बिजनेस स्टैंडर्ड - अगले वित्त वर्ष तक जा सकती है बीपीसीएल और कॉनकॉर की विनिवेश प्रक्रिया
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अगले वित्त वर्ष तक जा सकती है बीपीसीएल और कॉनकॉर की विनिवेश प्रक्रिया

शाइन जैकब / नई दिल्ली January 08, 2020

निवेशकों को जुटाने के लिए न कोई सूचना ज्ञापन (आईएम), न कोई डेटा रूम और चयनित आमंत्रण। किसी भी कंपनी की हिस्सेदारी बिक्री के लिए यह तरीका अपारंपरिक नजर आ सकता है लेकिन निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने विदेश में हाल में इसी तरीके से रोडशो का आयोजन किया।

ये रोडशो भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) और कंटेनर कॉर्पोरेशन (कॉनकॉर) में सरकार की हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री के लिए आयोजित किए गए थे। इस सबके बावजूद बीपीसीएल का रोडशो ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किए गए जिसने शेल, शेवरॉन, कोनोकोफिलिप्स, सऊदी अरामको, रोसनेफ्ट और एक्सॉन मोबिल जैसी बड़ी वैश्विक तेल और गैस कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया है। कॉनकॉर के लिए डी पी वर्ल्ड और अदाणी समूह जैसी कंपनियों ने दुबई और मुंबई के रोडशो में हिस्सा लिया। 

इनमें रुचि लेने वाली करीब सभी कंपिनयों ने कहा कि हिस्सेदारी बिक्री के लिए 31 मार्च को अंतिम समयसीमा तय करना एक रुकावट है। लिहाजा, सरकार में शामिल कुछ लोग मानते हैं कि हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया अगले वित्त वर्ष में जा सकती है। बीपीसीएल और कॉनकॉर दोनों के लिए विनिवेश प्रक्रिया के सलाहकार डेलॉइट ने बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से पूछे गए सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। विनिवेश प्रक्रिया टलने का मतलब है कि राजकोषीय गणित पर असर पड़ सकता है और चालू वित्त वर्ष के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा कर पाना मुश्किल हो सकता है।

उद्योग के एक सूत्र ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि रोडशो का आयोजन सूचना ज्ञापन और डेटा रूम जैसी औपचारिकताओं को पूरा किए बिना ही किया गया। सूचना ज्ञापन के जरिये संभावित निवेशकों को विनिवेश के उद्देश्यों, जोखिमों और निवेश की शर्तों के बारे में बताया जाता है। 

इस प्रक्रिया से करीब से जुड़े कई लोगों ने इसकी पुष्टि की कि दो कारणों से इन सामान्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। पहला कारण यह है कि देश अपनी रणनीतिक परिसंपत्तियों की वित्तीय जानकारियों, भविष्य की योजनाओं और उनकी भौतिक स्थिति को साझा नहीं कर सकता है। दूसरी वजह यह है कि इन चर्चापरक रोडशो का आयोजन यह जानने के लिए किया गया था कि संभावित निवेशक क्या चाहते हैं। भावी निवेशकों को एक गुप्त समझौता पर हस्ताक्षर करना होगा। 

इसके पीछे का विचार उन निवेशकों की प्रतिक्रिया के आधार पर प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करना और शुद्घ परिसंपत्ति और क्षमता के आधार पर चयनित कंपनियों को आमंत्रित करना था।  इसके लिए इसमें आमंत्रित होने वाले निवेशकों की रिफाइनरी कारोबार में निवेशित पूंजी को भी ध्यान में रखा गया था। संभावित निवेश्कों की बड़ी प्रतिक्रिया विनिवेश की प्रक्रिया, वातावरण और सुरक्षा के मुद्दों से जुड़ी थी क्योंकि उनके वैश्विक बोर्डों और निवेशकों को बड़े सौदों को मंजूरी देना होता है। 

बिना डेटा रूम और सूचना ज्ञापन के कोई भी रोडशो सतही ही रहेगा। इनके बिना चर्चा केवल सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूद जानकारियों तक ही सीमित रहेगी। उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ व्यक्ति ने कहा कि हो सकता है कि अभिरूचि पत्र के चरण के बाद इन जानकारियों को साझा करने की योजना बनी हो।

हालांकि, एक अन्य व्यक्ति ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए कहा कि 11-12 अरब डॉलर के सौदा के लिए केवल निवेशकों का एक चयनित समूह ही होना चाहिए जो उस सौदे में शामिल होने में सक्षम हों। एक अधिकारी ने कहा कि चर्चापरक रोडशो का आयोजन इसलिए भी किया गया कि इससे कंपनियों की ओर से इच्छित प्रक्रिया के बारे में पता चल सके। 

सरकार शीघ्र ही अभिरूचि पत्र ला सकती है और इस प्रक्रिया में शामिल होने वाले भागीदारों में से पांच भावी निवेशकों का चयन किया जाएगा। इन्हीं निवेशकों के साथ रणनीतिक जानकारी साझा की जाएगी। इसकी वजह काफी स्पष्ट है। रणनीतिक सौदा होने के कारण सरकार इसकी जानकारी हर किसी के साथ साझा करना नहीं चाहती है। वह प्रमुख स्थानों पर रिफाइनरियों, पाइपलाइनों, विदेशी संपत्तियों और स्थानीय भू संपत्तियों के रणनीतिक महत्त्व पर विचार कर रही है। 

एक अन्य उद्योग विशेषज्ञ ने कहा कि यही स्थिति कॉनकॉर के लिए भी हो सकती है। पिछले हफ्ते खबर थी कि ये दोनों सौदे केवल 2020-21 में ही पूरे हो सकते हैं। उद्योग के सूत्र कहते हैं कि देरी की प्रमुख वजह कुछ भावी निवेशकों की ओर से जताई गई चिंता है। 

रणनीतिक विनिवेश का मामला होने के कारण अधिकारियों को इसके लिए अच्छी तरह से योजना बनानी चाहिए थी। इस पर निर्णय नवंबर मे लिया गया था और जनवरी आ जाने के बावजूद वे परिचर्चा रोडशो को पूरा कर पाने में ही नाकाम हैं। एक सूत्र ने बताया कि विनिवेश में देरी होने से सरकार के राजकोषीय घाटा लक्ष्य को झटका लगेगा। रोड शो के आयोजन में देरी की एक प्रमुख वजह वर्षांत में होने वाली छुट्टियां रहीं जिस दौरान बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े अधिकारी अवकाश पर थे।

Keyword: BPCL, Concor, Sound raodshow, divestment, शेल, शेवरॉन, कोनोकोफिलिप्स, सऊदी अरामको, रोसनेफ्ट,
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