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आर्थिक वृद्धि बहाली को लेकर अर्थशास्त्री आश्वस्त नहीं

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली January 12, 2020

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगामी केंद्रीय बजट आर्थिक वृद्धि दर बहाल करने में अहम भूमिका निभाएगा। उनका कहना है कि बेहतर स्थिति रहने पर भी 2020-21 में वृद्धि दर 6 प्रतिशत से ऊपर नहीं जा सकती है।

पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन ने कहा कि आर्थिक बहाली केंद्रीय बजट में उठाए गए कदमों पर निर्भर होगी। सरकार की ओर से कॉर्पोरेशन कर में कटौती सहित पहले ही उठाए जा चुके कदमों के बारे में पूछे जाने पर सेन ने कहा कि कर की कम दरों का आर्थिक वृद्धि पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती का भी आर्थिक वृद्धि पर ज्यादा असर नहीं होगा।' सेन ने कहा कि वृद्धि बढ़ाने के लिए रोजगार का सृजन और बजट में इस पर जोर दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई योजना की घोषणा के बगैर सरकार को पीएम किसान, मनरेगा और ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण जैसी योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत है। 

सांख्यिकी कार्यालय द्वारा बनाई गई कई समितियों में रहे जाने माने अर्थशास्त्री सुदीप्त मंडल ने कहा कि आर्थिक वृद्धि इस पर निर्भर करती है कि सरकार वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाती है, लेकिन असल रिकवरी के लिए 2 साल इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से बजट बहुत आलोचनात्मक है। सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर बने रहने या अर्थव्यवस्था को गति देने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह गलत चयन है। राजकोषीय लक्ष्य से समझौता किए बगैर व्यय को बढ़ावा देने के विकल्प हैं। 

नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी में प्रोफेसर एनआर भानुमूर्ति ने का मानना है कि अगले वित्त वर्ष में वृद्धि रफ्तार पकड़ लेगी, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से यह उम्मीद धुंधली हो रही है। उन्होंने 2021 में वृद्धि दर 5 से 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। उनका कहना है कि अमेरिका-ईरान की स्थिति पैदा न होती तो 2020-21 में वृद्धि दर 6 प्रतिशत से ऊपर चली जाती।

Keyword: Economist, Union Budget, Statistics, Pranab Sen, NSO, PM Kisan, MGNAREGA,
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