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सीएए मामले में अदालत जाएगा पंजाब

एजेंसियां /  January 17, 2020

पंजाब विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को कहा कि केरल की तरह उनकी सरकार भी इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब और विपक्ष शासित अन्य राज्यों में लागू करने के लिए केंद्र को सीएए में जरूरी संशोधन लाने पड़ेंगे। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब में जनगणना 2021 पुराने पैमानों पर ही होगी। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा जोड़े गए नए घटकों को इस जनगणना में शामिल नहीं किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को तीन घंटे की चर्चा के बाद पारित किया गया। केरल के बाद पंजाब दूसरा राज्य है जहां नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रस्ताव का समर्थन किया, वहीं भाजपा ने इसका विरोध किया। वहीं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने संशोधित कानून के तहत नागरिकता देने के लिए समुदायों की सूची में मुस्लिमों को शामिल करने की मांग की।
 
विभाजनकारी कानून
 
अमरिंदर सिंह ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है और दावा किया कि 1930 के दशक में एडोल्फ हिटलर ने जो जर्मनी में किया था वैसी ही कार्रवाई अब देश में हो रही है। इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कैप्टन अमरिंदर ने इस कानून को विभाजनकारी तथा प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनपीआर) को हादसा करार दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में जो घटनाएं हो रही है वह उनके जीवनकाल में हो रही हैं।
 
नागरिकता संशोधन कानून 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है जबकि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को इससे बाहर रखा गया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डïा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संशोधित नागरिकता कानून को लेकर देश को  गुमराह करने का आरोप लगाया और कांग्रेस नेता को चुनौती दी कि इस कानून पर 10 वाक्य बोलकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि राहुल दो वाक्य में बता दें कि सीएए को लेकर उन्हें क्या दिक्कत है। 
 
रिपोर्ट मांगेंगे राज्यपाल 
 
केरल के राज्यपाल ने कहा है कि उन्हें सूचना दिए बिना नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को लेकर वह राज्य सरकार से रिपोर्ट मांग सकते हैं। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अदालत का दरवाजा खटखटाने पर वाम शासित राज्य सरकार की आलोचना की और कहा कि इस बारे में उन्हें सूचना नहीं देने को लेकर वह रिपोर्ट मांग सकते हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर प्रहार करते हुए खान ने कहा कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की सनक के अनुसार सरकार नहीं चलाई जा सकती और हर किसी को नियमों का सम्मान करना होगा।
 
केरल सरकार ने 13 जनवरी को उच्चतम न्यायालय में कानून को चुनौती दी थी और इसे संविधान के प्रतिकूल घोषित करने की मांग की थी। खान ने कहा, 'जब भी मैं देखता हूं कि उल्लंघन हुआ है, वे नियमों से हट रहे हैं, संविधान के प्रावधानों से अलग होते हैं तब मैं निश्चित तौर पर रिपोर्ट मांगूंगा।' राज्यपाल ने कहा कि उन्हें सुनिश्चित करना है कि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल नहीं हो।
 
एनपीआर का जिक्र नहीं 
 
केरल सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि 2021 की जनगणना पर परिपत्र भेजने के दौरान राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का उल्लेख नहीं किया जाए। एक पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव के आर ज्योतिलाल ने जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत तौर पर इसे सुनिश्चित करें क्योंकि पिछले महीने राज्य सरकार ने राज्य में एनपीआर से संबंधित सभी मामलों पर रोक लगा दी थी। राज्य में 2021 में जनगणना अभियान के पहले चरण के साथ एनपीआर की भी प्रक्रिया शुरू होने वाली थी। यह पत्र इसलिए जारी किया गया है क्योंकि सरकार के संज्ञान में आया था कि कुछ जनगणना अधिकारी 2021 जनगणना से संबंधित परिपत्र भेजने के दौरान एनपीआर अभियान का उल्लेख कर रहे हैं।
 
'सक्रिय राजनीति में अभी नहीं'
 
तिहाड़ जेल से रिहा होने के कुछ घंटे बाद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद शुक्रवार को जामा मस्जिद पहुंचे। उन्होंने वहां संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। आजाद ने नागरिकता संशोधन कानून को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि देश को एकजुट रखने से ज्यादा महत्त्वपूर्ण कोई और चीज नहीं है। उन्हें गुरुवार की रात जमानत पर तिहाड़ जेल से रिहा किया गया। उन्होंने शाहीन बाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और देश के अन्य हिस्सों में इस कानून के  विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए महिलाओं की तारीफ की। आजाद ने कहा, 'नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन देश के भविष्य, हमारी पहचान और संविधान बचाने के लिए है। इसे मजबूत करना हमारा दायित्व है।' उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टी के बारे में वह बाद में फैसला लेंगे क्योंकि फिलहाल काले कानून के खिलाफ लड़ाई लडऩी है। ऐसी चर्चा थी कि वह दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं। उन्होंने पिछले महीने सक्रिय राजनीति में उतरने की घोषणा की थी।  
Keyword: CAA, punjab, court,,
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