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आरआईएल की आय में मुख्य कारोबार का घटेगा हिस्सा

अमृता पिल्लई /  January 19, 2020

दिसंबर तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज की आय की रफ्तार को उपभोक्ता कारोबार (खुदरा व डिजिटल) काफी सहारा मिला। हालांकि कुल आय का बड़ा हिस्सा उसके मुख्य कारोबार से हासिल हो रहा है, जिसका एबिटा में योगदान करीब 60 फीसदी रहा। हालांकि इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है और वित्त वर्ष 2022 के आखिर तक मुख्य कारोबार की हिस्सेदारी घटकर 50 फीसदी रह जाने का अनुमान है।

आरआईएल के मुख्य कारोबार तेल, पेट्रोकेमिकल और रिफाइनिंग का एबिटामें योगदान दिसंबर तिमाही में घटकर 60 फीसदी रह गया। एक साल पहले यह आंकड़ा 71 फीसदी रहा था। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी का भाषण और विश्लेषकों का अनुमान बताता है कि आने वाले समय में इसमें तेज गिरावट की आशंका है क्योंकि उपभोक्ता कारोबार में आगे और बढ़ोतरी होगी। एक विश्लेषक ने कहा, खुदरा व दूरसंचार कारोबार की बढ़त की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए अगले एक या दो साल में उपभोक्ता कारोबार व मुख्य कारोबार का योगदान एकसमान हो जाएगा। मुझे लगता है कि वित्त वर्ष 2021 या वित्त वर्ष 2022 में उपभोक्ता कारोबार का योगदान कुल आय में 50 फीसदी हो जाएगा।

सितंबर 2016 में कंपनी की सालाना आम बैठक में अंबानी ने संकेत दिया था कि कंपनी का उपभोक्ता कारोबार कुछ वर्षों में उसकी आय में समान योगदान करेगा। उन्होंने कहा था, मुझे भरोसा है कि उपभोक्ता कारोबार आगामी वर्षों में आकार व आय के लिहाज से पेट्रोकेमिकल व रिफाइनिंग कारोबार के समान हो जाएगा। वित्त वर्ष 2016 में दूरसंचार और खुदरा कारोबार का आय में योगदान 2 फीसदी था। एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष नितिन तिवारी ने कहा, उपभोक्ता कारोबार के योगदान में बढ़ोतरी जारी रहने की संभावना है और वित्त वर्ष 2022 तक यह तेल व केमिकल कारोबार के बराबर पहुंच जाएगा।

योगदान की समयसीमा पर अंबानी का अनुान साल 2016 के बाद से घटा है। अगस्त 2019 में चेयरमैन ने अपने भाषण में संकेत दिया था, वह दिन दूर नहीं है जब दोनों उपभोक्ता कारोबारों की हिस्सेदारी एकीकृत एबिटा में 50 फीसदी होगी। न सिर्फ अंबानी बल्कि विश्लेषकों ने भी आरआईएल के उपभोक्ता कारोबार की आय को लेकर अनुमान में सकारात्मक बदलाव कर रहे हैं। जेफरीज ने अपने अनुमान में वित्त वर्ष 2022 में आरआईएल के दूरसंचार कारोबार का एबिटा 33,000 करोड़ रुपये और खुदरा एबिटा 14,800 करोड़ रुपये रहने की बात कही थी। 10 जनवरी की रिपोर्ट में अब इसे संशोधित कर क्रमश: 46,500 करोड़ रुपये और 16,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। अनुमान में बदलाव के बाद कहा जा सकता है कि वित्त वर्ष 2022 की कुल आय में उपभोक्ता कारोबार का योगदान 45 फीसदी से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

बीएनपी पारिबा के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा है, हमारा अनुमान है कि जियो वु खुदरा का योगदान वित्त वर्ष 2020 के एबिटा में 35 फीसदी रहेगा और वित्त वर्ष 2022 में यह बढ़कर 46 फीसदी पर पहुंच जाएगा। हमारा मानना है कि यह बढ़ोतरी जियो के प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) में इजाफा और ग्राहकों के जुड़ाव से होगी। साथ ही खुदरा कारोबार में आ रही मजबूती का भी इसमें योगदान रहेगा। एंटिक के नितिन तिवारी ने कहा, पिछली कुछ तिमाहियों से खुदरा कारोबार की रफ्तार ने बाजार को चौंकाया है। उन्होंने कहा, दूरसंचार कारोबार का प्रदर्शन इस तिमाही से दिखना शुरू हुआ है।
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