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तेल 70 डॉलर से नीचे रहा तो नहीं बिगड़ेगा बजट

अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली January 12, 2020

केंद्र सरकार के 2020-21 के बजट की तैयारियों में आर्थिक मंदी प्रमुखता पर है, वहीं पश्चिम एशिया में अस्थिरता और उसका कच्चे तेल पर पडऩे वाले असर को लेकर भी अनिश्चितता है। बहरहाल विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जब तक कच्चे तेल का दाम 70 डॉलर प्रति बैरल तक के स्तर पर बना रहेगा, केंद्र के बजट या महंगाई को लेकर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सहित अगर वैश्विक नेताओं के हाल के बयानों को देखें तनाव कम करने पर जोर है, जो बजट बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। 

येद्व बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा, 'अगर बजट बनाने वाले कच्चे तेल का दाम 65-70 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से बनाते हैं तो उनके राजकोषीय गणित के हिसाब से ठीक रहेगा। अहम बात यह है किराजकोषीय गणित ज्यादा विश्वसनीय होने की जरूरत है।'

इंडिया रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, 'अर्थव्यवस्था और केंद्रीय बजट की गणना पर कोई असर पडऩे की संभावना नहीं है, अगर कच्चा तेल 70 डॉलर के नीचे बना रहता है। अगर यह कम अवधि के लिए इससे ऊपर भी जाता है तो भी कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। अगर कच्चा तेल 2 महीने या इससे ज्यादा समय तक इसके ऊपर जाता है, तब समस्या होगी।' 

अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के बाद कच्चे तेल के दाम में थोड़ी तेजी आई थी, लेकिन फिर दाम माह के निचले स्तर पर पहुंच गए।  इसके अलावा न्यूयॉर्क में गुरुवार को इसमें 1.6 प्रतिशत की गिरावट आई। राष्ट्रपति ट्रंप ने जब इराक में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल से हुए हमलों को कम करके बताया। जबकि एक दिन पहले इसमें 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी। उस समय चिंता थी कि वाशिंगटन और तेहरान में टकराव बढ़ेगा। वास्तव में बाजार में तेल की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा था। 

फरवरी डिलिवरी के लिए वेस्ट टैक्सस इंटरमीडिएट 80 सेंट कमजोर होकर न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में 58.80 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो इसके पहले 1.2 प्रतिशत तक चढ़ा था। मार्च के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स का सेटलमेंट 66 सेंट गिरकर आईसीई फ्यूचर्स यूरोप एक्सचेंज में 64.78 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो इसके पहले 1 प्रतिशत तक बढ़ा था। 

संभवत: ओपेक क्षेत्र भी युद्ध जैसी स्थिति से बचना चाहता है क्योंकि इससे उनकी भी अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता आएगी। राव ने कहा कि ट्रंप का राष्ट्रपति चुनाव को लेकर संदेश यह है कि वह युद्ध जैसी स्थिति से बचना चाहते हैं। उन्होने कहा कि इसमें किसी की दिलचस्पी नहीं है कि तेल के दाम बढ़ें। 

उन्होंने कहा, 'वैश्विक रिकवरी अभी शुरुआती अवस्था में है और अगर आगे कुछ टकराव होता है तो उससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था की रिकवरी पर भी असर पड़ सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी तेल के एक और झटके को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है।'  पंत ने कहा कि अगर आने वाले महीनों में कच्चे तेल के दाम में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होती है तो इससे न सिर्फ पेट्रोलियम और उर्वरक सब्सिडी बढऩे से बजट की गणना बिगड़ेगी, साथ ही इससे महंगाई भी बढ़ेगी, जिसका असर मौद्रिक नीति के मोर्चे पर भी नजर आएगा।
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