बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी
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बैंकों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी

रघु मोहन / नई दिल्ली 01 13, 2020

7 जून के परिपत्र की प्रगति की होगी समीक्षा

बैंक के शीर्ष अधिकारियों को बनाया जाएगा उत्तरदायी
जुर्माने के साथ निर्धारित होगा उच्च प्रावधान

बिजनेस स्टैंडर्ड बैंकों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारीभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पिछले साल 7 जून के अपने परिपत्र की समीक्षा के बाद बैंकों पर भारी जुर्माने के साथ दबावग्रस्त ऋणों के लिए उच्च प्रावधान तय कर सकता है। इसके अलावा परिपत्र के तहत कोई प्रगति नहीं होने पर बैंकों के मुख्य कार्याधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधन को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।  सूत्रों के मुताबिक आरबीआई ने बैंकों को संकेत दिया है कि वे किसी औपचारिक अधिसूचना का इंतजार किए बिना 1,500 करोड़ रुपये से कम राशि वाले दबावग्रस्त ऋणों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। 7 जून का परिपत्र पिछले साल 7 जून से 2,000 करोड़ रुपये के अधिक राशि वाले दबावग्रस्त खातों पर और इस साल 1 जनवरी से 1,500 करोड़ रुपये से 2,000 करोड़ रुपये तक के खातों पर लागू था। 

केंद्रीय बैंक ताजा दिशानिर्देशों पर काम कर रहा है जिसके तहत ज्यादा सख्त अनुपालन व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके मार्च के अंत तक सार्वजनिक किया जा सकता है। एक सूत्र ने कहा, '7 जून के परिपत्र के तहत प्रगति संतोषजनक नहीं रही है और इसकी समीक्षा की जा रही है। इसके अलावा फंड के हेरफेर और धोखाधड़ी के भी मामले हैं। इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।' 

यह जुर्माना और प्रावधान बैंकों द्वारा 7 जून के परिपत्र के पालन के लिए किए जाने वाले अतिरिक्त प्रावधानों से इतर होगा। इस परिपत्र के तहत बैंकों को समीक्षा अवधि से 180 दिन के बाद 20 फीसदी और एक साल बाद 15 फीसदी प्रावधान करना होगा। केंद्रीय बैंक खासतौर पर वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में धोखाधड़ी के मामले में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर चिंतित है। उसे आशंका है कि इसे छिपाने के लिए ही बैंकों ने 7 जून के परिपत्र पर बात आगे नहीं बढ़ाई और इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (आईसीए) की नाकामी के पीछे भी यही वजह थी। 

सूत्र ने कहा, 'हमें देखना होगा कि इस मामले में प्रगति के पीछे क्या वजह रही। क्या बैंक दबावग्रस्त परिसंपत्तियों पर कोई फैसला लेने में नाकाम रहे या फिर दाल में कुछ काला है।' वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में 50 करोड़ रुपये और इससे अधिक राशि के गबन के मामलों की संख्या बढ़कर 398 पहुंच गई। इनमें कुल 1,05,619 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। वित्त वर्ष 2019 में ऐसे मामलों की संख्या 322 थी और इनमें 61,759 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की धोखाधड़ी वाले मामलों की संख्या 21 पहुंच गई जिनमें 44,951 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। पिछले साल ऐसे मामलों की संख्या 4 थी और इनमें कुल 6,505 करोड़ रुपये का हेरफेर हुआ था।

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