बिजनेस स्टैंडर्ड - वोडाफोन आइडिया अगर बंद हुई तो क्या होगा...
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वोडाफोन आइडिया अगर बंद हुई तो क्या होगा...

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 17, 2020

वोडाफोन आइडिया लिमिटेड का परिचालन बंद होने से दूरसंचार बाजार में दो निजी कंपनियों का वर्चस्व होगा जो न केवल ग्राहकों एवं रोजगार सृजन के लिहाज से बल्कि सरकार के लिए राजस्व के लिहाज से भी गंभीर परिस्थिति होगी। विश्लेषकों का कहना है कि इससे देश में निवेश की संभावनाएं तलाश रहीं विदेशी कंपनियों के संभावित निवेश पर भी बुरा प्रभावित होगा। वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के दो प्रमुख शेयरधारकों- वोडाफोन पीएलसी और आदित्य बिड़ला ग्रुप- ने सार्वजनिक शेयरधारकों के साथ कुल मिलाकर 1,90,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जिसमें से 1,65,000 करोड़ रुपये एफडीआई के जरिये निवेश किया गया। यदि बैंकों की उधारी और बकाये स्पेक्ट्रम शुल्क के भुगतान को शामिल कर लिया जाए तो कुल निवेश 3,00,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। जबकि पिछले दस वर्षों के दौरान कंपनी का संचयी घाटा वित्त वर्ष 2018-19 तक 55,175 करोड़ रुपये और और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण वित्त वर्ष 2020 की सितंबर तिमाही में 49,727 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। ऐसे में अचानक परिचालन बंद होने अथवा कंपनी द्वारा दिवालिया आवेदन दायर करने से शेयरधारकों और निवेशकों के निवेश मूल्य का एक बड़ा हिस्सा बट्टेखाते में चला जाएगा। यह वोडाफोन पीएलसी द्वारा अपने बहीखाते में दर्ज किए गए बट्टेखाते से अतिरिक्त होगा।
 
वास्तव में इससे सरकार को भी जबरदस्त नुकसान होगा। वर्ष 2010 में एकीकृत कंपनी की स्थापना के बाद नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम खरीद के लिए उसे सरकार को 1,39,960 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। यदि वोडाफोन आइडिया का परिचालन बंद होता है तो सरकार को 89,180 करोड़ रुपये के भुगतान का नुकसान होगा। बकाये स्पेक्ट्रम शुल्क के लिए उसे वित्त वर्ष 2034 तक ब्याज के साथ इस रकम का भुगतान करना है। कंपनी 54,467 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर चुकी है। इसके अलावा सरकार 44,150 करोड़ रुपये की भी वसूली नहीं कर पाएगी जिसके लिए वोडाफोन आइडिया का कहना है कि एजीआर पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण उसे भुगतान करना पड़ेगा।
 
वोडाफोन आइिडया के बंद होने से सरकार को न तो लाइसेंस शुल्क का भुगतान हो पाएगा और न ही स्पेक्ट्रम उपयोगिता शुल्क का जो कंपनी के एजीआर का 13 फीसदी अथवा औसतन सालाना करीब 13,500 करोड़ रुपये है। इसके अलावा सरकार को जीएसटी, सीमा शुल्क एवं प्रत्यक्ष कर आदि विभिन्न करों के जरिये वोडाफोन आइडिया से प्राप्त सालाना करीब 13,600 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। वोडाफोन आइडिया के बंद होने से रोजगार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा जो एक ऐसे बाजार में दिखेगा जहां रोजगार सृजन पहले से ही कम है। कंपनी के आकलन के अनुसार, उसका परिचालन बंद होने से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर 1,00,00 लोगों का रोजगार प्रभावित होगा। विलय के दौरान उसने अपने कर्मचारियों संख्या पहले ही कम रखी थी।
 
इसके अलावा कई अन्य चुनौतियां भी दिख सकती हैं। वोडाफोन आइडिया का परिचालन बंद होने से उसके 30 करोड़ से अधिक ग्राहकों को भारती एयरटेल, रिलायंस जियो अथवा बीएसएनएल में पोर्टआउट होना पड़ेगा। कंपनी के 20 करोड़ 2जी ग्राहकों के लिए विकल्प काफी सीमित है क्योंकि जियो केवल 4जी सेवाएं मुहैया कराती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों कंपनियों के नेटवर्क पहले से ही अपने अधिकतम क्षमता पर काम कर रहे हैं और ऐसे में वोडाफोन आइडिया के ग्राहकों को तत्काल समायोजित करना आसान नहीं होगा। 
Keyword: vodafone, idea, telecom, bank,,
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