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'स्वत: ऑनलाइन सुविधा बंद करें बैंक'

अनूप रॉय / मुंबई January 15, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज बैंकों से कहा कि जारी किए जाने वाले किसी भी नए कार्ड को भारत में केवल भौतिक इस्तेमाल जैसे कि ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) के लिए सक्षम होना चाहिए। कार्ड पर इंटरनेट और अन्य सुविधाएं केवल तभी दी जानी चाहिए जब ग्राहक उसके लिए विशेष तौर पर अनुरोध करे। 

केंद्रीय बैंक ने कहा कि ग्राहक के पास भौतिक और इंटरनेट इस्तेमाल के लिए किसी भी तरह की लेनदेन में राशि की सीमा निर्धारित करने का विकल्प होना चाहिए। मौजूदा कार्डों के लिए बैंक अपने विवेक के आधार पर तय कर सकते हैं कि उन्हें ग्राहकों को कार्ड पर इंटरनेट इस्तेमाल की सुविधा देनी है अथवा नहीं। लेकिन ऐसे कार्ड जिनका इस्तेमाल कभी भी ऑनलाइन लेनदेन के लिए नहीं किया गया है या किसी भी तरह से कार्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में इन सुविधाओं को स्वत: बंद कर दिया जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसे कार्ड जिनका इस्तेमाल कभी भी इंटरनेट लेनदेनों के लिए नहीं किया गया है आगे से ऑनलाइन लेनदेनों के लिए भी उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

रिजर्व बैंक ने अपनी वेबसाइट पर एक अधिसूचना में कहा, 'मौजूदा कार्डों के लिए जारीकर्ता अपने जोखिम धारणा के आधार पर यह निर्णय ले सकता है कि कार्ड में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लेनदेनों की सुविधा नहीं है, कार्ड में अंतरराष्ट्रीय लेनदेनों की सुविधा है और कार्ड के संपर्क रहित लेनदेन के अधिकारों को निष्क्रिय किया जाए अथवा नहीं। ऐसे मौजूदा कार्ड जिनका इस्तेमाल कभी ऑनलाइन (कार्ड में सुविधा नहीं है)/ अंतरराष्ट्रीय /संपर्क रहित लेनदेन के लिए नहीं हुआ है उनको इस उद्ïदेश्य के लिए अनिवार्य रूप से निष्क्रिय किया जाएगा।' 

जब कोई बैंक डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड जारी करता है तब वह इंटरनेट बैंकिंग की सुविधाएं भी देता है। हालांकि, जो लोग इस तरह के लेनदेन में खुद को सहज नहीं पाते हैं आसानी से कॉल सेंटर के जरिये हो रही घोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। इस तरह की धोखाधड़ी में धोखेबाज व्यक्ति कॉल कर कार्ड की सारी जानकारी और फोन पर आए ओटीपी मांग लेता है और कार्डधारक का पैसा उड़ा लेता है।

इसलिए रिजर्व बैंक मानता है कि जो लोग पहले से ऑनलाइन लेनदेन कर रहे हैं वे सीवीवी संख्या या ओटीपी के महत्त्व को समझते हैं और फोन पर इसकी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करते हैं। लिहाजा ऐसे लोग इन सुविधाओं का उपयोग करना जारी रख सकते हैं। लेकिन इंटरनेट से जुड़े धोखाधड़ी को लेकर जागरूक नहीं रहने वाले लोग आगे भी इस तरह की धोखाधड़ी को लेकर निश्चिंत रह सकते हैं क्योंकि उनके कार्ड पर यह सुविधा आगे से स्वत: उपलब्ध नहीं रहेगी। 

रिजर्व बैंक ने बैंकों को यह भी कहा है कि सभी कार्डधारकों को लेनदेन शुरू करने/ बंद करने और उसकी सीमा तय करने व उसे बढ़ाने या घटाने जो कि कार्ड की सीमा के भीतर होगी जिसे जारीकर्ता ने निर्धारित किया हो, मुहैया कराई जाए। यह सुविधा सभी तरह के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, पीओएस/ एटीएम/ ऑनलाइन लेनदेनों/ संपर्क रहित लेनदेनों में दी जानी चाहिए।

ये सुविधाएं सभी तरह के माध्यमों जैसे मोबाइल एप्लीकेशन /इंटरनेट बैंकिंग /एटीएम /इंटरएक्टिव वॉइस रिस्पॉन्स (आईवीआर) पर 24 घंटे दी जानी चाहिए और इन्हें शाखाओं के जरिये भी उपलब्ध कराया जा सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि कार्ड की स्थिति में कोई बदलाव होने की सूरत में बैंकों को एसएमएस और ई-मेल के जरिये ग्राहक को अलर्ट, ताजा जानकारी, स्थिति आदि भेजना चाहिए।
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