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सेबी के आदेश के खिलाफ सैट पहुंचा ऐक्सिस बैंक

जश कृपलानी /  January 15, 2020

ऐक्सिस बैंक ने बुधवार को सेबी के आदेश के खिलाफ यथास्थिति की मांग करते हुए प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) का दरवाजा खटखटाया। सेबी ने कहा था कि जिन क्लाइंटों के ऊपर कार्वी का बकाया नहीं है उनके शेयर गिरवी रखना कानूनी रूप से अवैध है।

पंचाट ने ऐक्सिस बैंक को इस वास्तविकता के आलोक में अंतरिम राहत दी कि विगत में नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी ने कार्वी मामले में सेबी के नवंबर 2019 के आदेश के आधार पर क्लाइंटों की प्रतिभूतियां वापस हस्तांतरित कर दी थी। इसकी पुष्टि करते हुए ऐक्सिस बैंक के प्रवक्ता ने कहा, बैंक ने सेबी के आदेश के खिलाफ सैट में अपील की है। सैट ने बुधवार को यथास्थिति बरकार रखते हुए अगली सुनवाई तक सेबी के आदेश के खिलाफ अंतरिम राहत दी। सेबी ने अपने आदेश में 171.74 करोड़ रुपये के शेयरों की पहचान की थी जहां क्लाइंटों ने पूरा बकाया चुका दिया है। ऐक्सिस बैंक के प्रवक्ता ने कहा, हमारा कहना है कि ये शेयर कर्ज से मुक्त हैं और आंकड़े की दोबारा जांच की जानी चाहिए।

अपने आदेश में सेबी ने कहा है कि कार्वी की तरफ से ऐक्सिस बैंक के पास गिरवी रखे गए 13.69 करोड़ रुपये के क्लाइंटों के शेयरों का हस्तांतरण तब हो सकता है जब बैंक हर क्लाइंट की तरफ से इसके लिए अधिकृत किए जाने का सबूत पेश करे। नियामक ने पाया कि जिन क्लाइंटों के ऊपर बकाया नहींं है उसके शेयर को गिरवी रखना कानूनी तौर पर वैध नहीं है। इन प्रतिभूतियों की कीमत 171.74 करोड़ रुपये है। सेबी ने आदेश में कहा, अगर ऐक्सिस बैंक 13.69 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों के लिए क्लाइंटों की तरफ से अधिकृत किए जाने का सबूत पेश करता है तो ऐसी प्रतिभूतियां जारी की जा सकती हैं, लेकिन इससे पहले एनएसई की निगरानी में उपरोक्त प्रक्रिया का पालन करना होगा।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत बरुआ ने भी पाया कि क्लाइंटों की प्रतिभूतियां पाने के लिए हर क्लाइंट से अधिकृ त किए जाने का सबूत लाना होगा और ऐसे गिरवी के लिए क्लाइंटों की पावर ऑफ अटॉर्नी पर्याप्त नहीं होगा। ऐक्सिस बैंक ने अपनी दलील में कहा था कि पावर ऑफ अटॉर्नी अधिकृत किए जाने का पर्याप्त सबूत है। ऐक्सिस बैंक ने इन शेयरों के बदले कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग को ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी थी।  

म्युचुअल फंड के आवेदन को मंजूरी नहीं : सेबी ने म्युचुअल फंड लाइसेंस के लिए कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के आवेदन पर मंजूरी नहीं दी है। नियामक की रिपोर्ट बताती है कि लंबित नियामकीय कदम को देखते हुए कार्वी का आवेदन अभी रोक लिया गया है। कार्वी ने पिछले साल फरवरी में म्युचुअल फंड कारोबार शुरू करने के लिए आवेदन किया था, जो क्लाइंटों की प्रतिभूतियां गिरवी रखने के मामले में नियामकीय कोप का सामना करने से काफी पहले की बात है। कमीशन के लिहाज से देश की सबसे बड़े म्युचुअल फंड वितरक एनजे इंडिया इन्वेस्ट को म्युचुअल फंड कारोबार के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई।
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