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संपादकीय /  January 16, 2020

इस सप्ताह न्यूयॉर्क में माइक्रोसॉफ्ट के एक आयोजन में सॉफ्टवेयर क्षेत्र की इस आला कंपनी के भारतीय मूल के मुख्य कार्याधिकारी अधिकारी (सीईओ) सत्य नाडेला की बातों पर विवाद हो गया। नाडेला के बारे में कहा गया कि उन्होंने नए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को 'दुखद' और 'खराब' बताया। सोशल मीडिया पर तथा अन्य जगहों पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके बाद कंपनी के भारत स्थित कार्यालय को नाडेला के वक्तव्य को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। नाडेला ने अमेरिका में एक आप्रवासी के रूप में अपने सुखद अनुभव की बात की थी और कहा था कि वह अपनी जन्मभूमि में भी ऐसा ही चाहते हैं।

नाडेला ने कहा था, 'मुझे अच्छा लगेगा यदि कोई बांग्लादेशी आप्रवासी भारत आकर वहां 100 अरब डॉलर मूल्य की कंपनी खड़ी करता है या इन्फोसिस का अगला सीईओ बनता है। ऐसी आकांक्षा होनी चाहिए। मेरे साथ जो अमेरिका में हुआ, वही भारत में होना चाहिए।'

नाडेला ने अपने नजरिये में जो साफगोई दिखाई है वह तारीफ करने लायक है। वह जिस भारत की बात कर रहे हैं वह एक ऐसा देश होगा जहां महत्त्वाकांक्षी और आकांक्षी लोगों का स्वागत तो होगा ही बल्कि ऐसी महत्त्वाकांक्षा को पुरस्कृत भी किया जाएगा। यह सफलता न केवल व्यक्तिगत रूप से तकदीर बदलने वाली होगी बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। अर्थशास्त्रियों के बीच इस बात पर आम सहमति है कि आप्रवासन से देश की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है।

भले ही यह अत्यंत कम कुशलता वाले कर्मियों का आप्रवासन हो। भारत के अलावा अमेरिका में भी फिलहाल यह बहस चल रही है। यह भी एक वजह है जिसके चलते नाडेला अपने अनुभवों के बारे में बात करने को विवश हुए। इसके अलावा यह भी सही है कि आप्रवासन को लेकर देश की मौजूदा व्यवस्था और इसे तथा सीएए को लेकर हो रही बहस बुनियादी रूप से उस राह से अलग हैं जो देश की आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है और जो किसी भी उदार लोकतंत्र को अपनानी चाहिए। असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसा कोई अन्य दु:स्वप्न नहीं घटित होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि एक अद्यतन, धार्मिक दृष्टि से निरपेक्ष और किफायती आप्रवासन व्यवस्था लागू की जाए। आप्रवासियों को नागरिकता देने का एक तरीका होना चाहिए, अस्थायी वर्क परमिट की गुंजाइश होनी चाहिए और कागजी कार्रवाई कम होनी चाहिए। फिलहाल भारतीय नागरिकता हासिल करना या ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड की पात्रता न रखने वाले लोगों के लिए वर्क परमिट हासिल करना अत्यंत कठिन है।

विश्व शक्ति बनने की आकांक्षा रखने और दुनिया भर से प्रतिभाओं को अपने पास जुटाने की इच्छा रखने वाला कोई देश ऐसी व्यवस्था जारी नहीं रख सकता। दुनिया भर में प्रतिभाओं को लेकर जंग छिड़ी हुई है। तमाम दुनिया के देश और शहर यह समझ रहे हैं कि आने वाले दशकों में आर्थिक वृद्धि नवाचार, उद्यमिता और रचनात्मक पर केंद्रित होगी। भारत इस होड़ से बाहर नहीं रह सकता।

सरकार को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि यदि वह नाडेला की भावनाओं से सहमत नहीं भी होती तो भी भारत समेत दुनिया के तमाम निवेशक और कारोबारी इससे इत्तफाक रखते हैं। किसी भी देश में समुचित निवेश माहौल के लिए सामाजिक स्थिरता एक पूर्व शर्त की तरह है। अब तक यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि सीएए, एनआरसी और सामाजिक मोर्चे पर सरकार के ऐसे अन्य कदम सामाजिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं और इनके गहन आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं। नाडेला तथा उनकी जैसी हैसियत वाले अन्य लोग सरकार से यही चाहेंगे कि वह ऐसे कदमों के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में सावधानीपूर्वक विचार करे।
Keyword: CEO, CAA, Microsoft, Satya Nadela, Social Media, US,
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