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एयरटेल व जियो रहेगी फायदे में, वोडा-आइडिया पर संकट

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 16, 2020

यह समझना मुश्किल नहीं है कि आज के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सबसे ज्यादा लाभ किसे मिलेगा, जिसने एजीआर के बकाए के भुगतान पर अपने पहले के फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया। पहले स्थान पर रिलायंस जियो होगी जबकि दूसरे स्थान पर भारती एयरटेल। स्पष्ट तौर पर वोडाफोन-आइडिया के लिए चिंता की बात होगी और सवाल यह है कि क्या कंपनी अपना परिचालन बंद करेगी या फिर उसे चालू रखेगी।

इसकी वजह सामान्य है : जियो पर एजीआर का असर नगण्य है क्योंकि उसे सिर्फ 60 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। ऐसे में इस कंपनी पर वित्तीय असर नगण्य होगा, लेकिन उसके लिए 50 करोड़ ग्राहक हासिल करने का लक्ष्य तय करना आसान होगा। अभी जियो हर महीने 80-90 लाख ग्राहक जोड़ रही है, ऐसे में लक्षित आंकड़े तक पहुंचने में उसे 16-18 महीने लगेंगे। लेकिन कमजोर वोडाफोन आइडिया अगर परिचालन बंद करने का फैसला लेती है तो इस कंपनी के 31.1 करोड़ ग्राहक बाजार में होंगे, जिसका एक हिस्सा निश्चित तौर पर जियो हासिल करेगी क्योंकि ज्यादा से ज्यादा 2जी-3जी ग्राहक, 4जी की ओर जाएंगे। 4जी फीचर फोन के जरिए जियो के पास आकर्षक पेशकश है, जिसकी कीमत 699 रुपये है। इसके तहत 2जी फोन को 4जी फोन में तब्दील किया जाएगा और जेब पर भी भार नहीं पड़ेगा।

भारती के लिए इस पैसले का मतलब यह होगा कि कंपनी को एजीआर का बकाया चुकाने के लिए क्यूआईपी व एफसीसीबी के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल करना होगा, जो 48,000 करोड़ रुपये है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि सरकार कार्यकारी आदेश के जरिये इस भुगतान को टुकड़ों में करने की योजना पेश कर सकती है, जो दबाव घटाएगा। लेकिन सकारात्मक चीज यह है कि कंपनी का शुद्ध कर्ज-एबिटा अनुपात 3.3 फीसदी के नियंत्रित स्तर पर है।

कमजोर वोडाफोन आइडिया अगर परिचालन बंद करती है को भारती को इसका फायदा मिल सकता है। जियो को इसका उतना फायदा नहीं मिलेगा। उदाहरण के लिए वोडाफोन आइडिया के 7.3 फीसदी ग्राहक पोस्टपेड हैं और विश्लेषकों का कहना है कि राजस्व में उनकी हिस्सेदारी 20 फीसदी से ज्यादा है क्योंकि उनका एआरपीयू ज्यादा है।

इसके उलट एयरटेल के 5.6 फीसदी ग्राहक पोस्टपेड हैं और कंपनी ने इस क्षेत्र में सबसे बड़ी कंपनी बनने की रणनीति बनाई है। अगर वोडाफोन आइडिया दुकान बंद करती है या फिर कमजोर होती है तो उच्च एआरपीयू वाले ज्यादातर ग्राहक एयरटेल की ओर जाएंगे। जियो के पास पोस्टपेड में बहुत ज्यादा नहीं है और उसने प्रीपेड बाजार में ही आक्रामक रहना पसंद किया है। जियो के पास इसमें एकमात्र पेशकश 199 रुपये की है, जो उसके ग्राहक आधार का महज एक फीसदी है।

दूसरा, वोडाफोन आइडिया के ज्यादातर ग्राहक 2जी फोन का इस्तेमाल करते हैं और सिर्फ कुछ ही डेटा का उपभोग करते हैं। ताजा आंकड़ों के आधार पर कंपनी के पास 20 करोड़ 2जी ग्राहक हैं और इनमें से 3.8 करोड़ डेटा इस्तेमाल करते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि उनमें से कई 2जी नेटवर्क में रहना चाहेंगे और एयरटेल उन्हें मौका उपलबब्ध करा सकता है। दूसरी ओर जियो के पास 4जी नेटवर्क है।

साथ ही टैरिफ भी 15 से 40 फीसदी तक बढ़ा है, जो 2जी ग्राहकों को दूसरी तरफ जाने के पहले कई बार सोचने को बाध्य कर रहा है। जियो के आने के बाद भी भारती अपनी राजस्व बाजार हिस्सेदारी 30 फीसदी पर बनाए रखने में कामयाब रही है। सुनील मित्तल ने गोल्डमैन सैक्स से मुलाकात में कहा है कि वह बाजार हिस्सेदारी में बढ़त का 50 फीसदी हासिल करने में सक्षम है।

वोडाफोन के लिए सबसे बड़ी चुनौती 54,000 करोड़ रुपये के भुगतान की है और वह पहले से ही कर्ज में डूबी है। वोडाफोन व कुमारमंगलम बिड़ला सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि अगर सरकार ने कुछ नहीं किया तो वे परिचालन बंद कर देंगे।
अच्छी खबर यह है कि सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए दो साल की मोहलत दे दी है, जो कंपनियों के हाथ में अभी करीब 25,000 करोड़ रुपये रखता है। भविष्य की उनकी रणनीति स्पष्ट तौर पर इस पर निर्भर करेगी कि सरकार टुकड़ों में भुगतान की क्या पेशकश करती है ताकि असर कम हो। सीओएआई पहले ही 10 साल की मोहलत की मांग कर चुका है।
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