बिजनेस स्टैंडर्ड - फसल नुकसान से बढ़े घरेलू धान के दाम
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फसल नुकसान से बढ़े घरेलू धान के दाम

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ January 12, 2020

अमेरिका-ईरान के बीच मौजूदा टकराव के कारण अटकी खेपों के संबंध में भारत के बासमती निर्यातकों को गतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। इससे गैर-बासमती धान के दामों में मजबूती आ रही है। पिछले साल की भारी बारिश और इसके परिणामस्वरूप प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बाढ़ के बाद फसल क्षति की खबरों से कुछ स्थानीय बाजारों में दामों में इजाफा हो रहा है।

ईरान को भेजी जाने वाली बासमती की खेपों को कुछ समय के लिए रोकने संबंधी अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (एआईआरईए) की सलाह के बाद बासमती के कारोबार पर आशंका के बादल छा गए हैं। इसका असर इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) के दामों में गिरावट के रूप में नजर आया है।

ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार है और वर्ष 2018-19 के दौरान करीब 1.5 अरब डॉलर की खेप भेजी गई थी। हालांकि चौबेपुर मंडी में गुरुवार को गैर-बासमती धान (ग्रेड 3) का भाव 2,440 रुपये प्रति क्विंटल रहा जो एक महीना पहले 9 दिसंबर, 2019 के भाव 2,310 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में 5.62 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह कानपुर में धान का भाव 2,350 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि 9 दिसंबर, 2019 को भाव 2,150 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह एक महीने के दौरान दामों में 9.30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

अन्य बाजारों में भी यही रुख नजर आया है जो यह बताता है कि धान की फसल क्षति के परिदृश्य से गैर-बासमती किस्म के घरेलू दामों को मदद मिली है। मुंबई के चावल व्यापारी और निर्यातक देवेंद्र वोरा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि घरेलू धान के दाम पहले ही नीचे आ चुके हैं और आगे चलकर इनमें इजाफा होने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (एनआरआरआई) के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. विश्वजित मंडल के अनुसार खरीफ सत्र 2019-20 के दौरान भारत के कुछ हिस्सों में असामान्य बारिश हुई। इसके परिणामस्वरूप चावल उत्पादन नौ करोड़ टन रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के अनुमानित उत्पादन 10.2 करोड़ टन की तुलना में 12 प्रतिशत कम है।

इसके अलावा नवंबर 2019 के दौरान लगातार बारिश की वजह से भारी बाढ़ के कारण खरीफ फसल वाले क्षेत्रों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चावल उत्पाद क्षेत्र भी शामिल हैं। इस बीच कुछ राज्यों में हाल ही में बेमौसम बारिश के भी समाचार मिले हैं जिनमें ओडिशा के तटीय क्षेत्र भी शामिल है जिससे मौजूदा खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के दौरान धान की खरीद पर असर पड़ रहा है।

स्थानीय खबरों में दावा किया गया है कि ओडिशा के कुछेक जिलों में परंपरागत मिलें बारिश के लिहाज से उचित भंडारण क्षमता के अभाव का हवाला देते हुए मंडियों से धान नहीं उठा रही हैं। मौजूदा सत्र में ओडिशा 60 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखकर चल रहा है जिसमें से 1 जनवरी, 2020 तक केवल 12 लाख टन की ही खरीद हो सकी है, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में क्रमश: एक करोड़ टन और 27 लाख टन से ज्यादा की खरीद हो चुकी है।

हालांकि भारती खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बड़ी मात्रा में धान खरीद की जा चुकी है। खास तौर पर उत्तरी राज्यों में। इसके अलावा ओडिशा समेत शेष राज्यों में हाल के दिनों में खरीद प्रक्रिया प्रभावित करने वाली बारिश की कोई सूचना नहीं है। ओडिशा में खरीद मुख्य रूप से राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा संचालित की जाती है। इस बीच कारोबार के विश्लेषक अजय केडिया के अनुसार खाड़ी संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नरम रुख के बाद बासमती धान के दामों में दो प्रतिशत तक की उछाल आई है।

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