बिजनेस स्टैंडर्ड - आंशिक भुगतान पर हो रहा विचार
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आंशिक भुगतान पर हो रहा विचार

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 17, 2020

दूरसंचार कंपनियां उच्चतम न्यायालय द्वारा तय समयसीमा से पहले अपने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये के एक हिस्से का भुगतान करने की संभावना पर विचार कर रही हैं। यह राशि कुल एजीआर का 20 फीसदी तक हो सकती है। न्यायालय द्वारा तय समयसीमा 24 जनवरी को खत्म हो रही है। न्यायालय ने पिछले साल 24 नवंबर को अपने आदेश में इन कंपनियों को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) का बकाया 90 दिन के भीतर चुकाने को कहा था। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड ने इस पर समीक्षा याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। कंपनियों का कुल बकाया 147,000 करोड़ रुपये है। 
 
सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यू ने इस बात की पुष्टि की है कि बकाये के एक हिस्से के भुगतान के बारे में कंपनियों के बीच चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा, 'कुछ कंपनियां उच्चतम न्यायालय द्वारा तय समयसीमा से पहले अपने बकाये के एक हिस्से के भुगतान पर चर्चा कर रही हैं। यह राशि 20 फीसदी हो सकती है। साथ ही वे दूरसंचार विभाग से अनुरोध करना चाहती हैं कि उन्हें बाकी बकाया किस्तों में करने की अनुमति दी जाए।' सीओएआई ने इससे पहले सरकार को एक पत्र लिखकर कंपनियों को इस राशि के भुगतान के लिए दो साल तक बिल्कुल छूट के साथ दस साल का समय देने की मांग की थी। सीओएआई के अधिकारियों का कहना है कि चूंकि लाइसेंस फीस का भुगतान और एसयूसी दूरसंचार विभाग और दूरसंचार कंपनियों के बीच एक अनुबंध है, इसलिए सरकार को किस्तों में भुगतान की योजना लानी चाहिए। मैथ्यू ने साथ ही कहा कि दूरसंचार कंपनियां अपने स्तर पर भी सरकार से अनुरोध कर सकती हैं और अंतिम फैसला होने के बाद सीओएआई भी दूरसंचार विभाग को एक पत्र भेज सकता है। उनका यह भी कहना है कि पहले दूरसंचार कंपनियां स्व-आकलन प्रक्रिया के तहत एजीआर बकाये की गणना करती हैं और फिर इसे दूरसंचार विभाग को भेजती हैं। विभाग फिर इसकी जांच पड़ताल करता है और इसे घटा या बढ़ा सकता है। दूरसंचार कंपनियों ने अपने एजीआर बकाये की गणना करके दूरसंचार विभाग को भेज दिया है। 
 
अलबत्ता, कुछ कंपनियों के एजीआर बकाये की गणना और सरकार के हिसाब के बीच कुछ अनियिमितताएं हैं। उदाहरण के लिए वोडाफोन इंडिया लिमिटेड के मामले में कंपनी ने अपनी समीक्षा याचिका में इसे 44,000 करोड़ रुपये बताया है जबकि दूरसंचार विभाग का दावा है कि कंपनी पर 55,000 करोड़ रुपये का बकाया है। विश्लेषकों के मुताबिक दूरसंचार कंपनियों की गणना के मुताबिक उन पर 99,000 करोड़ रुपये का बकाया है जबकि सरकारी दावे में यह राशि 110,000 करोड़ रुपये है। इन कंपनियों में भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड, रिलायंस जियो और टाटा की दूरसंचार कंपनियां तथा सरकारी क्षेत्र की बीएसएनएल और एमटीएनएल शामिल हैं। सरकार के लिए टेलीनॉर, एतिसलात और आरकॉम जैसी कंपनियों से वसूली करना मुश्किल है। आरकॉम का मामला आईबीसी में चल रहा है। 
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