बिजनेस स्टैंडर्ड - ईरान संकट चिंता का विषय नहीं, कीमतें पहले जैसी करीब 60 डॉलर प्रति बैरल बनी रहेंगी
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ईरान संकट चिंता का विषय नहीं, कीमतें पहले जैसी करीब 60 डॉलर प्रति बैरल बनी रहेंगी

शाइन जैकब /  January 10, 2020

ईरान और अमेरिका में टकराव है और कच्चे तेल के दाम बढऩे का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फतीह बिरोल ने शाइन जैकब से बातचीत में कहा कि किसी संकट को झेलने के लिए दुनिया के पास पर्याप्त तेल है। उनका मानना है कि कच्चे तेल का 10 लाख बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन होने से कीमतें मौजूदा स्तर पर बरकरार रखने में मदद मिलेगी। संपादित अंश...

 
पश्चिम एशिया में पैदा हुई स्थिति और कच्चे तेल के बाजार की चिंता को आप किस रूप में देखते हैं? 
 
जैसा कि उम्मीद थी, तेल बाजार ने बहुत बुरी प्रतिक्रिया नहीं दी। अगर आप जनवरी 2019 से जनवरी 2020 तक का एक साल देखेंं तो बाजार करीब 60 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा है।  ऐसी स्थिति तब है, जब तेल उत्पादकों में के एक अहम उत्पादक वेनेजुएला में उत्पादन करीब शून्य रहा। ईरान करीब 30 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात कर रहा था, प्रतिबंधों के बाद यह करीब 3 लाख बैरल कम हुआ है, जो करीब कुछ भी नहीं है। लीबिया और इराक में अशांति है। सऊदी अरब की एक संपत्ति पर हमला हुआ, उसके बाद ईरान में कासिम सुलेमानी की हत्या हुई। इस सबके बावजूद कीमतों करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि विश्व की सामान्य स्थिति पर भी कीमतेंं 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहेंगी और कोई तेज बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ लोग तीन अंकों में दाम जाने की बात कर रहे हैं, लेकिन ऐसा मेरा मानना नहीं है।
 
दाम स्थिर बने रहेंगे, इस भरोसे की कोई वजह है? 
 
एक बड़ी वजह यह है कि अमेरिका, कनाडा, नॉर्वे, ब्राजील व अन्य देशों से तेल की बड़ी मात्रा में आपूर्ति हो रही है।  दुनिया के पास अतिरिक्त तेल मौजूद है और ऐसे में बाजार में कोई निराशा नहीं है। जब मैं यह साल 2020 देखता हूं तो हमें उम्मीद है कि इन देशों में उत्पादन में वृद्धि जारी रहेगी और बाजार में कम से कम प्रतिदिन 10 लाख बैरल रोजाना अतिरिक्त आपूर्ति होगी। ऐसे में भू राजनीतिक तनाव का कीमतों पर कम अवधि के लिए असर हो सकता है, लेकिन इससे तेल क्षेत्र की बुनियादी धारणा में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। 
 
इस साल की शुरुआत में आपने कहा था कि मार्च तक मांग बढ़ सकती है, क्या आपको ऐसा लगता है? 
 
उत्पादन में बढ़ोतरी की स्थिति मजबूत है। हम रोजाना 20 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं। अगर मांग में 10 लाख बैरल प्रतिदिन से मामूली ज्यादा बढ़ोतरी होती है तो 10 लाख बैरल अतिरिक्त होगा। एक साल पहले मैंने कहा था कि कीमतें बढऩे की उम्मीद नहीं है और तमाम फेरबदल के बाद भी वही हो रहा है। 
 
क्या 2015 में आपके आईईए में पदभार संभालने के बाद यह बड़े संकटों में से है? 
 
हां, यह बड़े संकटों में से एक था और  मैं उम्मीद करता हूं कि यह और नहीं बढ़ेगा। जब आप दुनिया को देखते हैं, मैं देखता हूं कि दुनिया खतरनाक जगह बनती जा रही है। खासकर पश्चिम एशिया, जहां तेल व गैर और कठिन बनता जा रहा है। भारत जैसे देश, जहां बड़ी मात्रा में तेल व गैस का आयात पश्चिम एशिया से होता है, इस समय की गतिविधियों का असर पड़ेगा। लेकिन सरकार सही दिशा में सही कदम उठा रही है, जिससे अनिश्चितता की स्थिति से निपटा जा सके। 
 
भारत में तेल की खपत 2020 के मध्य तक बढ़कर चीन से ज्यादा होने की उम्मीद की जा रही है, यह मांग कैसे पूरी की जाएगी? 
 
हाल ही में भारत विश्व का तीसरा बड़ा तेल का बाजार बन गया है और वह सिर्फ अमेरिका व चीन से पीछे है। अन्य ईंधन जैसे गैर और सौर के मामले में भी भारत तेजी से बढ़ रहा है। 2015 में एक रिपोर्ट में हमने कहा था कि भारत ऊर्जा के वैश्विक मामलों में केंद्र बन रहा है। यही अब हो रहा है। अब हम देख रहे हैं कि मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है क्योंकि भारत ज्यादा आधुनिक हो रहा है और इसकी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। इसके साथ ही ऊर्जा की मांग बढ़ रही है। तमाम तरीके हैं, जिससे भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकता है और मैंने इसके लिए 3 सुझाव दिए हैं, निवेश, निवेश और सिर्फ निवेश। भारत के लिए यह सबसे जरूरी है और निवेश हासिल करने के लिए सुधार, बाजार खोलना, और बाजार की वास्तविकता से तालमेल बिठाना जरूरी है। भारत को ऊर्जा बाजार के पुनर्गठन और इसके सुधार की जरूरत है. अन्यथा निवेश नहीं आएगा और अगर निवेश नहीं आता है तो जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं तैयार हो सकेगा। 
 
क्या आपको लगता है कि सब्सिडी को तार्किक बनाना भी जरूरी है? 
 
कुछ सीमित क्षेत्र हो सकते हैं, जहां सब्सिडी की जरूरत हो। लेकिन अगर आप पूरी तस्वीर देखें, जो यह बहुत चुनिंदा और तार्किक होनी चाहिए। 
 
रिपोर्ट में 2050 तक की स्थिरता पहल के बारे में विस्तार से बताया गया है, जिससे भारत को 190 अरब डॉलर बचाने में मदद मिलेगी। क्या आप विस्तार से बता पाएंगे?
 
ऊर्जा कुशलता पहले स्थान पर है। वातानुकूलन से लेकर ट्रकों व उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले बिजली के मोटरों में ऊर्जा कुशल क दमों का इस्तेमाल व अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल अहम है। सौर ऊर्जा के हिसाब से भारत की उपलब्धियां बहुत अच्छी हैं। हमें इसकी हिस्सेदारी बढ़़ाने की जरूरत है। इसका मतलब यह है कि हमें रूफटॉप सोलर की ओर कदम बढ़ाना होगा। यह मकानों, औद्योगिक भवनों और वाणिज्यिक इलाकों में मशरूम की तरह होना चाहिए।  इसके साथ ही भारत को प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। यह बहुत ज्यादा उपलब्ध है और लावारिस पड़ा है। खरीदार पाने के लिए निर्यातक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और भारत को इसका लाभ उठाना चाहिए। भारत को मौजूदा और योजना में शामिल 10 तरलीकृत प्राकृतिक गैस टर्मिनलों का इस्तेमाल करना होगा। सबसे अहम बात यह है कि आपको गांवों, कस्बों और शहरों तक पाइपलाइन से वितरण की व्यवस्था करनी होगी, जिससे कि हर व्यक्ति तक प्राकृतिक गैस पहुंच सके। 
Keyword: america, iran, clash, oil,,
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