बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकार ही दे सकती है राहत : बैंक
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सरकार ही दे सकती है राहत : बैंक

अभिजित लेले / मुंबई January 17, 2020

वोडाफोन आइडिया के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) संबंधी बकाये को लेकर उद्योग जगत में चिंता के बीच इस समूह में काफी निवेश कर चुके बैंकों का कहना है कि वे अब कुछ खास नहीं कर सकते। उनका कहना है कि डिफॉल्ट के मामले को छोड़कर दूरसंचार ऑपरेटरों के पुनर्भुगतान दायित्वों पर नए सिरे से काम करने की अब कोई गुंजाइश नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र के लिए कोई भी राहत पहले सरकार की ओर से आनी चाहिए। वोडाफोन आइडिया समूह का कुल बकाया मार्च 2019 तक 1.25 लाख करोड़ रुपये हो चुका था। गोल्डमैन सैक्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सरकार से कोई राहत न मिलने की स्थिति में सबसे अधिक झटका वोडाफोन आइडिया को लगेगा।
 
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, बकाये भुगतान दायित्व को छोड़कर वोडाफोन आइडिया का कुल ऋण बोझ करीब 28,000 करोड़ रुपये का है। सितंबर 2019 तक उसका कुल नकदी एवं नकदी समतुल्य परिसंपत्तियां 15,400 करोड़ रुपये थी जबकि उसका शुद्ध ऋण 13,000 करोड़ रुपये का था। हालांकि बैंकरों का कहना है कि ऋण मानक परिसंपत्ति है जिसका मतलब यह हुआ कि कंपनी ने पुनर्भुगतान में कभी चूक नहीं की है। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा था कि बैंकिंग क्षेत्र के लिए दूरसंचार क्षेत्र परेशानी का सबब बन सकता है। केंद्रीय बैंक ने इस क्षेत्र में निवेश के लिए मानक परिसंपत्ति प्रावधान को बढ़ा दिया था।
 
बैंकरों ने कहा कि केवल एक कंपनी के दबावग्रस्त होने से केंद्रीय बैंक अपने मानदंडों में बदलाव नहीं कर सकता है। कुल मिलाकर, परिसंपत्ति मान्यता एवं प्रावधान मानदंड अन्य खातों की तरह ही रहेंगे। एक निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा संभवत: दायर की जाने वाली उपचारात्मक याचिका पर सरकार अनुकूल जवाब देगी। हालांकि इससे देनदारी खत्म नहीं हो सकती है लेकिन हमारा मानना है कि सरकार भुगतान को सात साल के लिए टाल सकती है। इससे उनका बोझ कम होगा।'
 
करीब एक पखवाड़ा पहले भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था कि एजीआर जैसी दूरसंचार क्षेत्र की पिछली देनदारी संबंधी मुद्दे को निपटाना जरूरी है। कुमार ने कहा कि दूरसंचार एक प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्र है जहां भारी निवेश की जरूरत होती है लेकिन दूरसंचार पर एजीआर मुद्दे का प्रभाव निश्चित तौर पर चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा तब तक चिंता बरकरार रहेगी क्योंकि इस क्षेत्र में बैंकों का काफी अधिक निवेश है।
 
दूरसंचार कंपनियों ने अपनी समस्याओं से निपटने के लिए शुल्क दरों में बढ़ोतरी की है और पिछले साल नवंबर में सरकार ने भी स्पेक्ट्रम बकाये के भुगतान के लिए उन्हें दो वर्षों का समय दिया था ताकि कुछ राहत मिल सके। सरकार ने कहा था कि स्पेक्ट्रम नीलामी के किस्तों का भुगतान 2021-22 के बाद ही शुरू होगा। इससे दबावग्रस्त दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के नकदी प्रवाह में सुधार होगा और इससे उन्हें वैधानिक देनदारी एवं बैंक ऋण पर ब्याज का भुगतान करने में मदद मिलेगी। वोडाफोन आइडिया में निवेश बैंकिंग प्रणाली में मौजूद कुल गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का महज 2 फीसदी हिस्सा है। लेकिन गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि इतने बड़े डूबते ऋण से निवेशकों का भरोसा प्रभावित होगा और बैंक दूरसंचार कंपनियों में निवेश के जोखिम से बचने लगेंगे।
 
वोडाफोन आइडिया में सबसे अधिक निवेश करने वाले बैंकों में आईडीएफसी फस्र्ट बैंक (आईडीएफबी), इंडसइंड बैंक और भारतीय स्टेट बैंक शामिल हैं। आईडीएफबी का शुद्ध निवेश करीब 11 फीसदी है। हालांकि गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि इंडसइंड बैंक के निवेश का एक बड़ा हिस्सा भारत सरकार के पक्ष में गैर-फंड आधारित दायित्व से संबंधित है। इस बीच, रेटिंग एजेंसियों ने भी दूरसंचार ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिति और ऋण प्रोफाइल पर संभावित दबाव का उल्लेख किया है। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट फाइनैंस) अनलिसा डि चियारा ने कहा कि यह एक ताजा झटका है लेकिन फैसला कोई आश्चर्यजनक नहीं है। भारती एयरटेल पहले ही प्रावधान कर चुकी है ताकि बहीखाते पर दबाव को दूर किया जा सके। फिर भी, उसके ऋण प्रोफाइल पर इसका उल्लेखनीय प्रभाव होगा।
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