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जेएनयू वापस लौट आएं छात्र: कुलपति

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली January 07, 2020

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा घोषित बुधवार की एकदिवसीय हड़ताल को मंगलवार को कई छात्र संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा की। वहीं, कई कार्यकर्ता तथा विपक्षी दलों के नेताओं ने रविवार रात्रि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंदर छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला करने वाले किसी भी नकाबपोश हमलावरों की पहचान करने एवं उन्हें गिरफ्तार करने में विफल रहने के लिए दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाना जारी रखा। 

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जनता से जेएनयू हमले की वीडियो क्लिप और सूचनाएं साझा करने की अपील की है। इस हमले के सिलसिले में अज्ञात लोगों के खिलाफ  एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और अपराध शाखा इस घटना की जांच कर रही है। अपराध शाखा ने सीसीटीवी फुटेज सहित साक्ष्य जुटाने के लिए स्थानीय पुलिस टीम के साथ सोमवार को परिसर का दौरा किया। पुलिस के मुताबिक एजेंसी घटना की सभी सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए तथा व्हाट्सऐप पर साझा किए गए वीडियो क्लिप खंगाल रही है।  

प्राथमिकी दर्ज

जेएनयू के सर्वर रूम में तोडफ़ोड़ की घटना के संबंध में दिल्ली पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने बताया कि ये प्राथमिकी जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर 5 जनवरी को दर्ज की गई। जेएनयू प्रशासन ने तोडफ़ोड़ के सिलसिले में छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत अन्य पदाधिकारियों के नाम दिए गए थे लेकिन पुलिस ने घोष या अन्य छात्रों के नाम प्राथमिकी में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं किए हैं। पुलिस ने बताया कि सर्वर बंद करने की शिकायत 3 जनवरी को और सर्वर रूम में तोडफ़ोड़ की शिकायत 4 जनवरी को दर्ज करवाई गई थी। 

हमले के सिलसिले में सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफ एसएल) की कई टीमें मंगलवार को जेएनयू पहुंची। एफएसएल की भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान विभागों की टीमें विश्वविद्यालय में हैं।

भौतिकी टीम विश्वविद्यालय परिसर में नकाबपोश लोगों द्वारा छात्रों और अध्यापकों पर हमले में इस्तेमाल किए गए सरिया (रॉड) और पत्थरों जैसे सबूतों को एकत्र करेगी जबकि रसायन टीम वहां मौजूद रसायनों के नमूने जुटाएगी। जीव विज्ञान टीम अन्य साक्ष्यों सहित डीएनए नमूने एकत्र करेगी। फोटो विशेषज्ञों की एक टीम भी परिसर में मौजूद है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने एफ एसएल से सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के लिए एक कंप्यूटर फॉरेंसिक टीम भेजने का अनुरोध किया है।  

कुलपति की गुहार

जेएनयू कुलपति एम जगदीश कुमार ने मंगलवार को छात्रों से कहा कि वे बीती बातों को पीछे छोड़कर विश्वविद्यालय परिसर लौट आएं। कुमार इस बात को लेकर छात्रों और शिक्षकों केनिशाने पर हैं कि उन्होंने तब पर्याप्त कदम नहीं उठाए जब उन पर परिसर में नकाबपोशों द्वारा बेरहमी से हमला किया जा रहा था। कुमार ने कहा, 'सभी घायल छात्रों के प्रति मेरी संवेदना है। घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं छात्रों से कहना चाहूंगा कि जेएनयू परिसर एक सुरक्षित स्थान है।' उन्होंने कहा, 'मैं सभी छात्रों से आग्रह करता हूं कि वे परिसर लौट आएं।' जेएनयू परिसर में रविवार रात लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस कुछ नकाबपोश लोगों ने परिसर में प्रवेश कर छात्रों और शिक्षकों पर हमला कर दिया था और परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। बाद में प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित हमले में कम से कम 34 लोग घायल हो गए थे। 

इस बीच मुंबई में जेएनयू हमले का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को मंगलवार सुबह गेटवे ऑफ  इंडिया से आजाद मैदान ले जाया गया क्योंकि सड़क जाम होने की वजह से आम लोगों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से जाने की अपील की थी लेकिन वे नहीं माने इसलिए उन्हें आजाद मैदान ले जाया गया जिसके बाद विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया।  

हिंदू रक्षा दल का दावा

जेएनयू हमले में शामिल लोगों की पहचान के लिए पुलिस वीडियो फुटेज और चेहरे पहचानने की प्रणाली का इस्तेमाल कर रही है। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि पुलिस दोषियों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज और चेहरे पहचानने की प्रणाली का इस्तेमाल कर रही है। विश्वविद्यालय में हुए हमले को लेकर दक्षिणपंथी समूह हिंदू रक्षा दल के दावे की जांच भी पुलिस कर रही है। हिंदू रक्षा दल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में जेएनयू परिसर में हुए हमले की कथित तौर पर जिम्मेदारी ली है। यह वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था और फिर यह वायरल हो गया। इस वीडियो में एक व्यक्ति खुद को पिंकी चौधरी बताते हुए कह रहा है कि जो लोग 'राष्ट्र विरोधी गतिविधियों' का सहारा लेंगे उनके साथ जेएनयू छात्रों और अध्यापकों जैसा ही सलूक किया जाएगा। 

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेता 13 जनवरी को बैठक कर सकते हैं जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालय परिसरों में हिंसा की स्थिति पैदा होने और नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे प्रदर्शन को लेकर बातचीत की जाएगी। 

साथ में एजेंसियां

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