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बढ़ेगी पॉलिथीन थैली की मोटाई!

दिलीप कुमार झा / मुंबई January 19, 2020

एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक सामग्री की छह किस्मों पर प्रतिबंध लगाने के तीन महीने बाद सरकार अब पैकिंग के लिए पॉलिथीन की थैलियों और अन्य उत्पादों की न्यूनतम मोटाई 125 माइक्रोन निर्धारित करने पर विचार कर रही है। वर्तमान में 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक की चीजें प्रतिबंधित हैं। अब इस मानक को और कड़ा किया जा रहा है। अगर यह योजना परवान चढ़ती है, तो खाद्य, कृषि, उर्वरक, कपड़े और अन्य चीजों समेत तमाम सामग्रियों की पैकेजिंग लागत में खासा इजाफा हो जाएगा। पैकेजिंग सामग्री की न्यूनतम मोटाई बढऩे से पैक किए जाने वाले उत्पादों की लागत भी बढ़ जाएगी। इसी वजह से प्लास्टिक विनिर्माताओं ने थैलियों समेत प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री की मोटाई इतनी ज्यादा करने के प्रस्ताव को लेकर सरकार से कड़ी आपत्ति जताई है।

ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) द्वारा यहां आयोजित प्लास्टिविजन इंडिया 2020 कार्यक्रम से इतर एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार प्लास्टिक की न्यूनतम मोटाई 125 माइक्रोन अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। देश में प्लास्टिक उद्योग के संबंध में औपचारिक नीति को अंतिम रूप देने के लिए उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श चल रहा है।

केंद्र ने 2 अक्टूबर, 2019 से प्रभावी 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक की रोजमर्रा इस्तेमाल वाली छह वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इन वस्तुओं में प्लास्टिक की थैलियां, कप, प्लेटें, छोटी बोतलें (200 मिली लीटर से कम क्षमता वाली), स्ट्रा और कुछ तरह के पाउच शामिल हैं। इसके बाद सरकार ने उद्योग के अनुकूल नीति तैयार करने के लिए कच्चे माल के विनिर्माताओं, कबाड़ प्रसंस्करणकर्ताओं, निर्यातकों और आयातकों को मिलाकर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। हालांकि एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध से कपड़े, कागज, कांच आदि सहित पैकिंग के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहन मिला है। प्लास्टिक पॉलिथीन की इतनी अधिक मोटाई को लेकर विनिर्माताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं की ओर से आपत्ति किए जाने के कारण विशेषज्ञ समिति की कई दौर की बैठक अनिर्णायक रही है।

एआईपीएमए के अध्यक्ष जगत किलावाला ने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वाली इस्तेमालशुदा प्लास्टिक के कचरे से पर्यावरण को बचाने में हम सरकार के साथ हैं। लेकिन प्रतिबंध कोई समाधान नहीं है। इसलिए हम प्लास्टिक पॉलिथीन की 50 माइक्रोन की न्यूनतम मोटाई पर जोर दे रहे हैं जो एक वैश्विक मानदंड है। सरकार को बाकी दुनिया के साथ मिलकर चलना चाहिए और न्यूनतम मोटाई 50 माइक्रोन निर्धारित करनी चाहिए। भारत कच्चे माल के रूप में गैस और पेट्रोलियम के उप-उत्पादों का उपयोग करने वाले पॉलिमर से बनी करीब दो करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन करता है। अब मक्का और गन्ने आदि का उपयोग करते हुए पर्यावरणअनुकूल पॉलिमर का भी उत्पादन किया जा रहा है। अगले दो-तीन वर्षों में भारत का प्लास्टिक उत्पादन बढ़कर 2.6 करोड़ टन होने का अनुमान है। प्लास्टिक विनिर्माताओं ने सरकार से प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (टीयूएफएस) के तहत 4,500 करोड़ रुपये अलग से रखने का आग्रह किया है जैसा कि कपड़ा क्षेत्र के लिए आवंटित किया जा रहा है। इससे पुरानी तकनीक, संयंत्र और मशीनरी को उन्नत किया जाएगा जिससे उद्योग की दक्षता में सुधार होगा।

Keyword: Plastic, AIPMA, Govt, Plastic Waste, Milk, Polybag, Packaging, खाद्य, कृषि, उर्वरक,
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