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एमएफ एजेंटों की नजर एआईएफ, बीमा में वृद्धि पर

जश कृपलानी / मुंबई January 14, 2020

म्युचुअल फंड (एमएफ) रजिस्ट्रार ऐंड ट्रांसफर एजेंट्स (आरटीए) बीमा उद्योग और वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) में वृद्धि के लिए नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। एफएफ उद्योग के शुल्क में कटौती के कारण मूल्य निर्धारण पर 4 से 5 फीसदी का प्रभाव दिख सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एमएफ आरटीए के पास एआईएफ को अपनी सेवाएं देने और उनकी परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता मौजूद है।

एवेंडस कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रैटेजिज के सह-मुख्य कार्याधिकारी वैभव सांघवी ने कहा, 'एमफ के विपरीत एआईएफ को कस्टमाइज्ड सेवाओं की जरूरत होती है क्योंकि यह एक निजी प्लेसमेंट मॉडल है। लेकिन एमएफ आरटीए इन जरूरतों को पूरा करने में समर्थ हैं।' आरटीए के लिए एआईएफ की सेवाओं की लागत कम हो सकती है क्योंकि उसके लिए नियामकीय जरूरतें सीमित हैं। एक आरटीए अधिकारी ने कहा, 'एआईएफ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा अधिक विनियमित नहीं है।

साथ ही, एआईएफ को सेवाएं देने के लिए आरटीए पहले से ही समर्थ हैं। प्रभावी तौर पर एआईएफ को सेवाएं देने में आरटीए के लिए अधिक जटिलता नहीं है और उसके लिए ताजा निवेश करने की भी जरूरत नहीं है।' फिलहाल आरटीए करीब 100 करोड़ रुपये की विभिन्न गतिविधियों के लिए एआईएफ को अपनी सेवाएं मुहैया करा रहे हैं।

उद्योग प्रतिभागियों का कहना है कि आरटीए के साथ जुडऩा बड़े एआईएफ के लिए मायने रखता है। हाल में खुद का एआईएफ स्थापित करने वाले एक एमएफ मैनेजर ने कहा, 'आरटीए की सेवाओं से परिचालन कुशलता सुधारने में मदद मिल सकती है। लेकिन बड़े आकार के फंड के लिए आरटीए शुल्क उचित होना चाहिए।' 31 मार्च 2016 से 31 मार्च 2019 के बीच एआईएफ का निवेश सालाना 82 फीसदी की वृद्धि के साथ 18,200 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.09 लाख करोड़ रुपये हो गया। आरटीए प्रतिभागियों का कहना है कि उन्हें बीमा कारोबार में वृद्धि के लिए काफी संभावनाएं दिख रही हैं।

केफिन टेक्नोलॉजिज के एमडी एवं सीईओ वी गणेश ने कहा, 'आज यूलिप जैसी तमाम ऐसेट-लिंक्ड बीमा योजनाएं हैं। बीमा में जबरदस्त संभावनाएं हैं क्योंकि भारत में अभी भी काफी लोग इसके दायरे से बाहर हैं। बीमाकर्ताओं को भी महसूस होने लगा है कि यदि वे ट्रांस्फर एजेंसी जैसे मॉडल को अपनाएंगे तो कारोबार में विस्तार, प्रौद्योगिकी और लागत के मोर्चे पर उन्हें फायदा होगा।' इलेक्ट्रॉनिक बीमा योजनाएं जारी करने की अनिवार्यता से भी आरटीए कंपनियों को फायदा हो सकता है।

एक आरटीए अधिकारी ने कहा, 'भारतीय जीवन बीमा निगम को छोड़कर निजी बीमा कंपनियां आरटीए के बीमा रिपॉजिटरी सेवाओं के साथ करार करेंगी क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक योजनाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। भारतीय जीवन बीमा निगम ने किसी बीमा रिपॉजिटरी के साथ करार नहीं किया है क्योंकि वह खुदके इलेक्ट्रॉनिक योजना दस्तावेज मुहैया कराती है।'  अब तक विभिन्न बीमा रिपॉजिटरी द्वारा महज 12.5 लाख इलेक्ट्रॉनिक योजनाएं जारी की गई हैं।
Keyword: Mutual Fund, investment, Return, Deposit, Scheme, Net Asset, Equity,
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