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जेएनयू छात्रों ने तेज किया आंदोलन

अर्चिस मोहन एवं एजेंसियां /  January 09, 2020

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति को बर्खास्त करने, फीस में कमी करने और संस्थान में हिंसा के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों छात्रों को तितर-बितर करने के लिए गुरुवार शाम को दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया। रविवार रात्रि जेएनयू परिसर में घुसकर नकाबपोश गुंडों द्वारा की गई हिंसा में पुलिस ने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है। कांग्रेस तथा वाम दलों के छात्र संगठनों से जुड़े और दूसरे हजारों छात्रों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने के लिए मंडी हाउस से शास्त्री भवन तक जुलूस निकाला। छात्रों का कहना था कि वे मंत्रालय के जबाव से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने के लिए राष्ट्रपति भवन तक जुलूस निकालने की योजना बनाई और उसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया। 

 
जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आइशी घोष का कहना है कि जब तक जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार को बर्खास्त नहीं किया जाएगा, तब तक छात्र और अध्यापक नहीं रुकेंगे।  मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने बताया कि मंत्रालय एक बार फिर छात्रों के दावे पर कुमार से शुक्रवार को बात करेगा। उन्होंने बताया कि छात्र फीस में हुए संशोधन को परिसर में लागू नहीं किए जाने की शिकायत कर रहे हैं। खरे ने कहा, 'कुलपति को हटाना कोई उपाय नहीं है।' भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार शाम ट्वीट किया, 'इस तरह की खबरें हैं कि एचआरडी मंत्रालय ने दो बार जेएनयू के कुलपति को फीस वृद्धि का मुद्दा सुलझाने के लिए कारगर तरीका लागू करने के लिए दो बार कहा था। उन (कुलपति) को छात्रों तथा अध्यापकों से मिलकर बात करने की सलाह भी दी गई थी। यह खौफनाक है कि कुलपति ने सरकार के आदेश को लागू नहीं करने का हठ अपनाया। यह नजरिया निंदनीय है और मेरी राय में ऐसे कुलपति को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।'
 
जेएनयू कैंपस में छात्र फीस वृद्धि, संस्थान के भीतर घुसकर की गई हिंसा तथा सीएए एवं एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।  सीएए को संवैधानिक घोषित करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि देश मुश्किल दौर से गुजर रहा है और इतनी हिंसा हो रही है कि शांति के लिए प्रयास होने चाहिए। पीठ ने कहा कि वह हिंसा रुकने के बाद संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने सुनवाई के दौरान कहा, 'बहुत अधिक हिंसा हो रही है। देश बुरे दौर से गुजर रहा है और शांति के लिए शीघ्र प्रयास होने चाहिए... न्यायालय का काम किसी कानून की वैधता निर्धारित करना है, उसे संवैधानिक घोषित करना नहीं।' शीर्ष अदालत ने इससे पहले इन मामलों से संबंधित 59 याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की है। 
 
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को आरोप लगाया कि जेएनयू में हिंसा 'आधिकारिक रूप से प्रायोजित गुंडागर्दी' थी और कहा कि इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह तथा एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा कि जेएनयू परिसर में सामान्य स्थिति तब तक संभव नहीं थी जब तक इसके कुलपति एम जगदीश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। वहीं, सीएए की संवैधानिक वैधता पर आपत्ति उठाते हुए गुरुवार को 106 सेवानिवृत्त अफसरशाहों ने लोगों को एक खुला पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि एनपीआर और एनआरआईसी दोनों 'अनावश्यक और गैरजरूरी कार्य' थे, जिससे जनता को कष्ट होगा।
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