बिजनेस स्टैंडर्ड - दरों में कटौती की संभावना घटी
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दरों में कटौती की संभावना घटी

अनूप रॉय / मुंबई January 13, 2020

दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 7.35 प्रतिशत पर पहुंचने के बार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के लिए दर कटौती में लंबा अंतराल दिखने की संभावना है। मुद्रास्फीति का आंकड़ा केंद्रीय बैंक के 2 और 6 प्रतिशत के बीच सीमित रखने के लक्ष्य की तुलना में अधिक है। 

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व वाली एमपीसी ने पिछले साल फरवरी से दरों में 135 आधार अंक तक की कटौती की थी और दिसंबर में दर कटौती का सिलसिला थम गया। अब अर्थशास्त्रियों और बॉन्ड बाजार के कारोबारियों का कहना है कि दर कटौती में ठहराव फरवरी के साथ साथ अप्रैल की समीक्षा बैठक में भी देखा जा सकता है, क्योंकि सब्जियों की कीमतें थमने में अभी कुछ और समय लगेगा। भले ही आयात और नई आवक की वजह से प्याज के दाम नीचे आए हैं, लेकिन इसका मुख्य प्रभाव काफी हद तक पड़ेगा। हालांकि अर्थशास्त्री मुद्रास्फीति में तेजी को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं।

इंडसइंड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री गौरव कपूर ने कहा, 'खुदरा मुद्रास्फीति में 50 प्रतिशत का योगदान प्याज समेत सब्जियों की कीमतों का है। बाकी सब कुछ अपने दीर्घावधि मौसमी पैटर्न के अनुरूप दिख रहा है। समस्या यह है कि सब्जियों की कीमतों में मासिक आधार पर तेजी आ रही है जिसका मुद्रास्फीति के आंकड़े पर असर बना रहेगा। जनवरी में, खुदरा मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत के पार रहने का अनुमान है।'

बॉन्ड बाजार के लिए भी यह नई समस्या है। बाजार को मुद्रास्फीति में इतनी ज्यादा वृद्घि का अनुमान नहीं था। बैंक ऑफ अमेरिका में ट्रेजरी प्रमुख जयेश मेहता ने कहा, 'बॉन्ड प्रतिफल पर दबाव रहेगा। 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल शुरुआती कारोबार में 10 आधार अंक तक ऊपर जा सकता है, लेकिन उसके बाद यह वापस नीचे आ सकता है और फिर से इसमें तेजी देखी जा सकती है। यह काफी हद तक इस पर निर्भर करेगा कि आरबीआई किस तरह से हालात का प्रबंधन करता है।' बॉन्ड डीलरों का मानना है कि आरबीआई को और ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) की पेशकश करनी होगी, जिसमें यह बाजार से बॉन्ड की खरीद-बिक्री करता है।

लेकिन साथ ही, अर्थव्यवस्था को ताकत और तरलता प्रदान करने की आरबीआई की क्षमता एमपीसी के बाद कुछ हद तक सीमित हुई है। केंद्रीय बैंक ने सोमवार को कहा कि सरकार ने 41,920.230 करोड़ रुपये के बॉन्ड परिवर्तित किए हैं। यह सौदा वित्त वर्ष 2020-21 में परिपक्व हो रही प्रतिभूतियों की आरबीआई से पुनर्खरीद और समान बाजार मूल्य की नई प्रतिभूतियां जारी करने से संबंधित है। इससे केंद्रीय बैंक को और ऑपरेशन टि्वस्ट करने में मदद मिलेगी, जिनमें वह अल्पावधि बॉन्डों की बिक्री करेगी और दीर्घावधि बॉन्ड खरीदेगी। 

बाजार को आरबीआई के नीतिगत रुख में बदलाव आने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस बारे में निर्णय वृद्घि में 5 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से तेजी पर निर्भर करेगा।लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि केंद्रीय बैंक अभी भी दरों में कटौती कर सकता है और यह संकेत दे सकता है कि वह मुद्रास्फीति को लेकर सतर्क है।
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