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आर्थिक सुधारों से शेयर बाजार में आएगी मजबूती

जश कृपलानी /  January 09, 2020

प्रमुख सूचकांकों का प्रतिफल वित्त वर्ष 2021 में कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन फंड प्रबंधक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद देख रहे हैं जिससे गिरावट का शिकार हुए मिड-कैप सेगमेट में बदलाव देखा जा सकता है। आदित्य बिड़ला सनलाइफ म्युचुअल फंड के मुख्य प्रमुख निवेश अधिकारी (इक्विटी) महेश पाटिल ने जश कृपलानी के साथ बाचतीत में वृद्घि को लेकर अपने उत्साह के बारे में विस्तार से बताया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
मौद्रिक नीति और ऑपरेशन ट्विस्ट पर आपका क्या नजरिया है?
 
मौद्रिक नीति 2019 में काफी हद तक अनुकूल रही। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले साल दरों में 135 आधार अंक की कटौती की और नकदी को प्रचुर मात्रा में बनाए रखा। हालांकि नीतिगत दरों पर अमल एक बड़ी समस्या है। दर कटौती के बावजूद, अभी तक बैंकों की उधारी दरों में इसका बदलाव नहीं दिखा है। आरबीआई भी यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है कि दर कटौती का पूरा लाभ किस तरह से उपभोक्ताओं को मुहैया कराया जा सकता है। मुद्रास्फीति में वृद्घि और तेल कीमतों से जुड़े जोखिम को देखते हुए, हमें अल्पावधि में किसी दर कटौती की संभावना नहीं दिख रही है। आरबीआई का ऑपरेशन टिï्वस्ट 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों की दीर्घावधि दरें लगभग 25 आधार अंक तक नीचे लाने में सफल रहा। इससे कम दरों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है। 
 
क्या कम रेटिंग वाले कर्जदारों के लिए कोष की लागत ऊंची बनी रहेगी?
 
ज्यादातर एएए-रेटिंग वाले कर्जदारों के लिए, अगली दो तिमाहियों में यह अंतर घट सकता है, क्योंकि नकदी स्तर में सुधार आया है। निवेशकों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है। कुल मिलाकर, आरबीआई के विदेशी एक्सचेंज परिचालन की वजह से व्यवस्था में नकदी अब 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसलिए हम उधारी में तेजी देख सकते हैं।
 
आर्थिक सुधार की रफ्तार कैसी रहेगी?
 
यह धीमी रहेगी। राजकोषीय दृष्टिïकोण से, सरकारी खर्च के लिए सीमित गुंजाइश है। सरकार द्वारा इस साल राजकोषीय घाटे में कुछ वृद्घि की अनुमति दिए और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक व्यवस्थित होने की संभावना है। हमारा मानना है कि दिसंबर तिमाही के लिए आंकड़े आर्थिक वृद्घि में सुधार के शुरुआती संकेत देंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमें वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही से खपत में धीरे धीरे सुधार शुरू होने की संभावना है। बेमौसम बारिश की वजह से हालांकि खरीफ फसल पैदावार अच्छी नहीं रही है, लेकिन रबी पैदावार अच्छी रहने की संभावना है, क्योंकि जलाशयों का स्तर अनुकूल रहा है। खाद्य कीमतों में वृद्घि से मजबूत ग्रामीण आय को मदद मिलेगी। वाहन जैसे कुछ क्षेत्रों (जिनमें शुरू में मंदी देखी गई) में सुधार दिखने की संभावना है। इसके अलावा सरकारी खर्च में सुधार और ऋण बाजार में सख्ती घटने से वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। में वित्त वर्ष 2021 में अर्थव्यवस्था 6 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है। 
 
क्या अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार महंगे दिख रहे हैं?
 
बाजार में जिस कारक का मौजूदा समय में असर दिख रहा है वह यह है कि मंदी की वजह से कॉरपोरेट भारत में आय पर दबाव पड़ा है। लेकिन पिछले वर्षों से मंदी का असर समाप्त हुआ है। अगले वित्त वर्ष कई क्षेत्र सुधार देख सकते हैं। आय वृद्घि जीडीपी में सामान्य वृद्घि के मुकाबले काफी बेहतर रह सकती है। आय वृद्घि के अनुमान वित्त वर्ष 2021 में लगभग 23 प्रतिशत की मजबूत वृद्घि का संकेत दे रहे हैं। 
 
क्या मूल्यांकन महंगा बने रहने की संभावना है?
 
उपर्युक्त कारकों और वैश्विक रूप से व्यापार से संबंधित जोखिम को देखते हुए हमें मूल्यांकन ऊंचे स्तरों पर रहने का अनुमान है। हमारा मानना है कि बाजार का मूल्यांकन अच्छा है और इसमें आगे बड़ा बदलाव आने के आसार नहीं हैं। बाजार से प्रतिफल आय वृद्घि की तुलना में कुछ कम रह सकता है, क्योंकि बेहतर आय वृद्घि में मूल्यांकन मल्टीपल का कुछ हद तक असर पहले से ही दिख रहा है।
 
आप किन क्षेत्रों में निवेश के अवसर देख रहे हैं?
 
छोटे आकार के कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी (गैर-जरूरी सामान) की बिक्री में तेजी से सुधार आ सकता है। कंपनियों के असंगठित क्षेत्र से संगठित में तब्दील होने की कोशिश और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय से इस सेगमेंट को फायदा होगा। बेहतर प्रबंधन वाले निजी बैंकों बाजार भागीदारी में इजाफा बरकरार रहेगा। फार्मा सेक्टर ने भी अच्छे अवसर दिए हैं। 
 
इस साल बाजार को लेकर आपका क्या नजरिया है?
 
निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों के लिए, यह समेकन की अवधि होगी। बुनियादी आधार इस साल महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। निफ्टी का रिटर्न नरम रहेगा और यह ऊंचे एक अंक में रह सकता है। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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