बिजनेस स्टैंडर्ड - फिर आएगी रियायत योजना!
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फिर आएगी रियायत योजना!

दिलाशा सेठ और सुदीप्त दे / नई दिल्ली 01 12, 2020

बजट में हो सकती है घोषणा

बिजनेस स्टैंडर्ड फिर आएगी रियायत योजना!राजस्व की तंगी से जूझ रही केंद्र सरकार अगले आम बजट में करदाताओं के लिए कर रियायत योजना लेकर आ सकती है। इसके तहत वे अपनी पिछले 5-6 वर्षों की अतिरिक्त आय का खुलासा कर सकते हैं। इस पर उन्हें कोई जुर्माना नहीं भरना होगा और न ही उन्हें कोई सजा होगी। अभी इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इससे करदाता पिछले मामलों के खुलने या सजा की आशंका के बिना अपनी घोषित आय को संशोधित कर सकते हैं। इससे न केवल कर अनुपालन में सुधार होगा बल्कि सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। 

सरकार को इस योजना के क्रियान्वयन के पहले वर्ष कम से कम 50,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सदस्य अखिलेश रंजन की अगुआई वाले प्रत्यक्ष कर कार्य बल ने इसका सुझाव दिया था। एक अधिकारी ने कहा, 'कई लोग अपने पिछले साल की आय का खुलासा करना चाहते हैं लेकिन वे ऐसा करने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि जैसे ही वे ऐसा करेंगे, उनके रिकॉर्ड की जांच शुरू हो जाएगी और उन्हें जुर्माना भरना होगा। इस तरह उन्हें मोटी रकम देनी होगी। प्रत्यक्ष कर कार्य बल द्वारा दिए गए सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।'

चालू वित्त वर्ष में देश के प्रत्यक्ष कर राजस्व में भारी कमी आई है। 15 दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक प्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि दर (रिफंड के बाद) महज 0.7 फीसदी रही है जबकि इसका बजटीय लक्ष्य 17.3 फीसदी की बढ़त के साथ 13.35 लाख करोड़ रुपये है। तीसरी किस्त के बाद अग्रिम कर संग्रह 2.51 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 2.47 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह इसकी वृद्धि महज 1.6 फीसदी रही। 

एक अधिकारी ने कहा, 'इस कदम से मुकदमेबाजी पर भी लगाम लगने की उम्मीद है। विभाग को मुकदमों पर भारी राशि खर्च करनी पड़ती है लेकिन उसे केवल 20 फीसदी मामलों में ही जीत मिलती है।' अदालतों और पंचाटों में कई वर्षों से करीबन 500,000 मामले लंबित हैं जिनमें विवाद की राशि करीब 7-8 लाख करोड़ रुपये है। नांगिया एंडरसन कंसल्टिंग के चेयरमैन राकेश नांगिया ने कहा कि अधिकांश कर विवादों में आय कर विभाग अपीलकर्ता या याची है।

इसलिए इस तरह की योजना से न केवल सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा बल्कि पंचाटों और अदालतों पर भी लंबित मुकदमों का बोझ कम होगा। उन्होंने कहा, 'इससे कारोबारी समुदाय और विदेशी निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा कि सरकार बेकार की मुकदमेबाजी और विवादों को कम करने के लिए कृतसंकल्प है।'

अगस्त 2019 में कर मुकदमेबाजी की सीमा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी। विभाग को इस सीमा से नीचे की राशि के मामलों में अपील दायर नहीं करने और इस कर प्रभाव से नीचे के मामलों में अपील वापस लेने को कहा गया है। आय कर विभाग के लिए पंचाट के समक्ष अपील हेतु कर प्रभाव सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये, उच्च न्यायालय के लिए 50 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये और उच्चतम न्यायालय के लिए एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दी गई थी। नए कर प्रभाव परिपत्र के जारी होने के बाद विभाग ने बड़ी संख्या में लंबित अपीलों को वापस ले लिया है। 

अप्रत्यक्ष कर के लिए माफी योजना की सफलता भी उत्साहजनक रही है जिससे केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड को 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व हासिल हो चुका है। सरकार ने पिछले साल सितंबर में सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना शुरू की गई थी और इसमें उत्पाद एवं सेवा कर से जुड़े विवाद और देनदारियां शामिल की गई हैं।  

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना की तर्ज पर प्रत्यक्ष कर के लिए माफी योजना पर विचार कर सकती है। ईवाई में पार्टनर और नैशनल टैक्स लीडर सुधीर कपाडिय़ा ने कहा, 'अगर प्रत्यक्ष कर समाधान योजना में ब्याज और जुर्माना माफ कर दिया जाता है और विवादित राशि के 50 फीसदी हिस्से के भुगतान का विकल्प दिया जाता है तो करदाता इसे हाथोंहाथ ले सकते हैं।' 

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