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किसानों ने पकड़ी ऑनलाइन की राह

दिलीप कुमार झा / मुंबई January 15, 2020

सुल्तानपुर (औरंगाबाद) के किसान दीपक चौहान के पास छह एकड़ जमीन है। वह अपनी 20 फीसदी अतिरिक्त कमाई से एक एकड़ और जमीन लेने की योजना बना रहे हैं। यह कमाई उन्होंने अपने उत्पादों को ऑनलाइन माध्यम से सीधे कॉर्पोरेट खरीदारों को बेचकर की है। यह काम वह स्वरूप सत्कारी एफपीसी लिमिटेड नामक अपनी किसान उत्पाद कंपनी (एफपीसी) के माध्यम से कर रहे हैं।

सुल्तानपुर की सबसे बड़ी एफपीसी में से एक स्वरूप सत्कारी एफपीसी पर इस इलाके के करीब 400 किसान पंजीकृत हैं। यहां किसानों को मक्का, सोयाबीन, दलहन और अन्य कृषि जिंसों को सीधे थोक विक्रेताओं और कॉर्पोरेट उपभोक्ताओं को बेचने की सुविधा प्रदान की जाती है। स्वरूप सत्कारी एफपीसी की तरह पूरे महाराष्ट्र में 300 से अधिक एफपीसी पंजीकृत हैं जहां (छोटे, मझोले और बड़े) किसानों को अपने उत्पाद ऑनलाइन बेचने की सुविधा मुहैया कराई जाती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब आदि बड़े कृषि राज्यों में भी एफपीसी बिचौलियों की छुट्टी कर ऑनलाइन कारोबार का लाभ उठा रही हैं और अपने उत्पाद का उच्च मूल्य हासिल कर रही हैं।   

वायदा बाजार का लाभ उठाने के लिए कई एफपीसी ने नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) की सदस्यता ली है। यहां से वे वायदा कीमत की जानकारी लेकर उत्पाद बेचने का निर्णय लेती हैं जिससे उन्हें अच्छी कीमत हासिल होती है। एनसीडीईएक्स किसानों को वायदा बाजार की समझदारी पूर्वक इस्तेमाल में मदद करता है ताकि वे अपने उत्पाद पर अधिकतम लाभ अर्जित कर सकें।

चौहान ने कहा, 'हमने ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर वायदा और हाजिर बोलियों के जरिये सफलतापूर्वक मक्के और सोयाबीन की बिक्री की है। पहले हमें ऋणदाताओं को तुरंत भुगतान करने के लिए अपनी उपज को आनन-फानन में बेचना पड़ता था। लेकिन हमारी एफपीसी ने हमें अच्छी कीमत हासिल करने में मदद की है। केवल इस वर्ष ही हमने सफलतापूर्वक ऑनलाइन बिक्री कर 20 फीसदी अधिक लाभ कमाया है।'   

चौहान जैसे कई किसानों ने इस विकल्प को अपनाया है और मजबूरी में बिक्री करने से बच रहे हैं। एफपीसी और दूसरे ऑनलाइन साझेदार ऋणदाताओं का बकाया चुकाने के लिए किसानों को रकम जुटाने और अपने उत्पाद ऊंची कीमत पर बेचने में मदद करते हैं। इसके अलावा स्टार एग्रीवेयरहाउसिंग ऐंड कोलेटेरल मैनेजमेंट लिमिटेड (स्टार एग्री) और नैशनल कोलेटेरल  मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (एनसीएमएल) ने भी अपने ग्राहकों को ऊंची कीमतें दिलाने के लिए अपना ऑनलाइन जिंस कारोबार प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इस पर ग्राहकों की कृषि जिंसों की बोली लगाई जाएगी।   

स्टार एग्री ने एग्रीबाजार डॉट कॉम और एनसीएमएल ने मार्केटयार्ड डॉट कॉम नाम से अपना प्लेटफॉर्म शुरू किया है जिस पर ग्राहकों को उत्पाद बेचने की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। एक अन्य गोदाम कंपनी नैशनल बल्क हैंडलिंग कॉर्पोरेशन (एनबीएचसी) ऑनलाइन कारोबार प्लेटफॉर्म लाने पर विचार कर रही है जिस पर वह अपने ग्राहकों को कृषि उत्पाद सीधे थोक उपभोक्ताओं को बेचने की सुविधा देगी। इस प्रकार इस कंपनी के ग्राहकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए दलालों की जरूरत नहीं होगी, लिहाजा उन्हें अच्छी कमाई होगी। स्टार एग्री के सह संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अमित अग्रवाल ने कहा, 'एग्रीबाजार पर हमने 1.4 अरब डॉलर मूल्य का लेनदेन किया है और 18 लाख टन से अधिक कृषि उत्पाद की आपूर्ति की है जिसमें मोटे तौर पर दाल, अनाज, मसाले, सेब और अखरोट शामिल हैं। फिलहाल, हमारी सेवाओं से लाभ उठाने के लिए 1,50,000 से अधिक किसान हमसे जुड़े हुए हैं।'

गोदाम सेवा प्रदाताओं की ओर से शुरू किए गए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार की पहल इलेक्ट्रॉनिक नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) से भिन्न हैं। ई-नाम मंडी से जुड़ी सेवा है, जबकि गोदाम कंपनियों द्वारा विकसित किए गए प्लेटफॉर्म उनके ग्राहकों के लिए मंडी के बाद की सेवाओं के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। ये किसान अपने माल इन गोदामों में भविष्य में बिक्री के लिए या बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से रकम जुटाने के लिए जमा करते हैं ताकि मजबूरी में उत्पादों की बिक्री करने से बचा जा सके।  

एनसीएमएल के प्रबंध निदेशक संजय कौल ने कहा, 'हमारे प्लेटफॉर्मों पर ग्राहकों को बोलियां और अन्य संबंधित सेवाएं दी जाती हैं। हमारे ग्राहकों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि हमने सात बैंकों से बात की है कि अगर उपयोगकर्ताओं के ऊपर ऋण भी बकाया हो तब भी उन्हें अपना खाता बंद करने की अनुमति दी जाए।'

ऑनलाइन बिक्री के जरिये किसानों को अब पहले की अपेक्षा कम से कम 15-20 फीसदी अधिक कीमत मिल रही है। इसके अलावा बिचौलियों और दलालों की भूमिका समाप्त हो जाने से किसानों को उनके उत्पादों की कीमत तुरंत मिल रही है।

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