समय देना होता है। वह आईजीएसटी का नकद भुगतान नहीं भी कर सकता है या सिर्फ एक हिस्से का भुगतान कर सकता है। फियो चाहता है कि इस तरह के मसलों का आगामी बजट में समाधान किया जाए। 

सीबीआईसी के कुल 6,421 निर्यातकों को जोखिम वाले के निर्यातक के रूप में चिह्नित किया है, जो कुल 1,85,000 निर्यातकों के महज 3.4 प्रतिशत हैं।  इनमें 8 स्टार निर्यातक हैं और उनके द्वारा दिए गए पतों पर वे नहीं पाए जाते हैं। स्टार निर्यातक सरकार द्वारा निर्यात में प्रदर्शन के आधार पर चुने जाते हैं और वे कुछ नियत विस्तारित लाभों जैसे स्वघोषणा के आधार परर सीमा शुल्क मंजूरी, कुछ योजनाओं में बैंक गारंटी से छूट पाते हैं।

निर्यातकों को यह भी उम्मीद है कि बजट में पुरानी मर्केंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) को लेकर भ्रम दूर किया जाएगा, जिसे सरकार ने बंद कर दिया है। साथ ही प्रतीक्षित रिमिशन आफ ड्यूटीज ऑर टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (आरओडीटीईपी) योजना पर स्थिति साफ होगी।

विदेश व्यापार नीति 2015 में 5 प्रोत्साहन योजनाओं को विलय कर मेगा एमईआईएस पेश किया गया था। यह 8,000 से ज्यादा वस्तुओं के वाणिज्यिक निर्यात को प्रोत्साहित करती है। इस योजना के तहत निर्यातक 2 प्रतिशत, 3 प्रतिशत और 5 प्रतिशत की नियत दरों पर ड्यूटी क्रेडिट पाते हैं। अधिकारियों ने कहा कि नया आरओडीटीईपी भी इस तरीके पर आधारित है, लेकिन दरों पर फैसला किया जाना अभी बाकी है। 

कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने कहा है कि दरों की घोषणा तत्काल की जानी चाहिए क्योंकि निर्यातकों को इसके लिए समय चाहिए होगा, जिससे कि वे नए ऑर्डर को अंतिम रूप दे सकें और नई योजना के तहत आसानी से काम कर सकें। गार्मेंट और मेड अप सेक्टर के लिए सरकार ने एमईआईएस लाभों को पूर्व्रभाव 7 मार्च 2019 से वापस ले लिया है।   

जिंस के दाम में उतार चढ़ाव, खासकर कच्चे तेल के अलावा भारत के निर्यात की राह में मुद्रा में बदलाव अहम है। मुद्रा के उतर-चढ़ाव से निर्यात पर असर पड़ा है। रुपये का मूल्य गिरा है। निर्यातकों का कहना है किइस नकारात्मकता से भारत का निर्यात प्रभावित हुआ है। जहां रुपये का मूल्य गिरा है, इसका मूल्य ह्रास  एक प्रतिशत कम रहा है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 8 प्रतिशत था। इस नकारात्मक माहौल से भारत का निर्यात प्रभावित हुआ है।

Keyword: budget, tax refund, foreign currency, processed petroleum product, FIO, GST, ITC, CBIC,
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