बिजनेस स्टैंडर्ड - सीएमडी पद पर मिली मोहलत
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सीएमडी पद पर मिली मोहलत

श्रीमी चौधरी /  01 13, 2020

अनुपालन की समयसीमा बढ़ी

बाजार नियामक ने चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पद अलग करने के लिए दिए दो साल
सूचीबद्ध कंपनियां अब 1 अप्रैल 2022 तक लागू कर सकती हैं यह नियम
कंपनी जगत अर्थव्यवस्था में सुस्ती का दे रहा था हवाला

बिजनेस स्टैंडर्ड सीएमडी पद पर मिली मोहलतभारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भारतीय कंपनी जगत को चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) पदों को अलग करने के लिए दो साल का वक्त दे दिया है। कंपनियों को यह प्रावधान लागू करने के लिए अब अप्रैल 2022 तक का वक्त मिल गया है। 

देश के प्रमुख उद्योग संगठन एवं कंपनी जगत कंपनी प्रबंधन के इन शीर्ष पदों को अलग करने को लेकर समस्या जताते रहे हैं। उनका मत रहा है कि अर्थव्यवस्था में गिरावट के इस दौर में नए नियम से उन पर अनुपालन बोझ बढ़ जाएगा। बाजार नियामक ने बाजार मूल्य के लिहाज से देश की शीर्ष 500 कंपनियों के लिए चेयरमैन एवं एमडी के पद अलग करने का निर्देश दिया हुआ था। उन्हें 1 अप्रैल 2020 तक इस पर अमल करने को कहा गया था। लेकिन सेबी ने 10 जनवरी को जारी अधिसूचना में इस सीमा को बढ़ाकर अप्रैल 2022 कर दिया है। हालांकि सेबी ने समयसीमा बढ़ाने के लिए कोई कारण नहीं बताया है।

वैसे सेबी ने चेयरमैन एवं एमडी के पद अलग-अलग व्यक्तियों के पास रहने का प्रावधान लागू करने के लिए कंपनी जगत को पर्याप्त समय दिया था। लेकिन इसकी समयसीमा समाप्त होने में दो महीने का ही वक्त बाकी रह जाने के बावजूद कई कंपनियां इसे लागू नहीं कर पाई थीं। चर्चा है कि इन कंपनियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से इस नियम की समीक्षा की मांग भी की थी। वहीं एक तबका इस प्रावधान को पूरी तरह वापस लेने की पैरोकारी भी कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि सरकार और सेबी के बीच इस पर चर्चा हुई थी। 

हालांकि कंपनी प्रशासन के जानकार अनुपालन समयसीमा बढ़ाने को पश्चगामी कदम बताते हुए कहते हैं कि यह नियामकीय निकाय की विश्वसनीयता कम करता है। उनका कहना है कि यह नियम सभी संबद्ध पक्षों से सलाह के बाद बनाया गया था। एक्सीलेंस इनेबलर्स के चेयरपर्सन एम दामोदरन कहते हैं, 'कंपनियों के पास इस फैसले को लागू करने के लिए पर्याप्त समय था। अगर उन्होंने इस पर गंभीरता दिखाई होती तो उन्हें इसे लागू करने में कोई मुश्किल नहीं होती।' 

विशेषज्ञ कहते हैं कि भारतीय कंपनी प्रशासन में चेयरमैन एवं एमडी पदों को अलग करना अपरिहार्य हो गया था क्योंकि यहां पर कई कंपनियों का नेतृत्व प्रवर्तकों के पास है। प्राइम डेटाबेस के संस्थापक चेयरमैन पृथ्वी हल्दिया कहते हैं, 'इस नियम की मंशा काफी अच्छी थी और सेबी ने वाजिब कारणों से इसका प्रावधान रखा था। लेकिन प्रासंगिक न होते हुए भी अर्थव्यवस्था में गिरावट को इसे टालने का बहाना बनाया गया है। दो साल तक टाले जाने का मतलब है कि नियम शिथिल कर दिया गया।'

दुनिया भर में चेयरमैन और एमडी के पदों पर एक ही व्यक्ति आसीन होने को सही नहीं माना जाता है। इसकी वजह यह है कि चेयरमैन किसी भी कंपनी के बोर्ड का मुखिया होता है जबकि एमडी कंपनी के रोजमर्रा के कामों पर नजर रखने वाला शीर्ष प्रबंधक है और वह चेयरमैन को रिपोर्ट करता है। ऐसे में एक व्यक्ति के पास दोनों पद होने से कंपनी संचालन की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका होती है।

बहरहाल कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि समयसीमा बढ़ाए जाने से इतर गंभीर कंपनियां इन मानकों का पालन करेंगी। इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज के एमडी अमित टंडन कहते हैं, 'भले ही सेबी ने तारीख बढ़ा दी है लेकिन मुझे लगता है कि भविष्योन्मुख कंपनियां दोनों भूमिकाओं को पृथक करेंगी। एक व्यक्ति में सत्ता का अत्यधिक संकेंद्रण कम करना होगा।' वहीं कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले से कंपनी जगत को बड़ी राहत मिली है। 

कानूनी फर्म साइरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर ऋषभ श्रॉफ कहते हैं, 'कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों को इसके अनुपालन में दिक्कत हो रही थी और उन्हें मजबूर होकर जल्दबाजी में फैसले करने पड़ रहे थे। अब उनके पास काबिल उम्मीदवारों के चयन के लिए दो साल का वक्त होगा।'

Keyword: SEBI, Sales and Exchange Board of India, Regulator,Company, CMD,
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